बंद का दिखा असर, दवा लेने में छूटे पसीने

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 23 Jan 2020 8:26 AM

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नवादा : दवा दुकानों के बंद रहने के पहले ही दिन लोगों में बेचैनी देखने को मिली. सरकारी अस्पतालों में मरीजों को भले ही पूरी सुविधाएं मिलती रहीं, पर दवा के काउंटर पर काफी भीड़ लगी रही. इमरजेंसी के लिए पूर्व से तैयारी कर रखे निजी नर्सिंग होम का भी बंद के दौरान मानवता का […]

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नवादा : दवा दुकानों के बंद रहने के पहले ही दिन लोगों में बेचैनी देखने को मिली. सरकारी अस्पतालों में मरीजों को भले ही पूरी सुविधाएं मिलती रहीं, पर दवा के काउंटर पर काफी भीड़ लगी रही. इमरजेंसी के लिए पूर्व से तैयारी कर रखे निजी नर्सिंग होम का भी बंद के दौरान मानवता का प्रमाण देखने को मिला.

शहर के पार नवादा गया रोड स्थित बिजली आॅफिस के सामने मेट्रो हाॅस्पिटल में दो मरीजों की जान बचायी गयी. इधर दवा दुकानों के बंद रहने पर बाजार में लोग दवाओं के लिए छटपटाते नजर आ रहे थे.
हर तरफ इस बंदी का असर देखने को मिल रहा था. पूरे जिले की करीब 800 दवा दुकानों में ताला लटका रहा. नवादा दवा विक्रेता एसोसिएशन ने शहर के जैन धर्मशाला में एकत्रित होकर सुबह में एक बैठक की. इसके बाद जिलाध्यक्ष बीके राय के नेतृत्व में पूरे शहर में पैदल मार्च निकाला गया.
मांगों को लेकर लोग नारेबाजी करते हुए शहर के प्रजातंत्र चौक और समाहरणालय द्वार पर जम कर प्रदर्शन भी किया. दवा दुकानदारों का पैदल मार्च शहर के मेन रोड, लाल चौक, सोनारपट्टी रोड, स्टेशन रोड व अस्पताल रोड आदि इलाकों में भ्रमण किया. अध्यक्ष ने बताया कि फार्मासिस्ट की समस्या सहित सात सूत्री मांगों को लेकर राज्य दवा संघ के आह्वान पर पूरे बिहार की दवा दुकानें तीन दिनों तक हड़ताल पर हैं.
इमरजेंसी के लिए एक-एक दुकान खोलने की औषधि विभाग ने नहीं दी अनुमति : अध्यक्ष : दवा एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष बीके राय ने बताया कि संघ ने मानवता को देखते हुए हर प्रखंडों में एक-एक सुयोग्य दवा दुकानों को खोलने की सूची जारी कर औषधि विभाग को दिया था. लेकिन, औषधि विभाग ने यह कह कर खुदरा दवा दुकानों को खोलने की अनुमति नहीं दी कि फार्मासिस्ट नहीं हैं. उन्होंने कहा कि तीन दिवसीय हड़ताल के कारण सभी फार्मासिस्ट छुट्टी पर चले गये हैं.
ऐसे हालात में वैसे खुदरा दवा दुकानों की सूची बनायी गयी थी, जिसके पास फार्मासिस्ट व सुयोग्य संचालक हैं. बावजूद इजाजत नहीं मिलने से पूरे जिले में पूरी तरह से दवा दुकानें बंद कर दी गयीं. उन्होंने बताया कि फार्मासिस्ट सहित सात सूत्री मांगों को लेकर दवा दुकानदारों की हड़ताल की गयी है.
उन्होंने कहा कि यदि इस आंदोलन के बाद भी सुनवाई नहीं हुई, तो राज्य संघ के आह्वान पर कभी भी अनिश्चितकालीन हड़ताल की जा सकती है. अध्यक्ष श्री राय ने कहा कि आम लोगों की सुविधाओं को देखते हुए सिविल सर्जन से भी अपील की गयी है कि यदि इमरजेंसी में दवाओं की जरूरत पड़ती है, तो संघ से मांग करने पर उसकी उपलब्धता करा दी जायेगी.
बंद के दौरान पूरे शहर में जुलूस भी निकाला गया है. जुलूस के दौरान संघ के कोषाध्यक्ष भोला प्रसाद, सचिव अनिल प्रसाद, उपाध्यक्ष राजेश कुमार, संयुक्त सचिव योगेंद्र कुमार, संगठन सचिव ज्योतिष कुमार, विनोद कुमार, सुजीत कुमार, शैलेश कुमार व उदय जैन सहित दर्जनों दवा दुकानदार शामिल थे.
सदर अस्पताल में दवा काउंटर पर लगी रही भीड़ : सदर अस्पताल में दवा दुकानों के बंद रहने के कारण दवा काउंटर पर मरीजों की काफी भीड़ देखने को मिली. यहां हर बीमारी के लिए मरीज पुर्जा बनवाकर ओपीडी से इलाज कराकर दवा लेने के लिए कतार में खड़े रहे. सिविल सर्जन डाॅ श्रीनाथ प्रसाद ने कहा कि तीन दिनों के लिए हर सरकारी अस्पतालों में पर्याप्त दवाओं की व्यवस्था कर दी गयी है.
इसके अलावा इमरजेंसी की पूरी तैयारी की गयी है. किसी भी परिस्थिति से निबटने के लिए सरकारी अस्पताल कटिबद्ध है. दवा दुकानों की हड़ताल को लेकर पूर्व में ही सभी सरकारी अस्पतालों को हाई अलर्ट कर दिया गया था. उन्होंने कहा कि सदर अस्पताल 24 घंटे दवा उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गयी है. शाम 6 बजे के पहले तक दवा काउंटर से दवा दी जायेगी. छह बजे के बाद इमरजेंसी वार्ड में रोगियों को दवा दी जायेगी.
प्रखंडों में क्या रहा हाल
अकबरपुर. थोक और खुदरा दवा विक्रेता अपनी विभिन्न मांगों को लेकर हड़ताल पर चले गये हैं. पूरे बिहार में दवा विक्रेताओं की हड़ताल से लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. अकबरपुर प्रखंड में 22 से 24 जनवरी तक दवा दुकानें बंद रहेंगी. बिहार केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन राज्य सरकार के द्वारा सभी दवा दुकानों पर फार्मासिस्ट की नियुक्ति का विरोध कर रहा है. बिहार सरकार ने हाल में ही सभी दवा दुकानों पर फार्मासिस्ट की नियुक्ति को अनिवार्य कर दिया है और इसी का दवा विक्रेता विरोध कर रहे हैं.
एसोसिएशन का मानना है कि राज्य सरकार के ड्रग इंस्पेक्टर भी लगातार दवा दुकानों पर छापेमारी करके दवा विक्रेताओं को प्रताड़ित कर रहे हैं. एसोसिएशन में पारदर्शिता लाने के लिए बिहार सरकार से दिशा-निर्देश जारी करने की भी मांग की है. हालांकि, सरकारी अस्पतालों में दवा की जीवन रक्षक दवाएं उपलब्ध करायी जा रही हैं.
गोविंदपुर. राज्यस्तरीय दवा विक्रेता संघ के आह्वान पर हड़ताल के कारण बुधवार को गोविंदपुर में सभी दवा की दुकानों को बंद रखा गया. इसका सबसे ज्यादा असर मरीजों पर पड़ा. मरीज दवा के लिए दिन भर परेशान रहे.
दवा विक्रेता संघ के अध्यक्ष व राज मेडिको के संचालक रंजीत प्रसाद, राहुल मेडिकल स्टोर के संचालक कौशल किशोर, प्रीति मेडिकल हॉल के संचालक अशोक कुमार, जानकी मेडिकल हॉल के संचालक ललन सिंह व शर्मा मेडिकल हॉल के संचालक रंजीत शर्मा सभी ने मिल कर बताया कि प्रदेश संगठन के आह्वान पर सभी दवा दुकानों को बंद रखने का निर्णय लिया गया है.
नारदीगंज. बुधवार को प्रखंड क्षेत्र की सभी दवा दुकानें बंद रहीं. इसके कारण आमलोगों को काफी परेशानी हुई. मरीज के परिजन दवा के लिए इधर-उधर भटकते नजर आये.
दवा दुकान संघ के प्रखंड अध्यक्ष गोरेलाल सिंह ने बताया कि फर्मासिस्ट की समस्या के समाधान होने तक पूर्व की व्यवस्था लागू रहे, दवा दुकानों के निरीक्षण में एकरूपता व पारदर्शिता हो, दवा दुकानों के लाइसेंस को रद्द करने की कार्रवाई पर रोक समेत अन्य मांगों को लेकर एसोसिएशन के द्वारा बिहार से सभी दवा दुकानों को बंद रखने का निर्णय लिया गया है. इसी निर्णय के आलोक में नारदीगंज प्रखंड की सभी दुकानें बंद हैं.
रजौली. विभागीय उत्पीड़न एवं शोषण के विरोध सभी थोक व खुदरा दुकानदार शुक्रवार से लगातार तीन दिनों तक अपनी दुकानों को बंद रखेंगे. बंद के समर्थन में आयोजित सभा को संबोधित करते हुए दवा व्यवसायी संघ के अध्यक्ष दिनेश कुमार पिंकू ने कहा कि फार्मासिस्ट की समस्या का जब तक सरकार के द्वारा समाधान नहीं होता है, विरोध जारी रहेगा.
यदि सरकार के द्वारा मांगों पर उचित निर्णय नहीं किया जाता है, तो आंदोलन अगली बार अनिश्चितकालीन होगा. मौके पर सचिव वाल्मीकि कुमार, कोषाध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद, उपाध्यक्ष जनार्दन प्रसाद अन्य लोगों ने अपने विचार दिये.
कौआकोल. बिहार केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन के आह्वान पर कौआकोल प्रखंड क्षेत्र के बाजारों में बुधवार को सभी दवा व निजी प्रैक्टिसनरों की दुकानें बंद रहीं, दवा की दुकानें व निजी प्रैक्टिसनरों की दुकानें बंद रहने के कारण मरीजों के साथ आम लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा. निजी प्रैक्टिसनरों की दुकानें बंद रहने को लेकर बुधवार को सरकारी अस्पताल में मरीजों की संख्या में काफी इजाफा हुआ.
मेट्रो हाॅस्पिटल में दो मरीजों की बचायी गयी जान
शहर के पार नवादा गया रोड स्थित बिजली आॅफिस के सामने स्थित मेट्रो हाॅस्पिटल में दवा दुकानों के बंद रहने पर इमरजेंसी की पूरी तैयारी की गयी थी.
हड़ताल के पहले दिन दोपहर तक यहां करीब 15 मरीज इलाज के लिए आये, जिसमें तीन हिस्सा मरीज इमरजेंसी के थे. मेट्रो हाॅस्पिटल के डायरेक्टर डाॅ सत्यपाल ने बताया कि इस आपातकालीन माहौल में दो ऐसे मरीजों की जान बचायी, जिसका कहीं भी इलाज नहीं हो पाया था.
उन्होंने बताया कि सिरदला निवासी 40 वर्षीय दिलीप पासवान का आंत फंस गया था, जिसे इलाज कर राहत दी गयी. इसी तरह से गोविंदपुर के कोरियौना भवनपुर निवासी 65 वर्षीय वृद्ध बाबूलाल यादव को सांस लेने में तकलीफ व हफनी की समस्या थी.
कहीं भी इलाज नहीं होने पर उसे मेट्रो हाॅस्पिटल लाया गया. उन्होंने बताया कि यहां आइजीएमएस पटना व पारस हाॅस्पिटल पटना के पूर्व आवासीय चिकित्सक डाॅ राहुल राज की मदद से जान बचायी गयी. उन्होंने बताया कि दवा दुकानों के बंद रहने की सूचना पर पूर्व में ही जीवन रक्षक इमरजेंसी दवाओं की व्यवस्था कर ली गयी थी.
क्या कहते हैं रोगी व परिजन
सदर अस्पताल में दवा काउंटर दो बजे बंद होने के बाद मरीज दवा के लिए हलकान होते रहे. नरहट प्रखंड के बंडाचक निवासी अवधेश कुमार ने बताया कि उन्होंने अपने बेटे रिषभ का इलाज सदर अस्पताल में कराया है, लेकिन 2.15 बजे जब दवा काउंटर पर दवा लेने के लिए पहुंचे तब काउंटर बंद पाया.
वहीं गोपालपुर की ऋचा कुमारी, मसूदा की सुहानी कुमारी, भदौनी की आरोही, अहमदी की पूजा कुमारी, दुधैली के राजकुमार पांडेय तथा मलुक्का बिगहा के शाहनवाज ने बताया कि सदर अस्पताल में इलाज तो करा लिया, लेकिन दवा काउंटर बंद था.
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