नवादा: हरदिया मोड़ पर यू-टर्न के अभाव में हर रोज़ जिंदगी से जंग, जान हथेली पर लेकर सड़क पार करते बच्चे और मरीज

डिवाइडर को पार करती छात्राएं
नेशनल हाईवे-20 पर हरदिया मोड़ पर यू-टर्न की सुविधा न होने से स्थानीय लोगों को भारी परेशानी हो रही है। 3 किमी का लंबा चक्कर काटने और सड़क पार करने में जान का खतरा बना हुआ है। प्रशासन से जल्द समाधान की मांग की गई है।
Nawada Hardiya Mod NH20 : नवादा के रजौली मुख्यालय से सटे हरदिया मोड़ के पास नेशनल हाईवे-20 पर यू-टर्न की सुविधा नहीं होने से आम लोगों के साथ-साथ स्कूली छात्र-छात्राओं और मरीजों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. स्थिति ऐसी है कि लोगों को सड़क पार करने के लिए डिवाइडर लांघना पड़ता है, जिससे हर दिन दुर्घटना का खतरा बना रहता है.
स्कूल और अस्पताल के बावजूद नहीं सुविधा
हरदिया मोड़ के आसपास घनी आबादी है और सड़क के उस पार तीन सरकारी विद्यालय एवं एक हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर स्थित है. इसके बावजूद यहां सुरक्षित क्रॉसिंग या यू-टर्न की व्यवस्था नहीं की गई है. नियमों का पालन करने वाले लोगों को करीब 2 से 3 किलोमीटर दूर जाकर यू-टर्न लेना पड़ता है, जिससे समय और परेशानी दोनों बढ़ जाते हैं.
Nawada News : अंतिम यात्रा भी बन रही मुश्किल
यह चौराहा हरदिया, भानेखाप, सिंगर और धमनी समेत कई गांवों को जोड़ता है. डिवाइडर बनने के बाद यहां कोई वैध कट नहीं दिया गया है. ऐसे में किसी को सड़क पार करनी हो तो महादेव मोड़ या सेक्टर-‘ए’ तक लंबा चक्कर लगाना पड़ता है. सबसे ज्यादा दिक्कत अंतिम संस्कार के समय होती है, जब शव वाहन को लेकर लोगों को 3 किलोमीटर तक घूमना पड़ता है. ग्रामीणों का कहना है कि दुख की घड़ी में भी इस तरह की परेशानी असहनीय है.
रॉन्ग साइड बना हादसों का कारण
यू-टर्न के अभाव में कई वाहन चालक डिवाइडर तोड़कर गलत दिशा में वाहन चला रहे हैं. तेज रफ्तार ट्रक और बसों के बीच इस तरह का जोखिम जानलेवा साबित हो रहा है. स्थानीय लोगों के अनुसार पिछले कुछ महीनों में यहां कई छोटे-बड़े हादसे हो चुके हैं.
रात में बढ़ जाता है खतरा
डिवाइडर पर लगे रिफ्लेक्टर और प्लास्टिक बैरियर रखरखाव के अभाव में टूट चुके हैं. रात के समय डिवाइडर दिखाई नहीं देता, जिससे वाहन टकरा जाते हैं और दुर्घटनाएं बढ़ जाती हैं.
ग्रामीणों की मांग-तुरंत बने वैज्ञानिक यू-टर्न
स्थानीय लोगों ने एनएचएआई और जिला प्रशासन से मांग की है कि हरदिया मोड़ के पास जल्द से जल्द एक सुरक्षित और वैज्ञानिक यू-टर्न बनाया जाए. साथ ही डिवाइडर पर रिफ्लेक्टर और चेतावनी संकेत भी लगाए जाएं.
ग्रामीणों का कहना है कि रोज सैकड़ों छात्र, मरीज और आम लोग इस रास्ते से गुजरते हैं. यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो यह स्थान किसी बड़े हादसे का कारण बन सकता है.
फिलहाल प्रशासनिक उदासीनता के चलते हरदिया मोड़ धीरे-धीरे एक खतरनाक ब्लैक स्पॉट बनता जा रहा है.
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