व्याकुल कवि की वेदना है पेन ड्राइव मे पृथ्वी, जानें अकादमी पुरस्कार मिलने पर क्या बोले अजित आजाद
Published by : Ashish Jha Updated At : 23 Dec 2022 4:24 PM
आजाद कहते हैं कि 256 पृष्ठों की यह कविता-संग्रह पेनड्राइव मे पृथ्वी दरअसल एक कवि की वेदना है, चिंता है, बेचैनी है. 185 कविताओं के इस संकलन में पृथ्वी पर मौजूद हर एक वस्तु को बचाने उसे संरक्षित करने की चिंता प्रकट की गयी है.
पटना. समकालीन मैथिली कविता में देशज शब्दों के माध्यम से विविध विषयों को शिल्पगत करनेवाले कवि अजित आजाद कविता में नूतन प्रयोग करते रहे हैं. अजित आजाद को मैथिली भाषा के लिए इस वर्ष का साहित्य अकादमी पुरस्कार मिला है. अपनी पुरस्कृत कृति के संबंध में वो कहते हैं कि पृथ्वी को बचाने के लिए व्याकुल एक कवि की वेदना है पेन ड्राइव मे पृथ्वी, जिसमें कवि सोचता है कि खत्म हो रहे इस पृथ्वी को एक पेन ड्राइव में रख लिया जाये, लेकिन फिर उसे एहसास होता है कि पेन ड्राइव भी तो पृथ्वी के साथ ही खत्म हो जानेवाला है.
इस वर्ष का साहित्य अकादमी पुरस्कार मिलने पर प्रभात खबर से खास बातचीत करते हुए अजित आजाद ने कहा कि यह पुरस्कार हमारे शुभचिंतकों, मित्रों और मेरे पाठकों का है. आजाद कहते हैं कि 256 पृष्ठों की यह कविता-संग्रह पेनड्राइव मे पृथ्वी दरअसल एक कवि की वेदना है, चिंता है, बेचैनी है. 185 कविताओं के इस संकलन में पृथ्वी पर मौजूद हर एक वस्तु को बचाने उसे संरक्षित करने की चिंता प्रकट की गयी है. यहां तक कि बोतल बंद पानी की छटपटाहट भी इसमें मिलेगी, जिसे बेचैनी है कि कोई आकर उस बोतल का ढक्कन खोल दे. मैंने इस संग्रह में उन तमाम चीजों को समेटने की कोशिश की है, जो मुझे खत्म होता प्रतीत हो रहा है.
प्रेम व प्रतिरोध की कविताओं का मूल उत्स रखनेवाले कवि आजाद कहते हैं कि इस संग्रह में संबंधों को बचाने से लेकर कई कविताएं हैं. आज हमारे समाज में संबंध टूट रहे हैं, खत्म हो रहे हैं. तकनीकी जीवनशैली ने हमारे पारिवारक सरोकार को प्रभावित किया है. सहज कवि के रूप में मित्रों के बीच पहचान रखनेवाले अजित आजाद की कविताएं पाठकों के मन को असहज कर देती हैं. आजाद कहते हैं कि मैथिली कविता को वैचारिक स्तर पर आमजनों से जोड़ने का मैंने हमेशा प्रयास किया है और इस कविता संग्रह में भी वो आपको मिलेगा.
वर्तमान और भविष्य की योजनाओं के संबंध में पेशे से पत्रकार अजित आजाद कहते हैं कि 30 से अधिक पुस्तकों की रचना कर चुका हूं. पिछले कई दशकों से मैं जो कर रहा हूं, वही आगे भी करता रहूंगा. घुमंतू प्रवृत्ति के इस कवि का पटना, मधुबनी के बाद आजकल दिल्ली ठिकाना बना हुआ है, इस सवाल पर आजाद कहते हैं कि यही अनवरत यात्रा इनके साहित्य का प्राण-तत्व है. उन्होंने बताया कि वो इनदिनों एक मैथिली पाक्षिक सहित दो मासिक पत्रिका के संपादन से जुड़े हुए हैं, यूट्यूब चैनल का संचालन कर रहे हैं और मैथिली की एक फिल्म राजा सलहेस के निर्माण से भी सम्बद्ध हैं. वैसे वो प्रकाशन नवारंभ का काम पहले की तरह ही जारी रखे हुए हैं.
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By Ashish Jha
डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में 10 वर्षों का अनुभव. लगातार कुछ अलग और बेहतर करने के साथ हर दिन कुछ न कुछ सीखने की कोशिश. वर्तमान में बंगाल में कार्यरत. बंगाल की सामाजिक-राजनीतिक नब्ज को टटोलने के लिए प्रयासरत. देश-विदेश की घटनाओं और किस्से-कहानियों में विशेष रुचि. डिजिटल मीडिया के नए ट्रेंड्स, टूल्स और नैरेटिव स्टाइल्स को सीखने की चाहत.
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