डॉक्टर व संसाधनों की कमियों से जूझ रहा धमौल पीएचसी

Updated at : 08 Mar 2019 8:07 AM (IST)
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डॉक्टर व संसाधनों की कमियों से जूझ रहा धमौल पीएचसी

पकरीबरावां : धमौल उप स्वास्थ्य केंद्र की हालत दिन-प्रतिदिन बदतर होती जा रही है. उप स्वास्थ केंद्र में चिकित्सकों का सर्वथा अभाव है. यही कारण है कि उप स्वास्थ केंद्र ज्यादातर बंद ही रहता है. विशेष स्वास्थ्य कार्यक्रमों के अवसर पर खुलती भी है, तो मात्र चंद घंटों के लिए. तीन जिलों की सीमा पर […]

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पकरीबरावां : धमौल उप स्वास्थ्य केंद्र की हालत दिन-प्रतिदिन बदतर होती जा रही है. उप स्वास्थ केंद्र में चिकित्सकों का सर्वथा अभाव है. यही कारण है कि उप स्वास्थ केंद्र ज्यादातर बंद ही रहता है. विशेष स्वास्थ्य कार्यक्रमों के अवसर पर खुलती भी है, तो मात्र चंद घंटों के लिए.
तीन जिलों की सीमा पर स्थित यह उप स्वास्थ्य केंद्र वर्तमान समय में खुद बीमार की हालत में है. इस ओर आज तक कोई जन प्रतिनिधि या सामाजिकता का दंभ भरनेवाले लोग आगे नहीं आ पाये हैं.
50 हजार से भी ज्यादा लोगों का स्वास्थ्य का जिम्मा इस उप स्वास्थ केंद्र के भरोसे है. बताया जाता है कि यहां दो एनएम नियुक्त है. इसमें एक की प्रतिनियुक्ति बुधौली कर दी गयी है. इससे उप स्वास्थ्य केंद्र की हालत और भी चरमरा गयी है. नवादा, जमुई व शेखपुरा की सीमा पर स्थित होने के कारण यह उप स्वास्थ्य केंद्र बहुत ही महत्वपूर्ण है.
इसमें नवादा जिले के धमौल, पड़रिया, जम्हड़िया, ढोढा, अंजुनार, पुर्णाडीह, श्यामदेव, जसत सहित दर्जनों गांवों व शेखपुरा जिला के अफरडीह, ओरानी, चोढ, महुली व जमुई जिले के कैथा, आढा, तेलार, महतपुर, चंद्रदीप सहित दर्जनों गांवों के रोगी यहां इलाज के लिए आते हैं, जहां उप-स्वास्थ्य केंद्र की हालत उन्हें निराशा के सिवाय कुछ नहीं दे पाती है.
संसाधनों का घोर अभाव : संसाधन व कर्मियों की कमी के कारण यह स्वास्थ्य केंद्र वर्षों से मृत प्राय है. जानकारों की मानें तो यह केवल नाम का अस्पताल है. इससे किसी को किसी तरह का लाभ नहीं मिल पाता है.
हां वर्तमान में यह जुआरियों का अड्डे व स्थानीय लोगों के लिए गोयठा ठोंका जाने का महफूज स्थल बना हुआ है. इस अस्पताल में डॉक्टर, कर्मी व संसाधन सभी चीजों का घोर अभाव है. इसका खामियाजा यहां के लोगों को रोज भुगतना पड़ रहा है. जर्जर हो चुके भवनों में मरम्मत का कार्य तो किया गया है लेकिन बाहर ही बाहर.
वर्षों पूर्व अस्पताल को नया रूप देने के लिए नवनृमित भवनों का निर्माण शुरू किया गया था, जो आज भी अधर में लटका है. लोगों की शिकायत पर चिकित्सकों ने अस्पताल की जांच भी की. विभाग को रिपोर्ट भी सौंपा. परंतु अब तक विभाग इस संबंध में कुछ भी नहीं कर पायी है.
मरीजों के लिए मशक्कत
ग्रामीण बताते हैं कि वर्षों पूर्व इस उप-स्वास्थ केंद्र में डा राम कुमार प्रसाद की प्रतिनियुक्ति की गयी थी, तब यह अस्पताल अस्तित्व में आया था. उनके तबादले के बाद ही यह यथावत स्थिति में पहुंच गयी.
इसके बाद एक आयुद्ध चिकित्सक डॉ रामाकांत निषाद को यहां की जिम्मेदारी सौंपी गयी, जिनकी प्रतिनियुक्ति पकरीबरावां पीएचसी कर दी गयी है.
उसके बाद तो फिर किसी ने इस अस्पताल की सुध नहीं ली. पंचायत के लोगों को किसी भी प्रकार के इलाज के लिए 10 से 15 किलोमीटर दूर प्रखंड मुख्यालय आना पड़ता है. विषम परिस्थिति में तो रोगियों की हालत बदतर हो जाती है. उपस्वास्थ केंद्र का सही रख रखाव नहीं होने से यह अतिक्रमणकारियों की भी चपेट में है.
क्या कहते हैं अधिकारी
चिकित्सकों की कमी रहने के कारण धमौल स्वास्थ्य उप केंद्र में चिकित्सक नहीं जा पा रहे हैं, जैसे ही डाॅक्टर पीएचसी में भेजे जायेंगे, उनकी प्रतिनियुक्ति धमौल एपीएचसी में कर दी जायेगी.
डॉ एम जुबैर, पीएचसी प्रभारी, पकरीबरावां
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