अंखफाेड़वा कांड : 28 साल बाद मिला उपेंद्र को न्याय
Updated at : 30 Jun 2016 7:02 AM (IST)
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दो आरोपितों को आजीवन कारावास की सजा बिहारशरीफ : जिला न्यायालय के षष्टम एडीजे इशरतउल्ला ने आंखों में तेजाब डाल व चाकू घोंप कर निकाल देने वाले ब्रजदेव सिंह, रतन सिंह व तनिक सिंह की सजा का एलान कर दिया. रतन व तनिक सिंह को आजीवन कारावास व एक लाख रुपये जुर्माना तथा ब्रजदेव सिंह […]
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दो आरोपितों को आजीवन कारावास की सजा
बिहारशरीफ : जिला न्यायालय के षष्टम एडीजे इशरतउल्ला ने आंखों में तेजाब डाल व चाकू घोंप कर निकाल देने वाले ब्रजदेव सिंह, रतन सिंह व तनिक सिंह की सजा का एलान कर दिया. रतन व तनिक सिंह को आजीवन कारावास व एक लाख रुपये जुर्माना तथा ब्रजदेव सिंह को 10 वर्ष की कैद के साथ 10 हजार रुपये जुर्माना अदा करने की सजा दी गयी. जुर्माने की राशि अदा न करने पर एक वर्ष व 3 माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा.
सजा निर्धारण पर अभियोजन पक्ष से एपीपी रामवृक्ष प्रसाद ने बहस की थी. इस मामले के अन्य सात आरोपितों सुमंत सिंह, प्रकाश सिंह, रामवृक्ष सिंह, अरविंद सिंह, यदु सिंह, नागेश्वर पांडेय और मणी पांडेय को साक्ष्य के अभाव में रिहा किया जा चुका है. सभी आरोपित व पीड़ित अस्थावां थाना क्षेत्र के जीयर ग्राम वासी हैं.
29 अगस्त 1989 की शाम 3 बजे पीड़ित उपेंद्र सिंह खेत से वापस घर आ रहा था. इसी क्रम में आरोपितों ने पकड़ लिया और मारते पीटते ब्रजदेव सिंह के दालान पर लाये. ब्रजदेव सिंह ने मार कर फेंक देने का आदेश दिया. पीड़ित को बांध कर आरोपितों ने उसकी दोनों आंखों में तेजाब डाल दिया जिससे आंख सहित चेहरा जल गया. इसके बाद चाकू घोंप दोनों आंखों को निर्ममता से निकाल दिया. पीड़ित 28 वर्षों से इस घटना की वजह से अंधी जिंदगी बसर करने को विवश है. पीड़ित को कोर्ट से 28 वर्षों बाद न्याय मिला. घटना का कारण पीड़ित का खराब चरित्र का होना बताया जाता है तो दूसरी ओर इसे अंजाम देने का कारण बच्चों का झगड़ा कहा जाता है.
घटना के बाद सुशीला बनी है उपेन्द्र सिंह के जीवन की नैया की खेवनहार. उपेंद्र की जिंदगी अब पूरी तरह से उनकी पत्नी सुशीला के सहारे चल रही है. पत्नी ने घर पर एक भैंस पाल रखी हैं. उपेंद्र के चार पुत्र हैं. चारों बाहर रहकर जो कमाते हैं उसी में से माता-पिता के लिए भी भेजते हैं़ इसी से जीवन चल रहा है. चार में से तीन पुत्र विवाहित हैं. उपेन्द्र सिंह के चार भाई हैं.
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