जल स्तर गिरने का सिलसिला रुका

Updated at : 01 Jun 2016 5:28 AM (IST)
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जल स्तर गिरने का सिलसिला रुका

बारिश से राहत . जिले का एवरेज भू-गर्भीय जल स्तर पहुंच गया था 52 फुट तक जिले में भू-गर्भीय जल स्तर के खिसकने से मचा हाहाकार फिलहाल थोड़ी-सी बारिश से ही थमता नजर आ रहा है.हर सप्ताह की जांच में भी भू-गर्भीय जल स्तर खिसकता ही जा रहा था. इसका दुष्परिणाम यह हुआ था कि […]

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बारिश से राहत . जिले का एवरेज भू-गर्भीय जल स्तर पहुंच गया था 52 फुट तक

जिले में भू-गर्भीय जल स्तर के खिसकने से मचा हाहाकार फिलहाल थोड़ी-सी बारिश से ही थमता नजर आ रहा है.हर सप्ताह की जांच में भी भू-गर्भीय जल स्तर खिसकता ही जा रहा था. इसका दुष्परिणाम यह हुआ था कि जिले के कई जलापूर्ति केंद्रों ने पानी देना बंद कर दिया था.जांच में अब जो खुलासा हुआ है, वह जिलेवासियोें को राहत देने वाली है. 20 मई के बाद हुई जांच में यह बात सामने आयी है कि अब जल स्तर का गिरना रुक गया है.
बिहारशरीफ : जिले में भू-गर्भीय जल स्तर के खिसकने से मचा हाहाकार फिलहाल थोड़ी-सी बारिश से ही थमता नजर आ रहा है. 2016 में मार्च-अप्रैल माह में ही जिले में भू-गर्भीय जल स्तर तेजी से खिसकना शुरू हो गया था. कहीं 10 फुट तक, तो कहीं पांच फुट तक भू-गर्भीय जल स्तर नीचे खिसक गया था.
इसके अलावा हर सप्ताह की जांच में भी भू-गर्भीय जल स्तर खिसकता ही जा रहा था. इसका दुष्परिणाम यह हुआ था कि जिले के कई जलापूर्ति केंद्रों ने पानी देना बंद कर दिया था. कई चापाकल फेल हो गये थे. यहां तक कि विश्व प्रसिद्ध पर्यटक स्थल राजगीर के कई गरम कुंडों से पानी गिरना बंद हो गया था.
इसके कारण जिला स्तर से लेकर राज्य स्तर पर खूब हाय-तौबा मचा हुआ था. लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग ने भू-गर्भीय जल स्तर की मॉनिटरिंग के लिए प्रत्येक सप्ताह भू-गर्भीय जल स्तर की जांच की व्यवस्था की थी. प्रत्येक प्रखंड में इसके लिए जांच टीम बनायी गयी. टीम के सदस्य सभी प्रखंडों के पांच-पांच स्थानों पर भू-गर्भीय जल स्तर की जांच प्रति सप्ताह कर रहे थे. भू-गर्भीय जल स्तर की जांच का सिलसिला अब भी जारी है. जांच में अब जो खुलासा हुआ है, वह जिलेवासियोें को थोड़ी राहत देने वाली है.
20 मई के बाद हुई जांच में यह बात सामने आयी है कि अब जल स्तर के खिसकने का सिलसिला थम-सा गया है. भू-गर्भीय जल स्तर पर यह प्रभाव मई माह में हुई बारिश के कारण माना जा रहा है. पीएचइडी की इस जांच रिपोर्ट के बाद जिलावासियों ने राहत की सांस ली है. जल स्तर के खिसकने से जहां पेयजल का संकट गहराता जा रहा था, वहीं सिंचाई की समस्या भी पैदा हो गयी थी. चापाकल, बोरिंग, पेयजलापूर्ति केंद्र के फेल होने से जिला प्रशासन के साथ-साथ आमलोग परेशान दिख रहे थे. लोग उम्मीद जता रहे हैं कि आगे बारिश होने पर भू-गर्भीय जल स्तर ऊपर आने लगेगा.
राजगीर के कई गरम कुडों से पानी गिरना हो गया था बंद
जिलावासियों को परेशानियों से मिली थोड़ी राहत
क्या कहते हैं अधिकारी
मार्च-अप्रैल में भू-गर्भीय जल स्तर के लगातार खिसकने से विकट स्थिति पैदा होती जा रही थी. प्रत्येक सप्ताह प्रखंडों में भू-गर्भीय जल स्तर की जांच में जल स्तर के गिरने का सिलसिला जारी था. जिले में एवरेज भू-गर्भीय जलस्तर के खिसकने का सिलसिला थम-सा गया है. उम्मीद है कि आगे की बारिश से भू-गर्भीय जल स्तर ऊपर आना शुरू हो जायेगा. राजगीर के पांडू पोखर को विभाग द्वारा प्रतिदिन 50 हजार लीटर पानी की व्यवस्था फाल्डू से की जा रही है. पानी की इस मात्रा को और बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है.
राजेश प्रसाद सिन्हा, कार्यपालक अभियंता, पीएचइडी, बिहारशरीफ
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