पान प्रोसेसिंग के दो यूिनट हुए बेकार
Updated at : 14 Dec 2016 4:39 AM (IST)
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लापरवाही: नालंदा के 15 गांवों में होती है मगही पान की खेती नालंदा के अलावा आसपास के जिलों नवादा, गया व औरंगाबाद के करीब 54 गांवों में मगही पान की खेती होती है. इसी बात को ध्यान में रखते हुए नालंदा के इस्लामपुर में मगही पान अनुसंधान केंद्र की स्थापना की गयी है. बिहारशरीफ : […]
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लापरवाही: नालंदा के 15 गांवों में होती है मगही पान की खेती
नालंदा के अलावा आसपास के जिलों नवादा, गया व औरंगाबाद के करीब 54 गांवों में मगही पान की खेती होती है. इसी बात को ध्यान में रखते हुए नालंदा के इस्लामपुर में मगही पान अनुसंधान केंद्र की स्थापना की गयी है.
बिहारशरीफ : मगही पान अनुसंधान केंद्र इस्लामपुर में मगही पान उत्पाद किसानों को आर्थिक लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से दो प्रोसेसिंग यूनिट की स्थापना की गयी है. मगर इसका लाभ किसान नहीं उठा पा रहे हैं. मगही पान प्रोसेसिंग करने के बाद वह बनारसी पान कहलाता है. बनारसी पान की कीमत अधिक होने के कारण किसानों की आय दोगुनी हो जाती है. मगर पान कृषक इसका लाभ नहीं उठा पा रहे हैं. इसका कारण यह है कि नालंदा के मगही पान की सप्लाई बनारस में होती है. किसानों द्वारा मगही पान की प्रोसेसिंग करा लिये जाने के बाद बनारस के खरीदार इस पान को नहीं लेते हैं. बनारस के खरीदारों को इस बात का डर सता रहा है
कि पान कृषकों द्वारा प्रोसेसिंग करा लिये जाने से उनका प्रोसेसिंग का धंधा चौपट हो जायेगा. इस भय से प्रोसेसिंग किये गये मगही पान को बनारस के खरीदार खरीदने में आनाकानी कर करते हैं. एक अन्य वजह यह है कि मगही पान अनुसंधान केंद्र से पान उत्पादक किसानों का गांव काफी दूर पड़ता है. जिस कारण पान को लाने व ले जाने में किसानों को काफी खर्च हो जाता है. इस सब कारणों से पान कृषक मगही पान की प्रोसेसिंग नहीं करा पा रहे हैं. इसके कारण पान अनुसंधान केंद्र का पान प्रोसेसिंग की दो यूनिट बेकार पड़ी है.
पान के शौकीनों में आयी कमी
पान खाने के शौकीनों की संख्या दिनों दिन कम होती जा रही है. पुराने पान के कुछ शौकीन हैं, जो आज भी इसका लुफ्त उठा रहे हैं. मगही पान और बनारसी पान की ब्रांडिंग 1978 में आयी हिंदी फिल्म डॉन के एक गाने से खूब हुई थी. उस गाने में अमिताब बच्चन ने गाना गया था. खाइके पान बनारस वाला, खुल जाये बंद अकल का ताला. कई सालों तक यह गाना लोगों की जुबान पर रही थी. पान खाने के कुछ औषधीय महत्व है. जिसे लोग अब भूलते जा रहे हैं. आज की युवा पीढ़ी पान खाने से परहेज करने लगी है.
कत्था कसैली हो गयी महंगी
पान में प्रयुक्त किया जाने वाला कत्था, कसैली, इस्त्र व सुर्ती सभी महंगे हो गये हैं. यहां तक पान का पत्ता भी महंगा हो गया है. स्थानीय नगर निगम के पास करीब 15 वर्षों से पान की दुकान चला रहे दिनेश चतुर्वेदी बताते हैं कि अब पान के शौकीनों की संख्या कम हो गयी है. धंधे को जिंदा रखना मुश्किल हो रहा है.
नालंदा के 15 गांवों में होती है पान की खेती नालंदा के करीब 15 गांवों में मगही पान की खेती होती है. जिले के जिन गांवों में मगही पान की खेती होती है. उनमें बौरीसराय, बौरीडीह, मैदीकला, बौरीडीह दुर्गा स्थान, मदूत, दौरा, दुहई खुअई, नोनही, अर्जुन, सरथुआ आदि गांव शामिल हैं. नवादा जिले के ढेवरी, तुंगी, हड़िया, दोला छतरवार सहित 18 गांव हैं. गया जिले के आमस, मिठापुर, पीपरा, वजीरगंज, हरसिंगारा सहित करीब छह गांवों में मगही पान की खेती होती है.
क्या कहते हैं अधिकारी:-
मगही पान की खेती नालंदा के अलावा नवादा, गया व औरंगाबाद जिले के करीब 54 गांवों में खेती की जाती है. इन किसानों को आर्थिक रूप से मदद प्रदान करने के उद्देश्य से इस्लामपुर में अनुसंधान केंद्र का निर्माण किया गया था. मगही पान के पत्ते को प्रोसेसिंग कर उसे बनारसी पत्ता बनाने के लिए केंद्र में दो प्रोसेसिंग यूनिट लगायी गयी है. मगर दोनों यूनिट बंद पड़ी है. किसान मगही पान को बनारसी बनाने के लिए नहीं आ पा रहे हैं.
प्रभात कुमार, वैज्ञानिक, मगही पान अनुसंधान केंद्र, इस्लामपुर (नालंदा)
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