पशुओं को नियमित दें हरा चारा

Updated at : 02 Nov 2016 8:15 AM (IST)
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पशुओं को नियमित दें हरा चारा

शिविर में पशु आहार व देखभाल पर चिकित्सक देंगे जानकारी नवादा कार्यालय : जिले भर के पशुपालकों के लिए सरकार कई योजनाएं चलाकर जीविका का एक मुख्य साधन बनाने के लिए प्रयासरत है. सरकार के दिशा निर्देश पर पशुपालन को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न टीकाकरण कार्यक्रम आयोजित किये गये हैं. इसी कड़ी में दुधारू […]

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शिविर में पशु आहार व देखभाल पर चिकित्सक देंगे जानकारी
नवादा कार्यालय : जिले भर के पशुपालकों के लिए सरकार कई योजनाएं चलाकर जीविका का एक मुख्य साधन बनाने के लिए प्रयासरत है. सरकार के दिशा निर्देश पर पशुपालन को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न टीकाकरण कार्यक्रम आयोजित किये गये हैं. इसी कड़ी में दुधारू पशुओं के बांझपन दूर करने के लिए विभिन्न प्रखंडों में पशु बांझपन व चिकित्सा शिविर का आयोजन किया जा रहा है. जिला पशुपालन पदाधिकारी डॉ श्याम सुंदर प्रसाद ने बताया कि बिहार लाइव स्टॉक डेवलपमेंट एजेंसी,पटना द्वारा जारी पत्र के आधार पर जिले के सभी पशु चिकित्सालयों में शिविर आयोजित की गयी है. इसमें लोग अपने बांझ पशुओं को लेकर आये. मौके पर उपस्थित तीन सदस्यीय चिकित्सकों का दल पशु का इलाज करके उचित दवा व जानकारी देंगे.
पशुओं में बांझपन के कारणों की जानकारी : जिला भ्रमणशील पशु चिकित्सक डॉ सुनील कुमार ने बताया कि अमूमन दुधारू पशुओं में चार तरह से बांझपन का रोग होता है. संकर नस्ल की प्रजाति के पशु में अनुवांशिक कारणों से यह बीमारी होती है. लगभग एक से दो प्रतिशत पशुओं में ऐसा होता है. ऑपरेशन से इनका इलाज संभव है. देशी पशुओं में हॉर्मोन व पोषक तत्वों की कमी से भी बांझपन होता है. इसमें अंडाशय, बच्चेदानी व अंडाणु के विकास व निर्माण में दिक्कत आती है. जबकि बच्चेदानी के संक्रामक रोग से भी पशु बच्चे पैदा करने के लायक नहीं रहते हैं.
शिविर में लोगों को इनसे बचाव संबंधी उपाय के साथ सही तरीके से पशुओं के रखरखाव की जानकारी दी जानी है.जानकारी व बचाव ही सर्वोत्तम उपाय : डीएएचओ सह पशु चिकित्सा पदाधिकारी डॉ श्याम सुंदर प्रसाद ने बताया कि पशुपालक सही जानकारी से ही अपने पशुओं को विभिन्न बीमारियों से बचा सकते हैं. पशुओं के आहार में नियमित रूप से हरा चारा देने से कई रोगों से बचाया जा सकता है. बांझपन से बचाव के लिए पशु आहार में मुख्य रूप से फॉस्फोरस, विटामिन ए, डी 3, इ सहित 30 से 50 ग्राम आयोडीनयुक्त नमक आवश्यक रूप से दें. पशु के शरीर के भार के अनुसार खाने में मिनरल मिक्सचर को शामिल करें. पशु चिकित्सक से समय समय पर सलाह लेते रहें.
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