रैपिड रिस्पांस टीम सक्रिय रहे

Updated at : 14 May 2016 8:05 AM (IST)
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रैपिड रिस्पांस टीम सक्रिय रहे

एइएस के इलाज के लिए जिले के चार डॉक्टरों ने सीखे गुर सरकार व विभाग की योजना है कि बच्चों को इस बीमारी से पूरी तरह से रक्षा करने की. पीएचसी स्तर पर के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी अपने अधीनस्थ एएनएम ,आशा व आंगनबाड़ी सेविकाओं को भी मासिक बैठक में बीमारी से बचाव व लक्षण की […]

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एइएस के इलाज के लिए जिले के चार डॉक्टरों ने सीखे गुर
सरकार व विभाग की योजना है कि बच्चों को इस बीमारी से पूरी तरह से रक्षा करने की. पीएचसी स्तर पर के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी अपने अधीनस्थ एएनएम ,आशा व आंगनबाड़ी सेविकाओं को भी मासिक बैठक में बीमारी से बचाव व लक्षण की जानकारी देकर ट्रेंड करेंगे.
बिहारशरीफ. बच्चों में होने वाली एइएस व जेइ बीमारियों का बेहतर चिकित्सा उपलब्ध कराने के गुर जिले के चार चिकित्सकों ने पटना में सीखे हैं. इन चार चिकित्सकों ने पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल के शिशु वार्ड में राज्यस्तरीय प्रशिक्षण प्राप्त किया है. इसका मुख्य उद्देश्य यह है कि एइएस से प्रभावित बच्चों को सुलभ तरीके से इलाज उपलब्ध कराना. उक्त चिकित्सकों ने एक सप्ताह से अधिक पीएमसीएच में इलाज के बारीकी से गुर सीखे हैं.
जिले के चार अस्पतालों के डॉक्टर हुए हैं ट्रेंड
एइएस(एक्यूट इंसेफलाइटिस) बीमारी प्राय: बच्चों में ही होती है. इस बीमारी के इलाज के लिए जिले के चार अस्पतालों के चिकित्सक पटना में ट्रेंड किये गये हैं. जिसमें से सदर प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र बिहारशरीफ के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डाॅ राकेश कुमार, हिलसा अनुमंडलीय अस्पताल के चिकित्सक डाॅ गिरधारी लाल,हरनौत प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र के चिकित्सक डाॅ रामेंद्र कुमार व नगरनौसा पीएचसी के राजेन्द्र कुमार शामिल हैं. उक्त चिकित्सा पदाधिकारी अब जिले के अन्य चिकित्सकों को इस बीमारी से बचाव ,लक्षण ,इलाज आदि के बारे में ट्रेनिंग देंगे.
ताकि पीएचसी स्तर पर चिकित्सक ट्रेंड होकर एइएस से पीडि़त बच्चों का ससमय उपचार कर सकें. सरकार व विभाग की योजना है कि बच्चों को इस बीमारी से पूरी तरह से रक्षा करने की. पीएचसी स्तर पर के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी अपने अधीनस्थ एएनएम ,आशा व आंगनबाड़ी सेविकाओं को भी मासिक बैठक में बीमारी से बचाव व लक्षण की जानकारी देकर ट्रेंड करेंगे. ताकि गांव-कस्बों में जाकर उक्त कर्मी बच्चों की जांच पड़ताल कर सकें और लक्षण मिलने पर संबंधित बच्चों को इलाज के लिए अस्पताल भेजने का काम कर सकेंगी.
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