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अब ऑनलाइन मिलेंगे आइआइटी मुबंई के पेटेंट तकनीक से बनाये गये जीविका दीदी के मास्क

Updated at : 25 Sep 2020 3:42 AM (IST)
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अब ऑनलाइन मिलेंगे आइआइटी मुबंई के पेटेंट तकनीक से बनाये गये जीविका दीदी के मास्क

हाजीपुर : लालगंज की जीविका दीदीयों द्वारा आइआइटी मुबंई के पेटेंट तकनीक से बनाये गये मास्क अब ऑनलाइन शॉप पर भी उपलब्ध है. मास्क के एक सेट की कीमत 100 रुपये रखी गयी है, जबकि 5 मास्क के सेट की कीमत 200 रुपये रखी गयी है.

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हाजीपुर : लालगंज की जीविका दीदीयों द्वारा आइआइटी मुबंई के पेटेंट तकनीक से बनाये गये मास्क अब ऑनलाइन शॉप पर भी उपलब्ध है. मास्क के एक सेट की कीमत 100 रुपये रखी गयी है, जबकि 5 मास्क के सेट की कीमत 200 रुपये रखी गयी है. मास्क को तीन आकर्षक रंगों में बाजार में उतारा गया है. इस मास्क को सूती कपड़े से बनाया गया है, जो विषाणु और बैक्टिरिया रोधी है. इस्तेमाल के बाद इसे प्रतिदिन साफ करने की जरूरत नहीं पड़ती. लगभग 20 धुलाई तक मास्क की प्रतिरोधी क्षमता बनी रहती है. आवश्यकता अनुसार नल के पानी एवं किसी भी डिटर्जेंट से इसे हल्की हाथों से इसे धोया जा सकता है. इस मास्क को तैयार करने में तकनीकी सहयोग दे रहे पीसीआई के मानव कुमार ने बताया इस मास्क को बनाने के लिए लालगंज की 20 जीविका दीदीयों को प्रशिक्षण दिया गया था. मुंबई आइआइटी से डॉ कपिल पंजाबी और प्रोफेसर रिंकी बनर्जी ने प्रशिक्षण दिया था. प्रशिक्षण में मास्क बनाने और उस पर केमिकल चढ़ाने की विधि बतायी गयी थी. यह मास्क टू लेयर थ्री प्लेट का है, जिसे रसायनों के द्वारा एंटी वायरल बनाया जा रहा है. अभी जिले में 12 हजार जीविका दीदीयां विभिन्न स्वयं सहायता समूह में कार्य कर रही हैं. कार्यक्रम की सफलता के बाद इसे और विस्तार देने की भी योजना है.

मेडिकल घोल में येलो श्रेणी के केमिकल का इस्तेमाल

मास्क को मेडिकेटेड बनाने के लिए जिन रसायनों का प्रयोग किया गया है, वह येलो श्रेणी में आते हैं, अर्थात इनका कोई हानिकारक प्रभाव हमारे ऊपर नहीं पड़ेगा. इसके घोल बनाने के लिए साइट्रस एसिड, ओलिक एसिड, सोडियम पोटाश जैसे रसायनों का इस्तेमाल किया गया है. इस तरह के रसायनों से बने दो घोल तैयार होते हैं. एक बार बने घोल को तीन बार इस्तेमाल किया जा सकेगा, जिससे 15 सौ मास्क तैयार किये जा सकते हैं. पहले घोल में मास्क को डूबोकर आधा घंटा रखा जाता है जो थोड़ा गर्म होता है. वहीं दूसरे ठंडे घोल में भी इसे आनुपातिक समय तक डूबो कर रखा जाता है. इस विधि के बाद इसे सूखने के लिए दिया जाता है फिर इसे प्रेस कर मार्केट के लिए तैयार किया जाता है. अभी पहले से बने डबल लेयर थ्री प्लेट मास्क को इस घोल के साथ तैयार किया जायेगा.

कम कीमत में उपलब्ध होंगे असरदार मास्क

इस तरह के मास्क के उत्पादन का मुख्य उद्देश्य कम कीमत में असरदार मास्क लोगों तक पहुंचाना है. साथ ही इससे स्वयं सहायता समूह से जुड़ी दीदीयों को आर्थिक संबल भी मिल रहा है. इस नयी पहल को देखकर लोग आकर्षित भी हो रहे हैं. समुदाय स्तर पर की जा रही इस पहल से लोगों के बीच मास्क की उपयोगिता एवं महत्ता भी साबित हो रही है. इससे जीविका कार्यकर्ताओं का नाम कोरोना की रोकथाम करने वाले लोगों की सूची में दर्ज तो हो ही रहा है. साथ ही विपरीत हालातों में समाधान ढूंढने के उनके जज्बे को भी प्रदर्शित कर रहा है.

posted by ashish jha

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