रोकें ... दीपावली की सजावट में आधुनिकता हावी

Updated at : 10 Nov 2015 6:50 PM (IST)
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रोकें ... दीपावली की सजावट में आधुनिकता हावी

रोकें … दीपावली की सजावट में आधुनिकता हावी वारिसलीगंज धार्मिक मान्यताओं के वर्णित किवदंती के अनुसार 14 वषार्ें का वनवास काटकर वापस अयोध्या लौटे राजा राम के स्वागत में अयोध्या नगरी में खुशियां मनाई गयी थी. अयोध्यावासियों ने राजा राम के आगमन पर अपने-अपने घरों को रंगोली से सजाई थी. अपनी खुशी का इजहार को […]

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रोकें … दीपावली की सजावट में आधुनिकता हावी वारिसलीगंज धार्मिक मान्यताओं के वर्णित किवदंती के अनुसार 14 वषार्ें का वनवास काटकर वापस अयोध्या लौटे राजा राम के स्वागत में अयोध्या नगरी में खुशियां मनाई गयी थी. अयोध्यावासियों ने राजा राम के आगमन पर अपने-अपने घरों को रंगोली से सजाई थी. अपनी खुशी का इजहार को लेकर घर के आंगन को रोशनी से सजाया था. राजाराम की दृष्टि इससे सभी पर दूर से पडे़ इसके लिए रोशनीनुमा कुंडल को बांस से बांधकर काफी ऊपर तक लगाया गया था. सजावट में कई रंगों से पटे कागज के पताखे भी लगाए गए थे. आज भी इसी परम्परा का निर्वाह दीपावली के मौके पर किया जाता है. फर्क सिर्फ इतना है कि दीपावली की सजावट आधुनिकता में चला गया है. अब शायद ही कहीं कंडील व पताखे दिखाई देते हैं. गांव में पारांपरिक सजावट का अंश मात्र ही बच रहा है. शहर में आधुनिक सजावट को प्राथमिक दी जाती है. चमचमाती विधुत संचालित बल्व सजावट में चार चांद लगा रही है. कुंडील के लुप्त हो जाने से इससे जूडे़ कारीगर बेरोजगार हो गए हैं.

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