बिना आधार कार्ड दिखाए बिहार के इस गांव में नहीं मिलती है एंट्री, लाठी-डंडा से लैस होकर लोग देते हैं पहरा

Published by : Paritosh Shahi Updated At : 11 Sep 2024 4:49 PM

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बिहार का एक गांव इन दिनों सुर्खियों में है. इस गांव के लोग आधार कार्ड देखने के बाद ही किसी बाहरी को एंट्री देते हैं. आइये जानते हैं मामला क्या है?

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बिहार के एक गांव में आधार कार्ड देखने के बाद ही किसी को एंट्री दी जा रही है. गांव के लोग अलग-अलग टीम बनाकर लाठी-डंडा से लैस होकर रातभर पहरा देते हैं. ऐसे करने को लोग क्यों मजबूर हैं, इसके पीछे की वजह क्या है, आइये विस्तार में जानते हैं. यह मामला राज्य के नवादा जिले का है. यहां के रोह थाना क्षेत्र के सुंदरा गांव में पिछले कुछ दिनों में चोरी की कई घटनाएं हुई है. ग्रामीणों ने मामले की शिकायत पुलिस में की लेकिन इसमें कमी नहीं आई. इसलिए अब ग्रामीणों ने सुरक्षा की कमान खुद संभाल ली है. इस गांव के लोग रोज रात में सामूहिक रूप से पहरा दे रहे हैं. देर रात अगर कोई व्यक्ति गांव में प्रवेश करता दिखता है तो ग्रामीण सबसे उसका आधार कार्ड चेक करते हैं, फिर उसे गांव में एंट्री मिलती है. स्थानीय लोगों के मुताबिक गांव में 3 सितंबर की रात चोरी होने के बाद एक बैठक की गई. गांव के लोगों ने आपसी सहमति से यहां की सुरक्षा के लिए टीम बनाई. इस टीम में हर घर से एक व्यक्ति को शामिल किया गया.

सात टीमें देती है पहरा

चोरी से बचने के लिए कुल सात टीम बनाई गई है. चोर किसी भी प्रकार से फिर चोरी को अंजाम न दे इसलिए लोग लाठी डंडे, मोबाइल और टार्च से लैस रहते हैं. हर गली, चौराहे पर टीम रात भर गश्त करती है. अंजान लोगों की पहचान की पुष्टि होने पर ही उन्हें गांव में घुसने दिया जाता है.

ग्रामीणों का कहना है कि कुछ संदिग्ध लोगों को हमने रविवार को गाँव में घूमते हुए देखा था. इसके बाद हमने टीम बनाकर रात में पहरा देना शुरू किया. बता दें कि रोह थाना क्षेत्र के सुंदरा गांव में एक घर से चोरों ने 3 सितंबर की रात लाखों के जेवरात व नगद रुपए गायब कर दिए. फिर इस घटना के तीन दिन बाद यानी 6 सितंबर की रात चोरों ने परतापुर और रतोई गांव में तीन घरों से लाखों के जेवरात, नगदी और सामानों पर हाथ साफ कर दिया. इन घटनाओं से ग्रामीणों में भय का वातावरण बन गया. पुलिस घटनाओं में शामिल चोरों की तलाश कर रही है लेकिन ग्रामीण सुरक्षा के दृष्टिकोण सात टीम बनाकर अलग-अलग जगह से रात में पहरा दे रहे हैं.

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Paritosh Shahi

लेखक के बारे में

By Paritosh Shahi

परितोष शाही पिछले 4 वर्षों से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता में सक्रिय हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की और वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल की बिहार टीम का हिस्सा हैं. राजनीति, सिनेमा और खेल, विशेषकर क्रिकेट में उनकी गहरी रुचि है. जटिल खबरों को सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाना और बदलते न्यूज माहौल में तेजी से काम करना उनकी विशेषता है. परितोष शाही ने पत्रकारिता की पढ़ाई बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) से की. पढ़ाई के दौरान ही पत्रकारिता की बारीकियों को समझना शुरू कर दिया था. खबरों को देखने, समझने और लोगों तक सही तरीके से पहुंचाने की सोच ने शुरुआत से ही इस क्षेत्र की ओर आकर्षित किया. पत्रकारिता में करियर की पहली बड़ी शुरुआत बिहार विधानसभा चुनाव 2020 के दौरान हुई, जब उन्होंने जन की बात के साथ इंटर्नशिप की. इस दौरान बिहार के 26 जिलों में जाकर सर्वे किया. यह अनुभव काफी खास रहा, क्योंकि यहां जमीनी स्तर पर राजनीति, जनता के मुद्दों और चुनावी माहौल को बहुत करीब से समझा. इसी अनुभव ने राजनीतिक समझ को और मजबूत बनाया. इसके बाद राजस्थान पत्रिका में 3 महीने की इंटर्नशिप की. यहां खबर लिखने की असली दुनिया को करीब से जाना. महज एक महीने के अंदर ही रियल टाइम न्यूज लिखने लगे. इस दौरान सीखा कि तेजी के साथ-साथ खबर की सटीकता कितनी जरूरी होती है. राजस्थान पत्रिका ने उनके अंदर एक मजबूत डिजिटल पत्रकार की नींव रखी. पत्रकारिता के सफर में आगे बढ़ते हुए पटना के जनता जंक्शन न्यूज पोर्टल में वीडियो प्रोड्यूसर के रूप में भी काम किया. यहां कैमरे के सामने बोलना, प्रेजेंटेशन देना और वीडियो कंटेंट की बारीकियां सीखीं. करीब 6 महीने के इस अनुभव ने कैमरा फ्रेंडली बनाया और ऑन-स्क्रीन प्रेजेंस को मजबूत किया. 1 अप्रैल 2023 को राजस्थान पत्रिका को प्रोफेशनल तौर पर ज्वाइन किया. यहां 17 महीने में कई बड़े चुनावी कवरेज में अहम भूमिका निभाई. लोकसभा चुनाव 2024 में नेशनल टीम के साथ जिम्मेदारी संभालने का मौका मिला. इसके अलावा मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के दौरान भी स्टेट टीम के साथ मिलकर काम किया. इस दौरान चुनावी रणनीति, राजनीतिक घटनाक्रम और बड़े मुद्दों पर काम करने का व्यापक अनुभव मिला. फिलहाल परितोष शाही प्रभात खबर डिजिटल बिहार टीम के साथ जुड़े हुए हैं. यहां बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान कई बड़ी खबरों को रियल टाइम में ब्रेक किया, ग्राउंड से जुड़े मुद्दों पर खबरें लिखीं और वीडियो भी बनाए. बिहार चुनाव के दौरान कई जिलों में गांव- गांव घूम कर लोगों की समस्या को जाना-समझा और उनके मुद्दे को जन प्रतिनिधियों तक पहुंचाया. उनकी कोशिश हमेशा यही रहती है कि पाठकों और दर्शकों तक सबसे पहले, सही और असरदार खबर पहुंचे. पत्रकारिता में लक्ष्य लगातार सीखते रहना, खुद को बेहतर बनाना और भरोसेमंद पत्रकार के रूप में अपनी पहचान मजबूत करना है.

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