VIDEO : पीएमसीएच के बिस्तर पर मरीज हैं पड़े, वार्ड अटेंडेंट हड़ताल पर अड़े, जानें क्यों?

Updated at : 30 Aug 2023 2:37 PM (IST)
विज्ञापन
VIDEO : पीएमसीएच के बिस्तर पर मरीज हैं पड़े, वार्ड अटेंडेंट हड़ताल पर अड़े, जानें क्यों?

पीएमसीएच में फ्रंटलाइन नामक प्राइवेट एजेंसी के तहत करीब 246 कर्मी कार्यरत है, जिनका वेतन पिछले पांच महीने से नहीं दिया गया है. हड़ताली कर्मचारियों का कहना है कि इसकी लिखित शिकायत भी की गई है.

विज्ञापन

बिहार का सबसे बड़ा सरकारी अस्पताल पीएमसीएच. इस बड़े सरकारी अस्पताल के बिस्तरों पर बिना दवा-दारू के मरीज पड़े हैं, तो बकाया वेतन भुगतान की मांग को लेकर गेट पर कर्मचारी अड़े हैं. खबर है कि बिहार के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल पीएमसीएच में प्राइवेट एजेंसी के तहत कार्यरत वार्ड अटेंडेंट कर्मचारी अपने पांच महीने के बकाया वेतन की मांग को लेकर हड़ताल पर चले गए हैं. मामला पटना के पीएमसीएच परिसर का है, जहां कर्मचारियों की हड़ताल से मरीजों में अफरा तफरी का माहौल बना है.

बुधवार को पीएमसीएच के कई वार्डो में सेवा दे रहे महिला और पुरुष वार्ड अटेंडेंट दर्जनों की संख्या में एकत्रित होकर अनिश्चित कालीन हड़ताल पर चले गए. वहीं, इन कर्मचारियों ने बकाया वेतन के भुगतान में हो रही देरी के पीछे एजेंसी सहित अस्पताल प्रशासन पर अनदेखी का आरोप लगाया है.

मिली जानकारी के अनुसार, पीएमसीएच में फ्रंटलाइन नामक प्राइवेट एजेंसी के तहत करीब 246 कर्मी कार्यरत है, जिनका वेतन पिछले पांच महीने से नहीं दिया गया है. हड़ताली कर्मचारियों का कहना है कि इसकी लिखित शिकायत भी की गई है. बावजूद इसके न कोई उनकी सुध लेने वाला है और न ही उनके परिवार का. मरीजों की जान भगवान भरोसे कंठ में अटकी हुई है सो अलग से. आलम यह कि कर्मचारियों के बच्चे घर पर राखी का इंतजार कर रहे हैं और मरीज बिस्तर पर पड़े-पड़े दवाई का. फिलहाल, कर्मचारियों ने ऐलान किया है कि जब तक उनके बकाया वेतन का भुगतान नहीं किया जाता, तब तक वे काम पर वापस नहीं लौटेंगे.

विज्ञापन
KumarVishwat Sen

लेखक के बारे में

By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन