राजगीर मलमास मेला: एनओसी के चक्कर में बंद पड़े रहे झूले और सर्कस, संचालकों ने की सिंगल विंडो की मांग

ए आई द्वारा बनायी गयी तस्वीर
Nalanda News: नालंदा के राजगीर मलमास मेला में जटिल प्रशासनिक प्रक्रिया के कारण सर्कस, थियेटर और झूलों के संचालन की अनुमति मिलने में रोज 6 से 8 घंटे की देरी हो रही है. इससे संचालकों का व्यवसाय प्रभावित हो रहा है और पर्यटक बिना मनोरंजन के लौट रहे हैं. मेला संचालकों और स्थानीय बुद्धिजीवियों ने समय और संसाधन की बर्बादी को रोकने के लिए प्रशासन से ‘सिंगल विंडो सिस्टम’ बहाल करने की मांग की है.
Nalanda News (रामविलास): अंतरराष्ट्रीय पर्यटन नगरी राजगीर में आयोजित ऐतिहासिक एवं पवित्र मलमास मेला में देश-दुनिया से आए श्रद्धालुओं और पर्यटकों की भारी भीड़ उमड़ रही है. मेले में जहां एक ओर धार्मिक आस्था का सैलाब दिख रहा है, वहीं दूसरी ओर आम लोगों और बच्चों के मनोरंजन के साधन भी मुख्य आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं. मेले में आए बड़े सर्कस, थियेटर, जादूगर शो, मारुति सर्कस (मौत का कुआं), जलपरी शो, विशाल टावर झूला समेत अन्य मनोरंजन प्रतिष्ठानों में प्रतिदिन हजारों की संख्या में दर्शक पहुंच रहे हैं. लेकिन, इस बार प्रशासनिक अनुमति (लाइसेंस) की बेहद जटिल और पेचीदा प्रक्रिया के कारण इन प्रतिष्ठानों के संचालकों को भारी मानसिक और आर्थिक किल्लत का सामना करना पड़ रहा है.
6 से 8 घंटे की भागदौड़ में बीत रहा समय, बंद देखकर लौट रहे पर्यटक
विभिन्न राज्यों से आए मनोरंजन प्रतिष्ठानों के संचालकों ने अपनी सामूहिक पीड़ा साझा करते हुए बताया कि उन्हें मेले में प्रतिदिन शो चलाने की अनुमति लेने के लिए अलग-अलग विभागों और टेबल के चक्कर काटने पड़ते हैं. सबसे पहले कई विभागों से अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) प्राप्त करना पड़ता है. इसके बाद यह फाइल डीएसपी (DSP) कार्यालय के माध्यम से स्क्रूटनी होकर अनुमंडल पदाधिकारी (SDM) के पास भेजी जाती है, जहां से अंतिम रूप से संचालन की दैनिक अनुमति निर्गत की जाती है.
संचालकों का आरोप है कि वीआईपी मूवमेंट और मेला क्षेत्र के निरीक्षण के कारण अक्सर संबंधित आला पदाधिकारी फील्ड में रहते हैं. उनके कार्यालय में न होने की स्थिति में इस कागजी प्रक्रिया को पूरी होने में ही रोजाना 6 से 8 घंटे का लंबा समय बर्बाद हो जाता है. नतीजा यह हो रहा है कि दोपहर में शुरू होने वाले मनोरंजन केंद्र और शो शाम तक शुरू नहीं हो पाते हैं, जिससे उनका पूरा व्यवसाय चौपट हो रहा है. कई बार दूर-दराज से आए तीर्थयात्री और बच्चे काउंटरों पर लंबा इंतजार करने के बाद शो बंद देखकर निराश होकर वापस लौट जाते हैं.
समय और संसाधन दोनों की बर्बादी, ‘सिंगल विंडो सिस्टम’ ही एकमात्र समाधान
मेला व्यवसायियों का साफ तौर पर कहना है कि हर रोज सुबह से ही अलग-अलग विभागों के चक्कर लगाने में उनका कीमती समय और मानवीय संसाधन दोनों बर्बाद हो रहे हैं. उनका मानना है कि यदि जिला प्रशासन मेले के भीतर ही एक ‘सिंगल विंडो सिस्टम’ (एकल खिड़की व्यवस्था) लागू कर दे, जहां एक ही छत के नीचे सभी विभागों के अधिकारी बैठकर आवश्यक एनओसी और अनुमति जारी करें, तो यह प्रक्रिया अधिक सरल, पारदर्शी और प्रभावी हो सकती है.
प्रशासन से विशेष व्यवस्था की पुरजोर मांग
इस अव्यवस्था को लेकर केवल व्यवसायी ही नहीं, बल्कि राजगीर के स्थानीय बुद्धिजीवी और सामाजिक कार्यकर्ता भी मुखर हो गए हैं. स्थानीय लोगों ने नालंदा जिला प्रशासन से पुरजोर मांग की है कि मलमास मेला जैसे बिहार के इतने बड़े और राजकीय स्तर के आयोजन में मनोरंजन प्रतिष्ठानों के लिए एक विशेष और सुलभ गाइडलाइन बनाई जाए. इससे न केवल बाहर से आए संचालकों को अनावश्यक दफ्तरशाही और परेशानियों से बड़ी राहत मिलेगी, बल्कि मेले में आने वाले लाखों पर्यटकों और तीर्थयात्रियों को भी समय पर सुव्यवस्थित मनोरंजन सुविधाओं का पूरा लाभ मिल सकेगा.
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