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मुजफ्फरपुर के 4.9 फीसदी छात्रों को ही प्री प्राइमरी नसीब, जानिये पूरे बिहार का क्या है आंकड़ा

Updated at : 31 Mar 2021 1:59 PM (IST)
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मुजफ्फरपुर के 4.9 फीसदी छात्रों को ही प्री प्राइमरी नसीब, जानिये पूरे बिहार का क्या है आंकड़ा

मुजफ्फरपुर जिले के 4.9 फीसदी छात्रों को ही प्री प्राइमरी की पढ़ाई नसीब होती है. यह चौंकाने वाला खुलासा नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे की रिपोर्ट में हुआ है. रिपोर्ट में वर्ष 2019-20 के आंकड़े दिये गये हैं. पूरे बिहार में यह आंकड़ा 11.5 फीसदी है.

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मुजफ्फरपुर. मुजफ्फरपुर जिले के 4.9 फीसदी छात्रों को ही प्री प्राइमरी की पढ़ाई नसीब होती है. यह चौंकाने वाला खुलासा नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे की रिपोर्ट में हुआ है. रिपोर्ट में वर्ष 2019-20 के आंकड़े दिये गये हैं. पूरे बिहार में यह आंकड़ा 11.5 फीसदी है.

नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे में पहली बार इस वर्ष प्री प्राइमरी में जाने वाले बच्चों पर अध्ययन किया गया है. प्री प्राइमरी की पढ़ाई आंगनबाड़ी केंद्रों पर होती है. रिपोर्ट आंगनबाड़ी केंद्रों के संचालन पर सवाल खड़े कर रही है.

प्री प्राइमरी में छात्रों को खेल-खेल में अक्षर ज्ञान और पढ़ाई की बुनियादी जानकारी दी जाती है. इसके बाद उसका दाखिला प्राथमिक स्कूलों में होता है. नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे के कुछ आंकड़े सुकून भी दे रहे हैं. रिपोर्ट में कहा गया है कि मुजफ्फरपुर की 65 प्रतिशत छात्राएं स्कूल जा रही हैं. दस और उसे अधिक वर्ष की 33 प्रतिशत छात्राएं स्कूल में रजिस्टर्ड हैं.

जिले में हैं चार हजार आंगनबाड़ी केंद्र

मुजफ्फरपुर जिले में चार हजार पांच आंगनबाड़ी केंद्र हैं. एक केंद्र पर 20 से 40 छात्रों के दाखिले का प्रावधान है. आंगनबाड़ी केंद्र पर पढ़ने वाले बच्चों को पोषाहार भी दिये जाते हैं.हालांकि जिले में कई केंद्र किराये पर चल रहे हैं, तो कुछ सामुदायिक भवन में. आंगनबाड़ी सेविकाओं को जिम्मेदारी दी गयी है कि वे अपने वार्ड के बच्चों को केंद्र तक ले आएं. कहीं एक

कमरा, तो कहीं टूटे छप्पर के नीचे है केंद्र

जिले में आंगनबाड़ी केंद्र कहीं एक कमरा में चल रहा है, तो कहीं टूटे छप्पर के नीचे. इन केंद्रों पर बच्चों की उपस्थिति काफी कम हो गयी है.

आइसीडीएस से जुड़ी एक अधिकारी ने बताया कि वर्ष 2020 में कोरोना और लॉकडाउन के कारण पूरे वर्ष केंद्र बंद रहे, इससे बच्चे पढ़ाई से कट गये. कई बार अभिभावक ही बच्चों को केंद्र नहीं भेजना चाहते हैं, इसलिए भी संख्या में कमी रहती है.

बिना विषय शिक्षक के चल रहे उत्क्रमित हाईस्कूल

नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे से अलग एक और आंकड़ा है जो हाईस्कूल में पढ़ाई की पोल खोल रहा है. पिछले वर्ष तैयार 179 उत्क्रमित हाईस्कूलों में विषय वार शिक्षक नहीं हैं. किसी स्कूल में गणित नहीं है तो कहीं हिन्दी. हद तो यह है कि हाईस्कूलों में जिला शिक्षा विभाग ने प्राइमरी के शिक्षकों का प्रतिनियोजन कर दिया है.

सूत्रों के अनुसार, इन शिक्षकों नियोजन इंटर की डिग्री सिर्फ कक्षा एक से पांच तक के छात्रों के लिए किया गया था. परिवर्तनकारी प्रारंभिक शिक्षक संघ के लखन लाल निषाद बताते हैं कि कुछ उत्क्रमित स्कूल तो ऐसे हैं कि जहां शिक्षक ही नहीं है.

विभाग ने यहां शिक्षक नहीं दिये हैं. टीइटी-एसटीइटी उत्तीर्ण नियोजित शिक्षक संघ गोप गुट के विवेक कुमार का कहना है कि उत्क्रमित हाईस्कूलों में शिक्षक प्रतिनियोजन में अनियमितता बरती गयी है. इससे छात्र खामियाजा भुगत रहे हैं. विषयवार शिक्षक नहीं होने से हाईस्कूल के छात्र प्रैक्टिकल भी नहीं कर पाते हैं.

Posted by Ashish Jha

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