खोदे गये चुएं व कुएं से लोगों और जानवरों की बुझती है प्यास
Published by : Prabhat Khabar News Desk Updated At : 04 May 2024 10:59 PM
चोरडीहा, परतौनिया, जमुनदाहा, डेलवा, नावाडीह झराही व कुंभियातरी गांव में पानी के लिए मचा है हाहाकार
कार्यालय रजौली.
प्रखंड क्षेत्र में मई माह में तापमान बढ़ने के साथ ही रजौली की हरदिया पंचायत के सुदूरवर्ती इलाकों में पेयजल संकट गहराता जा रहा है. हालत यह है कि इन गांवों के लोगों को अभी से ही पानी के लिए नदी व नाले में चुएं खोदने पड़ रहें है. जंगली क्षेत्रों के गांवों में ग्रामीणों द्वारा खोदे गये चुएं व गांव में रहे एकमात्र कुएं से ही मनुष्यों के साथ जानवरों की प्यास बुझाती है. चोरडीहा, परतौनिया, जमुनदाहा, डेलवा, नावाडीह झराही व कुंभियातरी गांव में इन दिनों पानी के लिए हाहाकार मचा हुआ है. गांव के लोग धनार्जय नदी में गड्ढे कर पानी पीने को मजबूर हैं. गांवों में रहने वाले लोगों ने कई बार पत्र लिखकर अधिकारियों से गांव में चापाकल के लिए पंपिंग पेयजल योजना बनाने की गुहार लगायी है. लेकिन उनके मांगाें की लंबे समय से अनदेखी की जा रही है. लोगों का कहना है कि कई बार अधिकारी से लेेकर जनप्रतिनिधियों के समक्ष चापाकल लगाने की भी गुहार लगायी. लेकिन, उनके कानों पर जूं तक नहीं रेंगी. उक्त सभी गांव प्रखंड मुख्यालय से लगभग 10 किलोमीटर की दूरी पर बसा हुआ है. जहां जाने के लिए बीते वर्ष सड़क, तो बनी हैं. किंतु पीएचइडी के जेइ और अन्य कर्मी उक्त गांव तक नहीं पहुंच पाये हैं. गर्मी बढ़ते ही नदी नाले सूखने के कगार पर है. सुदूरवर्ती गांव में नल जल योजना का लाभ भी लोगों को नहीं मिल रहा है. क्योंकि इन गांवों बिजली की आपूर्ति नहीं है. इसके कारण सौर ऊर्जा से चलने वाली वाटर प्लांट लगाया गया है. जोकी किसी न किसी कारण से कई वर्षों से बंद है. नदी नाले में चुएं बनाते हैं लोग:ग्रामीण कालो देवी ने कहा कि हम लोग नदी नालों में गड्ढे कर चुआं बनाते हैं और उसी का पानी पीते हैं. इस कारण कई तरह के रोगों का शिकार होना पड़ता है. हमें पीने के लिए शुद्ध पानी नसीब नहीं होता है. सदी दर सदी बीत गयी है. लेकिन, इन गांव का कायाकल्प नहीं हुआ है. यहां के लोग आदि काल में हीं अभी भी जीने को मजबूर हैं. इन लोगों का जीविकोपार्जन के लिए मुख्य पेसा ढिबरा चुनना है. लेकिन उसे भी सरकार अवैध घोषित कर रखा है. इसके बाद से जीविकोपार्जन के लिए भी संघर्ष करना पड़ता है.
क्या कहते हैं ग्रामीणचोरडीहा गांव के रामवृक्ष भुइयां ने कहा कि चुनाव के दौरा में नेता जी वादे करते हैं कि जंगली क्षेत्र के गांव में पानी दिया जायेगा. लेकिन सात दशक बीत जाने के बाद भी पानी अब तक नहीं पहुंचा. इसलिए नदी के चुएं से पानी लेने पर मजबूर हो रहे हैं. सुदूरवर्ती एवं जंगली क्षेत्र के गांव में पानी का सुविधा के लिए सरकार की ओर से सोलर से चलने वाली पानी की टंकी आदि तो लगायी है, किंतु वो भी विगत चार वर्षों से खराब पड़ा हुआ है. इसलिए आसपास के गांवों में भी पेयजल की गंभीर समस्या उत्पन्न हो गयी है.क्या कहते हैं ग्राम पंचायत मुखिया-चोरडीहा, परतौनिया, जमुनदाहा, डेलवा व नावाडीह में पेयजल के लिए ग्रामीण व पशु एकमात्र साधन कुआं पर निर्भर है. गर्मी के कारण सरकारी चापाकल का लेयर भाग गया है. उन्होंने कहा कि जिला मुख्यालय से पीएचइडी जेइ चंदन कुमार का मोबाइल नंबर 9955229286 जारी किया गया है. उनसे बात करके उक्त गांवों में कम से कम एक-एक चापाकल बोरिंग करने की बात कही गयी है. पीएचइडी के जेई द्वारा उक्त गांवों में कब तक चापाकल लगेगा, यह भविष्य के गर्त में है. जबकि ग्रामीणों में जिलाधिकारी समेत बीडीओ एवं मुखिया पर विश्वास है कि वे उनकी समस्याओं को जल्द दूर करेंगे.
पिंटू साव, मुखिया, हरदिया पंचायतक्या कहते हैं पीएचइडी के जेइसुदूरवर्ती गांवों में पानी की समस्या का जानकारी मिली है. जल्द हीं इसके समाधान के लिए सकारात्मक पहल की जायेगी. उन्होंने कहा कि सौर प्लेट के तहत नल जल का समाधान किया गया था. लेकिन, लेयर का भागना गंभीर समस्या है. इसके कारण हमलोग पुनः मरम्मती कार्य के साथ अन्य समस्याओं का निराकरण करने का प्रयास करेंगे.
चंदन कुमार, जेइ, पीएचइडीडिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
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