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बिहार में बची गाय की केवल दो देसी नस्लें, वो भी विलुप्त होने के कगार पर, जानें किस गाय का दूध पी रहा बिहार

Updated at : 09 Feb 2024 11:26 AM (IST)
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बिहार में बची गाय की केवल दो देसी नस्लें, वो भी विलुप्त होने के कगार पर, जानें किस गाय का दूध पी रहा बिहार

गायों की संख्या के लिहाज से देशभर में बिहार चौथे स्थान पर है. लेकिन, राज्यभर में चिह्नित रूप से सिर्फ दो मूल नस्ल की गाय ही शेष रह गयी है. वर्तमान में दूसरे राज्यों से लायी गयी और हाइब्रिड नस्ल की गायों का ही दूध बिहार के लोग पी रहे हैं.

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मनोज कुमार, पटना. देशभर में 19.25 करोड़ गाय हैं. देश की कुल गायों की संख्या का 7.95% बिहार में है. यानी बिहार में गायों की संख्या 1.54 करोड़ है. लेकिन, इनमें बिहार की मूल नस्ल की गाय न के बराबर है. हाइब्रिड नस्ल और दूसरे राज्यों से लायी गयी गाय ही बिहार में है. गायों की संख्या के लिहाज से देशभर में बिहार चौथे स्थान पर है. लेकिन, राज्यभर में चिह्नित रूप से सिर्फ दो मूल नस्ल की गाय ही शेष रह गयी है. पूर्णिया और बचौर ये दो नस्ल की गाय ही अब बिहार की मूल नस्ल रह गयी है. वर्तमान में दूसरे राज्यों से लायी गयी और हाइब्रिड नस्ल की गायों का ही दूध बिहार के लोग पी रहे हैं.

बची हुई मूल नस्ल भी विलुप्त होने के कगार पर

पूर्णिया नस्ल की गाय पूर्णिया, अररिया, कटिहार, मधेपुरा, किशनगंज, सुपौल में ही कहीं-कहीं मिलेगी. बचौर नस्ल की गाय दरभंगा, सीतामढ़ी और मधुबनी के क्षेत्रों में ही पायी जाती हैं. इन दोनों नस्लों की गायों की संख्या लगभग एक से डेढ़ हजार के आसपास होगी. इनका भी संरक्षण नहीं हुआ तो ये नस्लें भी विलुप्त हो जायेंगी. गाय की गंगातीरी नस्ल उत्तर प्रदेश और बिहार में पायी जाती थी, लेकिन अब बिहार में यह गाय नहीं मिलती है. यह मध्यम आकार की होती है. यह प्रति ब्यांत में औसतन 900-1200 लीटर दूध देती है. इसके दूध में 4.1-5.2 प्रतिशत वसा की मात्रा होती है.

गुजरात, पंजाब और राजस्थान की गायों की भरमार

भारत में साहीवाल, गिर, थारपारकर और लाल सिंधी समेत कई अन्य देसी नस्ल है जिनको भारतीय पशु आंनुवशिक संस्थान ब्यूरो में रजिस्टर्ड किया गया है. भारतीय पशु आंनुवशिक संस्थान ब्यूरो के मुताबिक अपने देश में 43 प्रकार की देसी नस्ल की गायें हैं. बिहार में गुजरात, पंजाब और राजस्थान की गायों की भरमार है. यहां पंजाब की साहीवाल, राजस्थान की थारपारकर और गुजरात की गिर नस्ल की गाय की भरमार है. राज्य में इस साल इन्हीं नस्लों की गायों की भी सरकारी अनुदान के तहत खरीदारी कर बिहार लाया जा रहा है. अधिक मात्रा में दूध देने के कारण इनकी डिमांड अधिक है.

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दूध उत्पादन में बिहार आगे

दूध उत्पादन में बिहार राष्ट्रीय औसत से भी आगे है. बिहार में 7.3% की दर से दूध का उत्पादन हो रहा है, जबकि राष्ट्रीय औसत 5.29% ही है. बिहार में प्रति व्यक्ति दूध की उपलब्धता 400 ग्राम है. जबकि राष्ट्रीय औसत 444 ग्राम है. इसमें भी बिहार जल्द ही राष्ट्रीय औसत से आगे निकलकर सरप्लस दूध स्टेट बनने की ओर अग्रसर है.

मूल नस्लों का होगा संरक्षण: निदेशक

गव्य निदेशक संजय कुमार ने कहा कि बचौर और पूर्णिया गाय की ही दो मूल नस्ल बिहार में बची है. कहीं-कहीं और भी छिटपुट है. इनका संरक्षण और संवर्धन किया जायेगा. इसके लिए शीघ्र ही कार्यक्रम तैयार होगा.

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