आत्मनर्भिर बन रहीं महिलाएं

Published at :09 Oct 2015 10:25 PM (IST)
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आत्मनर्भिर बन रहीं महिलाएं

अात्मनिर्भर बन रहीं महिलाएं आर्थिक स्वावलंबन के लिये मिल रहा प्रशिक्षणशिक्षा व प्रशिक्षण के बल पर ले रही निर्णय फोटो-1प्रतिनिधि, नवादा कार्यालयजिले में महिला उत्थान के साथ नारी सशक्तिकरण व आर्थिक स्वावलंबन के प्रति जागरूक किया जा रहा है. बालिकाओं व महिलाओं को अपने अधिकारों के बारे में जागरूक करना, लैंगिक समानता का हिमायत करना […]

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अात्मनिर्भर बन रहीं महिलाएं आर्थिक स्वावलंबन के लिये मिल रहा प्रशिक्षणशिक्षा व प्रशिक्षण के बल पर ले रही निर्णय फोटो-1प्रतिनिधि, नवादा कार्यालयजिले में महिला उत्थान के साथ नारी सशक्तिकरण व आर्थिक स्वावलंबन के प्रति जागरूक किया जा रहा है. बालिकाओं व महिलाओं को अपने अधिकारों के बारे में जागरूक करना, लैंगिक समानता का हिमायत करना व सामुदायिक स्तर पर शिक्षा के प्रचार की वकालत करने की जानकारी महिलाओं को दी जा रही है. नवादा जैसे पिछड़े जिले में नारी शिक्षा, स्वावलंबन व महिला अधिकार आदि मुद्दों की बात बेमानी थी. महिला उत्थान को लेकर पहले शहर में कोई प्रयास नहीं होता था. ऐसे वक्त में शिक्षिका डॉ उर्मिला शर्मा ने नारी सशक्तिकरण व इनकी आत्मनिर्भरता के लिए सन 2000 में उपासना महिला स्वावलंबन केंद्र नामक स्वयं सेवी संस्था की स्थापना की. शहर के पुरानी बाजार फूल मंडी के पास स्थित यह केंद्र हजारों नारियों को स्वावलंबी और सशक्त बना रहा है. यहां आर्थिक रूप से कमजोर महिलाओं जो कई प्रकार से शारीरिक व मानसिक प्रताड़ना का शिकार होती है, उनको दक्ष बनाया जाता है़ डॉ उर्मिला ने अपने आस-पड़ोस की लड़कियों व महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए सिलाई, कढ़ाई, बुनाई आदि का प्रशिक्षण देती हैं. छोटे स्तर पर शुरू हुई संस्था आज वृहद रूप ले चुकी है. शहर के आस-पास के गांव निंगारी, महद्दीपुर, नहर पर, सिंहौल आदि से कई लड़कियां प्रशिक्षण पाने आती हैं. लड़कियों व बच्चों के कपड़ों की सिलाई, जरीदार बूटीक, साड़ियों पर कढ़ाई, डिजाइनिंग के साथ स्वेटर बुनाई, तीज-त्योहारों पर आकर्षक मेहंदी लगाने की कला इस केंद्र पर सिखाया जाता है.बढ़ाया जाता है आत्मविश्वास यहां अंसार नगर, मोगलाखार, भदौनी, बड़ी दरगाह आदि स्थानों की लड़कियां भी यहां प्रशिक्षण पाती हैं. दहेज शोषित, शारीरिक व मानसिक रूप से प्रताड़ित महिलाओं को कानूनी सलाह भी मिलती है़ कम पढ़ी-लिखी महिलाओं को प्रौढ़ शिक्षा के तहत शिक्षित किया जाता है. पारिवारिक सामंजस्य बिठाने का परामर्श दिया जाता है. विवाहित महिलाओं को केंद्र के प्रयास से महिलाओं के आत्म विश्वास में कई गुणा बढ़ोतरी हुई है. स्त्रियों अपनी ताकत को पहचान अपना अलग और स्वतंत्र अस्तित्व का निर्माण कर रही है.भावनाओं को उभारने का प्रयास नारी सशक्तिकरण के तहत महिलाओं के भीतर प्रबल भावनाओं को उजागर करने का प्रयास किया जाता है. इससे वह बिना किसी सहारे के आनेवाली हर चुनौती का सामना कर सके. अपनी मेहनत व काबिलियत के बल पर केंद्र की लड़कियां अपना अलग पहचान बना रही हैं. डॉ उर्मिला शर्मा, संचालिकाछोटे शहर में रहनेवाली महिलाएं अपने अधिकारों को नहीं जानती और अपने महत्व को भी नहीं समझ पाती है. पति के अत्याचारों व सामाजिक लांछनों को अपनी नियति समझ कर यहां शिक्षा व आत्म निर्भरता पाती हैं. अपने ऊपर विश्वास करके जीवन संबंधी सही व गलत का फैसला करती है.माधुरी शर्मा, सह संचालिकाकेंद्र पर महिलाओं को सिलाई, कढ़ाई, बुनाई के अलावा अन्य घरेलू बातें भी बतायी जाती है. मानसिक सहारा पाकर अपनी हिन अवस्था से बाहर आकर अपना चहुंमुखी विकास करती है.रेणु देवी, प्रशिक्षिकाआर्थिक रूप से कमजोर स्त्रियां व लड़कियां नि:शुक्ल प्रशिक्षण पाती है. यहां प्रशिक्षण के साथ-साथ मानसिक व भावनात्मक सहारा मिलता है. इससे हमें समाज में बेहतर करने की प्रेरणा मिलती है.मधु गुप्ता, प्रशिक्षुप्रशिक्षण के साथ-साथ अपने अधिकारी व अहमियत की जानकारी मिलती है. स्त्रियां-पुरुषों से किसी भी क्षेत्र में पीछे नहीं है. चाहे वह देश की सीमाओं की रक्षा करने की बात हो या बड़ी-बड़ी कंपनियां और बैंकों के प्रबंधन का मामला हो.अप्पी देवी, प्रशिक्षुमुझे सूई पकड़ना भी नहीं आता था. इस केंद्र पर आकर सिलाई-कढ़ाई व बुनाई की बारीकियां सीखी. मेरे अंदर जो हिन भावनाएं भर दी गयी थी़ जो कमियां थी इस केंद्र पर आकर उन सबसे मुक्ति मिली.रश्मि, प्रशिक्षुमेरे पिता किसान है. मैं बड़े-बड़े संस्थानों में प्रशिक्षण नहीं पा सकती थी. सिलाई, कढ़ाई, बुनाई सीखी. नैतिक बातों के साथ-साथ अपने अधिकारों और महत्व को जाना. सोनल वत्स, प्रशिक्षु

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