नवादा में नाबालिग बच्चे हो रहे सूखे नशे का शिकार, खेल के मैदान से नशे के अड्डों तक पहुंचा बचपन

Published by : Vivek Singh Updated At : 13 Jun 2026 11:04 AM

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सांकेतिक तस्वीर

Nawada News : नवादा जिले के रोह प्रखंड में एक चिंताजनक तस्वीर सामने आ रही है. जिस उम्र में बच्चों के हाथों में बल्ला, फुटबॉल और किताबें होनी चाहिए, उस उम्र में कुछ बच्चे सुलेशन, बॉनफिक्स और सिगरेट जैसे नशे की गिरफ्त में आते दिख रहे हैं.

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Nawada News : (अमित सौरभ) नवादा जिले के रोह प्रखंड में एक चिंताजनक तस्वीर सामने आ रही है. जिस उम्र में बच्चों के हाथों में बल्ला, फुटबॉल और किताबें होनी चाहिए, उस उम्र में कुछ बच्चे सुलेशन, बॉनफिक्स और सिगरेट जैसे नशे की गिरफ्त में आते दिख रहे हैं. गांवों के खेल मैदानों से लेकर खंडहरों और सुनसान बगीचों तक फैलती यह प्रवृत्ति अब अभिभावकों, शिक्षकों और समाज के लिए गंभीर चिंता का विषय बन चुकी है.

खेल के मैदान में नहीं, नशे के घेरे में दिख रहे बच्चे

शाम के समय गांव के खेल मैदानों में बच्चों की किलकारियां और खेलकूद की रौनक दिखनी चाहिए. लेकिन रोह प्रखंड के कई गांवों में तस्वीर बदलती नजर आ रही है. मैदान के कोनों और सुनसान जगहों पर किशोरों के समूह सिगरेट पीते और सुलेशन-बॉनफिक्स जैसे रासायनिक पदार्थों का सेवन करते दिखाई पड़ रहे हैं. सबसे चिंताजनक बात यह है कि इनमें कुछ बच्चे महज 10 से 12 वर्ष की उम्र के बताए जा रहे हैं.

धीरे-धीरे मैदानों से गायब हो रही नई पीढ़ी

ग्रामीण बताते हैं कि कुछ साल पहले तक शाम होते ही गांव के मैदान बच्चों और युवाओं से भरे रहते थे. क्रिकेट, फुटबॉल और कबड्डी जैसे खेलों में युवाओं की सक्रिय भागीदारी दिखती थी. अब कई स्थानों पर खेल की जगह नशे ने ले ली है.

स्थानीय लोगों का कहना है कि छोटे बच्चे बड़े लड़कों की नकल करते हुए उसी रास्ते पर बढ़ने लगे हैं, जिससे समस्या और गंभीर होती जा रही है.

खुलेआम सिगरेट पीते दिख रहे नाबालिग

ग्रामीणों के अनुसार नाबालिग लड़कों को सार्वजनिक स्थानों पर सिगरेट पीते देखना अब आम बात होती जा रही है. कई लोगों ने उन्हें समझाने का प्रयास किया, लेकिन विवाद और टकराव के डर से अधिकांश लोग अब हस्तक्षेप करने से बचते हैं.इस चुप्पी ने समस्या को और गहरा कर दिया है.

खंडहर और सुनसान बगीचे बन रहे नशे के ठिकाने

रोह क्षेत्र के कई गांवों में पुराने जर्जर मकान, खाली भवन और सुनसान बगीचे किशोरों के जमावड़े का केंद्र बनते जा रहे हैं. स्थानीय लोगों का दावा है कि इन जगहों पर अक्सर बच्चों और युवाओं को सुलेशन तथा बॉनफिक्स जैसे पदार्थों का नशा करते देखा जाता है. कम कीमत और आसान उपलब्धता के कारण नाबालिग भी इन पदार्थों तक आसानी से पहुंच जा रहे हैं.

विशेषज्ञों ने जताई गंभीर चिंता

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार सुलेशन, बॉनफिक्स और अन्य रासायनिक पदार्थों को लगातार सूंघना शरीर और मस्तिष्क दोनों के लिए बेहद नुकसानदायक हो सकता है. इससे फेफड़ों, तंत्रिका तंत्र और मानसिक विकास पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है.कम उम्र में पड़ने वाली यह लत भविष्य में बड़े नशे की ओर भी धकेल सकती है.

अभिभावकों की बढ़ रही चिंता

कई अभिभावकों ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि उनके बच्चों के व्यवहार में अचानक बदलाव देखने को मिल रहा है. पढ़ाई में रुचि कम हो रही है, चिड़चिड़ापन बढ़ रहा है और कई बार पैसों को लेकर घर में विवाद भी होने लगे हैं.

एक अभिभावक ने कहा कि सबसे ज्यादा पीड़ा तब होती है जब अपना बच्चा गलत रास्ते पर जाता दिखाई देता है और उसे रोकने का कोई प्रभावी उपाय नजर नहीं आता.

नशामुक्ति व्यवस्था के अभाव ने बढ़ाई मुश्किल

रोह प्रखंड में नशा मुक्ति और काउंसलिंग की कोई स्थानीय व्यवस्था नहीं होने की बात सामने आ रही है. विशेषज्ञों का मानना है कि समय पर परामर्श और उपचार की सुविधा नहीं मिलने से समस्या लगातार बढ़ सकती है.

इसके साथ ही स्कूलों, पंचायतों और सार्वजनिक स्थलों पर नशा विरोधी जागरूकता अभियान भी पर्याप्त स्तर पर नहीं दिख रहे हैं.

आखिर जिम्मेदार कौन

जब गांव के लोग समस्या को महसूस कर रहे हैं, अभिभावक चिंतित हैं और बच्चे धीरे-धीरे नशे की ओर बढ़ रहे हैं, तब कई सवाल खड़े हो रहे हैं. क्या शिक्षा व्यवस्था पर्याप्त जागरूकता पैदा कर पा रही है? क्या स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन इस समस्या को गंभीरता से ले रहे हैं? क्या समाज अपनी जिम्मेदारी निभा रहा है?

अगली पीढ़ी को बचाने की चुनौती

देश के भविष्य माने जाने वाले बच्चे यदि कम उम्र में नशे की गिरफ्त में आ रहे हैं तो यह केवल कुछ परिवारों की समस्या नहीं, बल्कि पूरे समाज के लिए चेतावनी है. जिस उम्र में बच्चों को खेल, शिक्षा और संस्कारों से जुड़ना चाहिए, उस उम्र में यदि वे नशे की ओर बढ़ रहे हैं तो इसके दूरगामी परिणाम बेहद गंभीर हो सकते हैं.

रोह प्रखंड में सामने आ रही यह तस्वीर बताती है कि अब केवल चिंता जताने से काम नहीं चलेगा. प्रशासन, स्कूल, अभिभावक और समाज को मिलकर ठोस पहल करनी होगी, ताकि बचपन को नशे की गिरफ्त से बचाया जा सके और अगली पीढ़ी को सुरक्षित भविष्य दिया जा सके.

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लेखक के बारे में

By Vivek Singh

विवेक सिंह माता सीता की धरती और मिथिला का द्वार कहे जाने वाले समस्तीपुर जिले से आते हैं. वर्तमान में प्रभात खबर में कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं. इससे पहले #The_Newsdharma के साथ डिजिटल मीडिया, ग्राउंड रिपोर्टिंग , और न्यूज़ लेखन के क्षेत्र में कार्य करने का अनुभव रहा है. सामाजिक, राजनीतिक, शिक्षा, युवा, महिला सुरक्षा और जनता से जुड़े मुद्दों पर विशेष रुचि रखते हैं. सरल, तथ्यात्मक और प्रभावी लेखन शैली के माध्यम से पाठकों तक महत्वपूर्ण खबरें और मुद्दे पहुंचाने का निरंतर प्रयास करते हैं. NGO अमर शहीद बिपिन सिंह फाउंडेशन के साथ जुड़कर सामाजिक, स्वास्थ्य, पर्यावरण ,रोजगार और महिला सशक्तिकरण जैसे मुद्दों पर भी कार्य करने का अनुभव हैं.

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