बिहार भाजपा में होगा बड़ा सांगठनिक बदलाव, नेता प्रतिपक्ष को लेकर अभी भी तस्वीर साफ नहीं

भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष डॉ संजय जायसवाल ने बताया कि पिछले दरवाजे से बनी सरकार के विरुद्ध भाजपा सड़क से सदन तक संघर्ष करेगी. सूत्रों के अनुसार बिहार विधानमंडल के दोनों सदनों में नेता के चयन को चर्चा हुई, हालांकि घोषणा नहीं की गयी.
पटना/नयी दिल्ली. बिहार में राजनीतिक उलटफेर के बाद बदली हुई परिस्थितियों के मद्देनजर भाजपा अपनी राज्य इकाई में प्रमुख पदों पर बदलाव कर सकती है और नये चेहरों को प्रमुख जिम्मेदारी सौंप सकती है. ऐसे संकेतों के बीच केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने बिहार के प्रमुख भाजपा नेताओं के साथ मंगलवार को दिल्ली में पार्टी मुख्यालय में मंथन किया और भावी रणनीति पर चर्चा की. बैठक के बाद भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष डॉ संजय जायसवाल ने बताया कि पिछले दरवाजे से बनी सरकार के विरुद्ध भाजपा सड़क से सदन तक संघर्ष करेगी. सूत्रों के अनुसार बिहार विधानमंडल के दोनों सदनों में नेता के चयन को चर्चा हुई, हालांकि घोषणा नहीं की गयी.
जानकारी के मुताबिक भाजपा का शीर्ष नेतृत्व विधानसभा और विधानपरिषद में पार्टी के नेताओं के साथ ही संगठन में भी प्रमुख पदों पर बदलाव की दिशा में काम कर रहा है. पार्टी उन विधानसभा क्षेत्रों में अपनी स्थिति मजबूत करना चाहती है, जहां अभी तक वह मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व वाले जनता दल यूनाइटेड के छोटे सहयोगी के रूप में काम करती रही है. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा नौ अगस्त को राजग से नाता तोड़ने के बाद भाजपा की यह पहली बड़ी बैठक है, जिसमें पार्टी का शीर्ष नेतृत्व भी मौजूद है.
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा की मौजूदगी में बिहार के प्रमुख भाजपा नेताओं के साथ मंगलवार को दिल्ली में हुई बैठक के बाद बिहार भाजपा के अध्यक्ष संजय जायसवाल ने संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि जदयू और राजद के गठबंधन ने जनादेश का अपमान किया है और पिछले दरवाजे से ‘लालू राज’ का प्रवेश कराया है. जायसवाल ने दावा किया कि गरीब लोग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना मसीहा मानते हैं और भाजपा अगले लोकसभा चुनाव में बिहार में 40 में से 35 सीटें जीतेगी.
भाजपा सूत्रों ने बताया कि पार्टी अब उन समुदायों को अपनी ओर आकर्षित करने के लिए आक्रामक रुख अख्तियार करेगी, जो वह अभी तक जदयू के कारण नहीं करती थी. उसका जोर खासकर अति पिछड़ा और दलितों के एक वर्ग को लुभाने पर होगा, जिन्हें मुख्यमंत्री कुमार की मजबूती का प्रमुख आधार माना जाता है. पार्टी का जोर पूरे राज्य में अपना जनाधार बढ़ाने का भी रहेगा.
कोर कमेटी की बैठक में प्रदेश संगठन महामंत्री भिखूभाई दलसानिया, बिहार के सह प्रभारी हरीश द्विवेदी, भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष डॉक्टर संजय जयसवाल, सांसद सुशील कुमार मोदी, रविशंकर प्रसाद, केंद्रीय मंत्री अश्विनी चौबे नित्यानंद राय, गिरिराज सिंह, पूर्व मंत्री शाहनवाज हुसैन, नंदकिशोर यादव, मंगल पांडे, सम्राट चौधरी, पूर्व उपमुख्यमंत्री तार किशोर प्रसाद, जनक राम, नवल किशोर यादव, राजेंद्र प्रसाद गुप्ता आदि मौजूद थे.
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By Prabhat Khabar News Desk
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