बेसहारा बच्चों का जीवन संवार रही परवरिश योजना

Updated at : 05 Jan 2017 7:00 AM (IST)
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बेसहारा बच्चों का जीवन संवार रही परवरिश योजना

नालंदा में 647 बच्चों को मिल रहा लाभ लाभुकों को मिल रहे एक हजार रुपये बिहारशरीफ : समाज के बेसहारा बच्चों के लिए सरकार की परवरिश योजना रंग ला रही है. नालंदा में आज सैकड़ों बच्चों को इस योजना का लाभ मिल रहा है. हरेक माह ऐसे बच्चों के लालन- पालन कर रहे अभिभावकों के […]

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नालंदा में 647 बच्चों को मिल रहा लाभ

लाभुकों को मिल रहे एक हजार रुपये
बिहारशरीफ : समाज के बेसहारा बच्चों के लिए सरकार की परवरिश योजना रंग ला रही है. नालंदा में आज सैकड़ों बच्चों को इस योजना का लाभ मिल रहा है. हरेक माह ऐसे बच्चों के लालन- पालन कर रहे अभिभावकों के बैंक खाते में नौ सौ से एक हजार रुपये की राशि जिला बाल संरक्षण इकाई कार्यालय द्वारा भेजी जा रही है. बताते चलें कि जिले में इस महत्वाकांक्षी योजना की शुरुआत नवंबर 2014 में की गयी थी. पिछले दो वर्षों के दौरान इस योजना के तहत करीब एक हजार से भी अधिक आवेदन कार्यालय को मिले, लेकिन कई लाभुक योजना की शर्तों की कसौटी पर खरे नहीं उतर सके. ऐसे में सिर्फ 787 आवेदनों पर ही कार्यालय द्वारा अंतिम मुहर लगायी गयी.
जिले में कहां से कितने आवेदन स्वीक्त :परवरिश योजना के अंतर्गत जिले के सदर प्रखंड में कुल 74 व ग्रामीण क्षेत्र में 44 एवं हरनौत में 46 बच्चों को लाभ मिल रहा है. इसी प्रकार अस्थावां प्रखंड में 35, सरेमरा में 33, बिंद में 33, रहुई में 64, नूरसराय में 65, एकंगरसराय में 57, नगरनौसा में 29 एवं हिलसा में 30 बच्चों को लाभ मिल रहा है. इसी तरह इस्लामपुर प्रखंड में 52, परबलपुर में 13, थरथरी में 10, करायपरशुराय में 37, चंडी में 20, राजगीर में 36, गिरियक व कतरीसराय में 34 एवं सिलाव में कुल 46 बच्चों को योजना का लाभ मिल रहा है.
क्या है परवरिश योजना :यह बिहार सरकार की एक महत्वपूर्ण योजना है. इसके अंतर्गत समाज के अभिवंचित बच्चों के लालन-पालन के लिए उनके अभिभावकों को आर्थिक सहायता की जाती है. लाभुकों के चयन के बाद हरेक माह आरटीजीएस के माध्यम से अभिभावकों के बैंक खाते में नौ से एक हजार रुपये की राशि भेजी जाती है.
क्या है योजना का लक्ष्य समूह :
दरअसल यह योजना ऐसे बच्चों के लिए है जो अनाथ एवं बेसहारा हैं. एड्स व कुष्ठ रोग से पीड़ित हैं. एड्स या कुष्ठ रोग के कारण शारीरिक विकलांग हो चुके माता-पिता के बच्चों के लिए यह योजना चलायी जा रही है. सरकार की इस योजना के अंतर्गत ऐसे बच्चों के लालन-पालन के लिए हरेक माह निर्धारित राशि लाभुकों के बैंक खाते में आरटीजीएस के माध्यम से भेजी जाती है.
योजना लाभ के लिए पात्रता :
ऐसे बच्चे जिनकी आयु अठारह वर्ष से कम हो. अनाथ बच्चों की स्थिति में अभिभावक का नाम बीपीएल सूची में हो या फिर साठ हजार रुपये तक उनकी वार्षिक आय हो.
योजना के अंतर्गत अनुदान राशि :शून्य से छह वर्ष के बच्चों के लिए नौ सौ रुपये एवं छह वर्ष से ऊपर एवं अठारह वर्ष तक के बच्चों के लिए हरेक माह एक हजार रुपये अनुदान की राशि लाभुक बच्चों के अभिभावकों के बैंक एकाउंट में आरटीजीएस के माध्यम से भेजी जाती है.
आवेदन के लिए यह कागजात जरूरी : योजना का लाभ लेने के इच्छुक अभिभावकों के लिए बीपीएल सूची की छाया प्रति अथवा साठ हजार रुपये तक का आय प्रमाण पत्र की छाया प्रति आवेदन पत्र के साथ संलग्न करना होता है. अनाथ बच्चों की स्थिति में माता एवं पिता का सक्षम प्राधिकार द्वारा निर्गत मृत्यु प्रमाण पत्र देना होता है. इसी प्रकार कुष्ठ रोग से पीड़ित माता-पिता सक्षम प्राधिकार द्वारा निर्गत ग्रेड 2 प्रमाण पत्र संलग्न करना जरूरी है. एचआइवी पॉजीटिव लाभुक बच्चे एवं एडस पॉजीटिव माता अथवा पिता की संतान की स्थिति में एआरटी केंद्र द्वारा जारी कार्ड मान्य होता है.
यहां से ले सकते हैं आवेदन
योजना के लाभ लेने के इच्छुक अभिभावक अपने नजदीकी आंगनबाड़ी केंद्र, बाल विकास परियोजना कार्यालय या फिर जिला बाल संरक्षण इकाई के कार्यालय से नि:शुल्क आवेदन ले सकते हैं. आवेदक आवेदन पत्रों को भलीभांति भरकर आवश्यक कागजातों के साथ आंगनबाड़ी केंद्र एवं एड‍्स पॉजीटिव के मामले में सीडीपीओ कार्यालय में जमा कर सकते हैं.
787 में 647 बच्चों को मिल रहा लाभ :
पिछले दो साल के दौरान परवरिश योजना के अंतर्गत कुल 787 आवेदन पत्र स्वीक‍त किये गये हैं. इसमें से 647 बच्चों के अभिभावकों के बैंक खाते में आरटीजीएस के माध्यम से हरेक माह नौ सौ से एक हजार रुपये की राशि भेजी जा रही है. शेष लाभुकों को भी उनका संयुक्त बैंक खाता कार्यालय को उपलब्ध होने के बाद योजना का लाभ मिलना शुरू हो जायेगा.
नेहा नुपूर, सहायक निदेशक, जिला बाल संरक्षण इकाई, नालंदा
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