चूजापालन कर आत्मनिर्भर बन रहीं सैकड़ों महिलाएं

Updated at : 06 Feb 2017 12:44 AM (IST)
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चूजापालन कर आत्मनिर्भर बन रहीं सैकड़ों महिलाएं

योजना. छह महीने में कमा रही 25 से 30 हजार रुपये राजगीर प्रखंड के छह मदर यूनिटों से जुड़ी हैं 1465 ग्रामीण महिलाएं बिहारशरीफ : ग्रामीण क्षेत्र की महिलाएं आज चूजे पालकर अपना व अपने परिवार की जिंदगी संवार रही हैं. इस कार्य में गांव की महिलाएं प्रत्येक छह माह पर करीब 25 से 30 […]

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योजना. छह महीने में कमा रही 25 से 30 हजार रुपये

राजगीर प्रखंड के छह मदर यूनिटों से जुड़ी हैं 1465 ग्रामीण महिलाएं
बिहारशरीफ : ग्रामीण क्षेत्र की महिलाएं आज चूजे पालकर अपना व अपने परिवार की जिंदगी संवार रही हैं. इस कार्य में गांव की महिलाएं प्रत्येक छह माह पर करीब 25 से 30 हजार रुपये कमा रही हैं. राज्य के पशु एवं मत्स्य संसाधन विकास विभाग के साथ मिलकर ग्रामीण आजीविकोपार्जन प्रोत्साहन समिति मदर यूनिट मॉडल के आधार पर सम्मेकित कुक्कुट विकास योजना को प्रोत्साहित कर रही है. मदर यूनिट के द्वारा बैकयार्ड मुरगीपालन में रुचि रखने वाले जीविका स्वयं सहायता समूहों से जुड़े कम से कम 300 परिवारों को इस कार्यक्रम से लाभान्वित किया जा रहा है. इस योजना के तहत कमाई का फंडा यह है
कि थोड़ी सी राशि जमा कर फायदा उठा सकते हैं. चूजा पालन में नुकसान सरकार का फायदा आपका. अपनी मुरगी भी होगी और अपना अंडा भी होगा. राजगीर प्रखंड के छह ऐसे मदर यूनिट संचालित हो रहे हैं. अंडवस, वनछिली, नाहूव, विस्थापित नगर, भूई व फेरा गांव में ये मदर यूनिट संचालित हैं. एक मदर यूनिट से 300 महिलाएं जुड़ी हुई है. फिलवक्त राजगीर के छह मदर यूनिटों से कुल 1465 महिलाएं जुड़ी हुई हैं. इनमें अनुसूचित जाति की महिलाएं 80 फीसदी एवं 20 फीसदी अन्य जाति की महिलाएं शामिल हैं. अनुसूचित जाति में से 90 प्रतिशत महिलाएं पासी समाज की हैं.
कैसे हो रहा चूजा पालन:
सबसे पहले चूजा पालन करने की इच्छुक महिलाओं का चयन किया जाता है. इन महिलाओं का एक उत्पादक समूह बनाया जाता है. एक समूह में 50 महिलाएं शामिल होती हैं. समूह की एक महिला सदस्य से सहायता राशि के रूप में एक बार 3150 रुपये लिये जाते हें. मदर यूनिट द्वारा महिला सदस्यों को स्थायी बिन (पिंजरा) एवं 150 चूजा दिया जाता है. यह चूजा 28 दिन का पाला हुआ होता है.
नुकसान से डर की बात नहीं:
इस योजना का सबसे बड़ा फायदा यह है कि नुकसान हुआ तो सरकार और फायदा आपका. इसमें एक पीआरपी (पॉल्ट्री रिसोर्स पर्सन) होता है, जो 28 दिन के बाद महिलाओं के घर घर जा कर चूजे के रख रखाव की जानकारी लेते हैं. 50 घरों पर एक पीआरपी होता है. ये पीआरपी चूजे के लिए गुड़, पानी, सूची, फीड प्री स्टार्टर, स्टार्टर, फिनिशर फूड, दवा व वैक्सीन सदस्यों के घर पर जाकर उपलब्ध कराते हैं.
क्या कहते हैं अधिकारी
‘’ ग्रामीण महिलाएं मदर यूनिट से जुड़कर प्रत्येक छह माह में 25 से 30 हजार रुपये कमा रही हैं. मुरगा भी बेचती हैं और अंडा भी. मुरगा व अंडा खाने से गरीब महिलाओं का परिवार कुपोषण से दूर हो रहा है.’’
राकेश कुमार सिंह, एरिया को-ऑर्डिनेटर
नुकसान का डर नहीं
‘’चूजा पालन से जुड़ाकर ग्रामीण महिलाएं अपने व परिवार की आर्थिक स्थित सुधार रही हैं. इस योज में अच्छी बात यह है कि इसमें नुकसान होने का डर नहीं होता है. एक बार 3150 रुपये जमा करने के बाद सारी परेशानी से दूर हो जाती हैं. ’’
चिंता देवी, सदस्य, वनछिली , राजगीर
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