पांच वाटर टावरों से नहीं होती पानी की सप्लाइ
Updated at : 10 Jun 2016 1:13 AM (IST)
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परेशानी . लाखों खर्च करने के बावजूद शहरवासियों को नहीं मिल रहा फायदा शहरवासियों को पीने का स्वच्छ पानी मुहैया कराने के लिए लाखों रुपये खर्च कर बनाये गये पांच वाटर टावरों में से एक से भी पानी की सप्लाइ नहीं हुई है. पानी की सप्लाइ नहीं होने से इसके बनाये जाने का क्या फायदा […]
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परेशानी . लाखों खर्च करने के बावजूद शहरवासियों को नहीं मिल रहा फायदा
शहरवासियों को पीने का स्वच्छ पानी मुहैया कराने के लिए लाखों रुपये खर्च कर बनाये गये पांच वाटर टावरों में से एक से भी पानी की सप्लाइ नहीं हुई है. पानी की सप्लाइ नहीं होने से इसके बनाये जाने का क्या फायदा है. इसलिए यह शोभा की वस्तु बन कर रहे गये हैं.
बिहारशरीफ : शहरवासियों को पीने का स्वच्छ पानी मुहैया कराने के लिए लाखों रुपये खर्च कर बनाये गये पांच वाटर टावरों में से एक से भी पानी की सप्लाइ नहीं हुई है. करीब एक लाख लीटर की क्षमता वाले इन वाटर टावरों का निर्माण कई वर्ष पूर्व हुआ है, मगर आज तक इसके चालू नहीं होने से शहरवासियों के लिए ये टावर शोभा की वस्तु बन कर रह गये हैं. इनमें सें कुछ वाटर टावरों से पानी का रिसाव होता, है तो कुछ में सबकुछ ठीक होने के बावजूद उसे चालू करने का प्रयास नहीं किया गया. लाखों खर्च कर वाटर टावर तो बना दिया गया, मगर जब इससे पानी की सप्लाइ ही नहीं होती है़
वाटर टावर का क्या है उपयोग :घरों में समान रूप से पानी की सप्लाइ के उद्देश्य से वाटर टावर का निर्माण कराया गया है.
इनमें पानी स्टोर होने पर जरूरत के हिसाब से इलाकों को पानी की सप्लाइ की जाती है. बोरिंग बंद होने की स्थिति में भी घरों को वाटर टावर के जरिये पानी की सप्लाइ से सभी इलाकों में पानी का दबाव एक समान होता है.
मेन लाइन में सफाई का पाइप : इन वाटर टावरों को पानी की आपूर्ति करने वाली मेन पाइप लाइन में ही सप्लाइ का पाइप जोड़ लेने से यह सभी वाटर टावर खाली पड़े हैं. मेन लाइन में सप्लाइ का पाइप जोड़ लेने और उसमें मोटर लगा कर पानी खींचने के कारण इन वाटर टावरों में पानी चढ़ाने की व्यवस्था है. उससे कहीं अधिक शक्ति के मोटर पाइपों में लगे रहने से पानी वाटर टावरों में नहीं चढ़ पाता है.
शहर में कहां-कहां हैं वाटर टावर
शहर में विभिन्न क्षमता के कई वाटर टावर हैं. इनमें एक लाख गैलन, 50 हजार गैलन व 30 हजार गैनल की क्षमता वाले वाटर टावर हैं. स्थानीय नाला रोड, हॉस्पिटल, सोहसराय, सहोखर, मोगलकुआं, रामचंद्रपुर, शेखाना, मोगलकुआं, गढ़पर, मंगला कोल्ड स्टोरेज, बबुरबन्ना, ब्लॉक कॉलोनी में वाटर टावर हैं. इन वाटर टावरों को लोगों को पीने का पानी उपलब्ध कराने के उद्देश्य से बनाया गया, लेकिन वह शोभा की वस्तु बनकर रह गया है़
कर्मियों की कमी भी है इसमें बाधा
कई वाटर टावर सबकुछ ठीक-ठाक रहने के बावजूद कर्मियों की कमी की वजह से लोगों के बीच पानी नहीं पहुंच रहा है. कर्मियों की कमी की वजह से वाटर टावर में पानी जमा करने के बजाय सीधे सप्लाइ कर दी जाती है. इस कारण से लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है़ लेकिन अधिकारियों को इस ओर कोई ध्यान नहीं जा रहा है़ पांच वाटर टावर बनने के बाद भी चालू नहीं होने से लोगाें को काफी परेशानी झेलनी पड़ रही है.
क्या कहते हैं अधिकारी
शहर के नवनिर्मित वाटर टावरों की मेन पाइप लाइन में घरों को सप्लाइ किये जाने वाले पानी का पाइप जोड़ लेने से शहर के कई वाटर टावर अब तक चालू नहीं हुए हैं. जितनी शक्ति के मोटर का वाटर टावर में पानी चढ़ने के लिए लगाया गया है, उससे कहीं अधिक शक्ति के मोटर सप्लाइ पाइप में लगे होने से यह स्थिति पैदा हुई है. शहरी क्षेत्र में जलापूर्ति का कनेक्शन नगर निगम द्वारा दिया जाता है. इसमें पीएचइडी की कोई भूमिका नहीं है.
राजेश कुमार सिन्हा
कार्यपालक अभियंता, बिहारशरीफ
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