बिहार में अब बच्चे प्राइमरी से ही पढ़ेंगे खेती-किसानी, परिषद की बैठक में लगेगी अंतिम मुहर

इंटरमीडिएट के बाद अब प्राइमरी कक्षाओं में भी कृषि की पढ़ाई कराने पर विचार हो रहा है. छोटी कक्षाओं के बच्चों के हिसाब से पाठ्यक्रम का प्रारूप कैसा हो, इसकी तैयारी कृषि शिक्षा परिषद कर रही है.
अनुज शर्मा, पटना. इंटरमीडिएट के बाद अब प्राइमरी कक्षाओं में भी कृषि की पढ़ाई कराने पर विचार हो रहा है. छोटी कक्षाओं के बच्चों के हिसाब से पाठ्यक्रम का प्रारूप कैसा हो, इसकी तैयारी कृषि शिक्षा परिषद कर रही है.
परिषद की आगामी बैठक में मसौदे पर चर्चा होगी. कृषि के प्रति रुझान अधिक हो, इसके लिए कृषि विज्ञान के छात्रों को आगे की पढ़ाई में आरक्षण देने पर भी विचार किया जा सकता है.
दशकों पहले बिहार कृषि परिषद का गठन किया गया था. इसका मकसद कृषि शिक्षा को बढ़ावा देना था, ताकि परंपरागत खेती की जगह वैज्ञानिक तरीके से खेती करने वाले किसान बढ़ें.
सूत्रों के अनुसार परिषद ने ऐसा मसौदा तैयार किया है कि यदि कोई बच्चा प्राइमरी तक की भी पढ़ाई करता है, तो वह खेतीबारी के बारे में जान ले. इसके लिए पाठ्यक्रम तैयार किया जायेगा.
शुरुआती कक्षाओं में दो से तीन पाठ ही कृषि के होंगे. आठवीं से 10वीं तक कक्षाओं के लिए पूरा खंड ही खेती- किसानी का होगा. अगले महीने होने वाली बैठक में परिषद यह मसौदा बनाने के लिए अनुमति के लिए सरकार से अनुरोध कर सकती है.
हर साल एक करोड़ से अधिक बच्चे प्राइमरी-मध्य में नामांकित होते हैं. परिषद का मानना है कि किसी कारण से कोई बच्चा प्राइमरी से आगे पढ़ाई नहीं कर पाता है, तो भी उसके लिए कृषि अनजान विषय नहीं रहेगा.
राज्य में 2010 तक केवल एक ही कृषि विवि (डॉ राजेंद्र प्रसाद कृषि विश्वविद्यालय पूसा) था. अब यह केंद्रीय यूनिवर्सिटी का दर्जा पा चुका है. बिहार कृषि विश्वविद्यालय, सबौर भागलपुर और पशु विज्ञान विवि काम कर रहे हैं.
कृषि कॉलेजों की संख्या दो से बढ़कर छह हो चुकी है. नालंदा में कॉलेज ऑफ हार्टिकल्चर और मोतिहारी में वानिकी महाविद्यालय खुल चुके हैं. इनके अलावा फिशरीज की पढ़ाई के लिए भी दो कॉलेज हैं. प्रत्येक जिले के एक स्कूल में आइएससी एग्रीकल्चर की पढ़ाई हो रही है.
राज्य सरकार के जितने भी कृषि शिक्षा के उच्च संस्थान हैं, उनमें नामांकन में बिहार के उन छात्रों को 50% आरक्षण मिलता जो आइएससी एजी (फिजिक्स, कैमिस्ट्री , एग्रीकल्चर) से इंटरमीडिएट किये होते हैं.
11 जिलों में एक-एक विद्यालय खोले गये हैं. इसके दो साल बाद 2017 में 27 स्कूलों की स्थापना की गयी. वर्तमान में सभी 38 जिलों के एक-एक विद्यालय में इंटरमीडिएट कृषि विज्ञान की पढ़ाई हो रही है.
Posted by Ashish Jha
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By Prabhat Khabar News Desk
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