नवादा के पकरीबरावां में चौकीदार की मौत, बदमाशों ने चाकू घोंपकर की थी हत्या, शादी वाले घर में गूंजी चीखें

घटना की गंभीरता को देखते हुए नवादा एसपी अभिनव धीमान ने घटनास्थल का निरीक्षण किया
Nawada News: नवादा में खाकी पर खूनी हमला, बदमाशों के दुस्साहस ने बुझा दिया घर का चिराग, 26 जून को होनी थी बेटी की शादी. एक गिरफ्तार, एसआईटी गठित, परिजनों ने की हत्यारों को फांसी देने की मांग.
Nawada News (पकरीबरावां से विश्वनाथ कुमार की रिपोर्ट): बिहार के नवादा जिले से एक दिल दहला देने वाली खबर सामने आई है, जहाँ कर्तव्य की वेदी पर तैनात एक चौकीदार अपराधियों की क्रूरता का शिकार हो गया. पकरीबरावां प्रखंड के धमौल थाना में पदस्थापित तुर्कबन निवासी चौकीदार जितेंद्र पासवान की सोमवार की सुबह इलाज के दौरान पटना के पीएमसीएच में मौत हो गई. बदमाशों ने रविवार की रात उन पर उस वक्त कातिलाना हमला किया था जब वे थाना से अपने गांव लौट रहे थे. इस घटना ने पुलिस महकमे को हिला कर रख दिया साथ ही एक हंसते-खेलते परिवार की खुशियों को मातम में बदल दिया है.
घात लगाकर हमला, आंतें बाहर आने तक घोंपा चाकू
घटना की पृष्ठभूमि किसी फिल्मी पटकथा जैसी भयावह है. रविवार की रात करीब 8:15 बजे चौकीदार जितेंद्र पासवान अपनी ड्यूटी के बाद थाना से पैदल ही अपने गांव तुर्कबन की ओर जा रहे थे. अभी वे थाना से महज 200 मीटर की दूरी पर ही पहुंचे थे कि अंधेरे में घात लगाए बैठे बदमाशों ने उन पर धावा बोल दिया. अपराधियों ने जितेंद्र पासवान के पेट में इतनी बेरहमी से चाकू घोंपा कि उनकी आंतें शरीर से बाहर आ गईं.
लहूलुहान हालत में गिरते ही स्थानीय लोगों और पुलिसकर्मियों ने उन्हें तुरंत पकरीबरावां सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया. प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें विम्स पावापुरी रेफर किया गया, लेकिन स्थिति में सुधार न होता देख उन्हें देर रात पीएमसीएच पटना भेजा गया, जहाँ सोमवार सुबह करीब 3 बजे उन्होंने अंतिम सांस ली.
बेटी की डोली से पहले उठ गई पिता की अर्थी, घर में मचा कोहराम
जितेंद्र पासवान अपने पीछे पत्नी रेणु देवी, चार बेटियां और एक बेटा छोड़ गए हैं. घर में इन दिनों खुशियों का माहौल था और शहनाइयां बजने वाली थीं. उनकी दूसरी बेटी निशा कुमारी (18 वर्ष) की शादी आगामी 26 जून को तय थी. परिवार शादी की तैयारियों में व्यस्त था, कार्ड छप रहे थे और खुशियां बांटी जा रही थीं, लेकिन एक झटके में सब कुछ उजड़ गया. अब जिस घर से बेटी की डोली उठनी थी, वहां पिता का जनाजा देख हर आंख नम है.
मृतक ही परिवार के एकमात्र कमाऊ सदस्य थे. बड़ी बेटी नीतू की शादी हो चुकी है, जबकि निशा, आशा, अंजलि और 12 वर्षीय पुत्र छोटू अभी पढ़ाई कर रहे हैं. इन मासूमों के सिर से पिता का साया उठने के बाद पूरे गांव में मातम पसरा है. पत्नी रेणु देवी बार-बार बेहोश हो रही हैं और परिजनों का विलाप सुन कलेजा कांप उठता है.
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