राजगीर में बौद्ध धर्मावलंबियों की उमड़ रही है भीड़

Updated at : 05 Jan 2017 6:58 AM (IST)
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राजगीर में बौद्ध धर्मावलंबियों की उमड़ रही है भीड़

राजगीर में पूजा- अर्चना करते बौद्ध धर्मावलंबी. राजगीर : बोधगया में शुरू हुए काल चक्र पूजा में शामिल होने के लिए बड़ी संख्या में बौद्ध धर्मावलंबी बोधगया पहुंच रहे हैं. बोधगया जाने के क्रम में बड़ी संख्या में बौद्धिष्टों का दल राजगीर भी आ रहे हैं. कुछ बौद्ध धर्मावलंबी राजगीर से दर्शन कर बोधगया जाते […]

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राजगीर में पूजा- अर्चना करते बौद्ध धर्मावलंबी.

राजगीर : बोधगया में शुरू हुए काल चक्र पूजा में शामिल होने के लिए बड़ी संख्या में बौद्ध धर्मावलंबी बोधगया पहुंच रहे हैं. बोधगया जाने के क्रम में बड़ी संख्या में बौद्धिष्टों का दल राजगीर भी आ रहे हैं. कुछ बौद्ध धर्मावलंबी राजगीर से दर्शन कर बोधगया जाते हैं तो बहुत से बौद्ध धर्मावलंबी कालचक्र पूजा में शामिल होकर राजगीर आते हैं. बड़ी संख्या में बाद्ध धर्मावलंबियों को राजगीर आने से पर्यटन व तीर्थस्थल राजगीर में इन दिनों बौद्धमय हो गया है. बताया जाता है कि पूजा बोधगया में तीन जनवरी से शुरू होकर 14 जनवरी तक चलेगा.
इस दौरान राजगीर में बड़ी संख्या में बौद्ध धर्मावलंबियों को आगम होने का अनुमान लगाया जा रहा है. बताया जाता है कि बौद्ध अनुयायियों को दो वर्गों में बांटा गया है. जिसमें एक हीनयाना व दूसरा महायाना है
जिसमें बुद्ध को मानने वाले बौद्धिष्ट देशों में महायायान वर्ग के बौद्ध धर्मावलंबी ही कालचक पूजा में शामिल होते है. जिसमें क्रमश: ग्रेट बौद्धिष्ट सर्किल में शामिल जापान, चीन, कोरिया, तीब्बत, भूटान व सिक्किम आदि देशों के बौद्ध अनुयायी कालचक्र पूजा में शामिल होते हैं. जबकि म्यामार, थाईलैंड, वियतमान, कंबोडिया, लाओस, श्रीलंका व बंगलादेश के बौद्ध अनुयायी इस पूजा में शामिल नहीं होते. बताया जाता है कि भगवान बुद्ध ने बोध गया में ज्ञान प्राप्ति के पूर्व व ज्ञान प्राप्ति के बाद राजगीर को प्रमुख रूप से प्रिय स्थल के रूप में चुना था. जिन्होंने यहां के रत्नागिरि पर्वत से सटे गृद्धकुट पर्वत पर कई वर्षों तक तपस्या में ध्यान मग्न रहे थे. बोध गया के कालचक्र पूजा में शामिल होने वाले बौद्ध धर्मावलंबियों को प्रथम दर्शन इस पर्वत कि बुद्ध कि तपस्थली होती है. जहां भगवान बुद्ध ने पूरे विश्व को विश्व शांति का संदेश पूरी दुनियां को दिया था. आज भी बौद्ध तीर्थ यात्री प्रथम दृष्या इस पर्वत पर पहुंच कर भगवान बुद्ध कि पूजा अर्चना करते हैं. कालचक्र पूजा में शामिल होने के पूर्व राजगीर में महायायान बौद्ध अनुयायियों का जत्था रोजाना पहुंच रही है, जो बौद्ध गया जाने से पूर्व राजगीर दर्शन को बेहत पवित्र मानते हैं.
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