भाषा व भाव से जगाते रहे मन की संवेदनाएं

2016 में साहित्यिक आयोजनों का दौर जारी रहा नवादा. भाषा, भाव के सहारे मनुष्य के तन के अंदर मन की संवेदनाएं जगाने का सशक्त साधन है. जाने-माने चिंतक व साहित्कार हजारी प्रसाद द्विवेदी ने कहा है, कला और साहित्य विहीन मनुष्य पूंछ रहित पशु है. अर्थात साहित्य ही साधना का विषय है. इससे मनुष्यत्व सामने […]
2016 में साहित्यिक आयोजनों का दौर जारी रहा
नवादा. भाषा, भाव के सहारे मनुष्य के तन के अंदर मन की संवेदनाएं जगाने का सशक्त साधन है. जाने-माने चिंतक व साहित्कार हजारी प्रसाद द्विवेदी ने कहा है, कला और साहित्य विहीन मनुष्य पूंछ रहित पशु है. अर्थात साहित्य ही साधना का विषय है. इससे मनुष्यत्व सामने आता है.
2016 में नवादा जिले में मगही और हिंदी के कई साहित्यकारों की रचनाएं पाठकों के सामने आयीं. हिंदी साहित्य में जाने-माने साहित्यकार राम रतन प्रसाद सिंह रत्नाकर की कहानी संग्रह ‘बजरंगी’ सामने आया. यह पुस्तक भारत के जाने-माने प्रकाशक किताब महल प्रकाशन इलाहाबाद ने प्रकाशित किया. पुस्तक की समीक्षा दो बड़े विद्वान डॉ लक्ष्मण प्रसाद सिन्हा व डॉ सतेंद्र अरुण ने किया. यह नवादा जिले का हिंदी साहित्य के लिए उत्साहजनक योगदान है. मगही साहित्य से जुड़े संगठनों ने इस साल आधा दर्जन साहित्य आयोजन करके अपनी उपस्थिति दर्ज की है. वर्ष के प्रारंभ में केसरी नंदन मगही मंडप द्वारा चरौल व मनसागर में दो साहित्यिक आयोजन, जिसमें कविता पाठ व विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया. केसरी नंदन मगही मंडप के अध्यक्ष नरेंद्र सिंह, मगही के जाने-माने कवि जयराम सिंह देवसपुरी व दयाशंकर सिंह बेधड़क ने भाग लिया.
हिसुआ में शब्द साधक मंच द्वारा भी कई कार्यक्रम आयोजित किये गये. इसमें उदय भारती, दीनबंधु, कृष्ण कुमार भट्टा ने कविता पाठ किया. नवादा के पास बुधौल गांव में वीणा मिश्रा के संयोजन में साहित्यकार रामरतन प्रसाद सिंह रत्नाकर की अध्यक्षता में मगही प्रभारणी सभा का गठन किया गया. इसमें नवादा, नालंदा व गया के साहित्यकारों ने भाग लिया. कार्यक्रम का संचालन नरेंद्र सिंह ने किया. मुख्य अतिथि सच्चिदानंद प्रेमी व राम सिंहासन सिंह ने मगही प्रभारणी सभा के औचित्य पर प्रकाश डाला.
सात नवंबर को ‘मगही संवाद’ जो पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम को निवेदित है का लोकार्पण रूपौ स्थित आंबेडकर पुस्तकालय द्वारा आयोजित कार्यक्रम में किया गया. इस आयोजन के मुख्य अतिथि रामरतन प्रसाद सिंह रत्नाकर ने मगही को नवादा के योगदान पर परिचर्चा में 1928 को जयनाथ पति द्वारा लिखित फुल बहादुर उपन्यास से आज तक लिखी पुस्तकों को रखा. इसकी अध्यक्षता विशुनदेव पासवान ने की. आगतों का स्वागत मनोहर पासवान ने किया. साल के अंत में अखिल भारतीय मगही मंडप के बैनर तले वारिसलीगंज में स्कूली बच्चों की क्विज हुई. इस साल वरीय नागरिक संघ व जिला प्रशासन द्वारा भी कई साहित्यिक आयोजन कराये गये.
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