मुरगी पालन भी बना फायदे का धंधा

Published at :07 Feb 2015 12:14 PM (IST)
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मुरगी पालन भी बना फायदे का धंधा

पशुपालन विभाग दे रहा मुरगी पालन को बढ़ावा विभाग की तरफ से प्रशिक्षण व इलाज की हुई व्यवस्था कम ब्याज पर बैंकों से मिलता है लोन नवादा (नगर) : कहीं नौकरी मांगने नहीं बल्कि देने वालों की सूची में युवकों को लाने के लिए बेरोजगार युवकों को मुरगी पालन का प्रशिक्षण दिया जा रहा है. […]

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पशुपालन विभाग दे रहा मुरगी पालन को बढ़ावा

विभाग की तरफ से प्रशिक्षण व इलाज की हुई व्यवस्था

कम ब्याज पर बैंकों से मिलता है लोन

नवादा (नगर) : कहीं नौकरी मांगने नहीं बल्कि देने वालों की सूची में युवकों को लाने के लिए बेरोजगार युवकों को मुरगी पालन का प्रशिक्षण दिया जा रहा है. स्वरोजगार के माध्यम से मुरगी पालन कर आर्थिक रूप से सबल बनने में युवाओं की सहायता जिला पशुपालन विभाग भी कर रहा है. इसमें तहत कुक्कुट पालन करने के लिए प्रशिक्षण, बैंक लोन की व्यवस्था की इलाज आदि सुविधा उपलब्ध करायी जा रही है. नाबार्ड की मदद से सवा दो लाख रुपये तक का लोन भी कम ब्याज पर उपलब्ध कराया जा रहा है. जनवरी मध्य से अप्रैल माह तक मुरगी पालन व्यवसाय शुरू करने के लिए सबसे अच्छा मौसम है. व्यवसाय शुरू करने के लिए विभाग छह दिनों का प्रशिक्षण भी दिलायेगा.

चल रहे 50 फार्म

मुरगी पालन में चुजों को बड़ा किया जाता है. इसकी बिक्री के लिए स्थानीय स्तर पर भी आसानी से बाजार उपलब्ध हो जाता है. फिलहाल जिले में 50 से अधिक फार्म चल रहे हैं, जो आय का बढ़िया साधन है.

बीमारियों से बचाव

पशुपालन विभाग द्वारा कौशल विकास कार्यक्रम चला कर मुरगी पालकों को बीमारियों से मुरगियों को बचाने की जानकारी दी जाती है. समय-समय पर विभाग द्वारा टीकाकरण कराने की भी व्यवस्था है. रानीखेत, गंबोरा, काउलपोक्स, इंफेक्सीयस बरजाइटिस, दस्त आदि बीमारियों में अपने स्तर से भी टीकाकरण कर सकते हैं. दवा की मात्र व तरीका बताया जाता है. हालांकि, बीमारियों के इलाज का काम कुक्कुट चिकित्सकों द्वारा किया जाता है. बीमारी होने के बाद इसकी सूचना देने पर वह इलाज करने पहुंचते हैं.

कैसे मिलेगा ऋण

नाबार्ड की योजना बंचर कैपिटल फंड के अंतर्गत एक हजार मुरगी के पालन के लिए दो लाख 24 हजार रुपये तक का लोन उपलब्ध कराया जाता है. नाबार्ड के पास आवेदन करने के बाद पशुपालन विभाग की सहमति से उसे संबंधित बैंक में भेजा जाता है. ऋण प्राप्ति के लिए 10 प्रतिशत राशि पूंजी के रूप में आवेदन द्वारा लगाया जाता है. शेष 90 प्रतिशत राशि लोन के रूप में बैंक देती है. इसमें 40 प्रतिशत राशि पर ही ब्याज लगता है. शेष 50 प्रतिशत राशि पर ब्याज नहीं देना होता है.

प्रशिक्षण प्रमाणपत्र भी

मुरगी पालन के लिए प्रशिक्षण पाने के लिए जिला पशुपालन विभाग के कार्यालय में आवेदन करना होता है. जिला कार्यालय द्वारा इच्छुक लोगों की सूची बना कर सेंट्रल पॉलट्री फार्म पटना भेजा जाता है. इसके बाद मुरगी पालन के प्रशिक्षण के लिए मुरगी पालक को भेजा जाता है. पटना में होनेवाला छह दिनों का यह प्रशिक्षण पूरी तरह नि:शुल्क है. प्रशिक्षण के बाद प्रशिक्षणार्थियों को सर्टिफिकेट भी दिया जाता है. बैंक का लोन मुरगी पालकों को इसी सर्टिफिकेट के आधार पर मिलता है.

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