अच्छे वक्ता के लिए बनें अच्छा श्रोता : मोरारी बापू
Updated at : 26 Mar 2016 6:56 AM (IST)
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त्याग और तप का जो अभियान न करे वहीं भिक्षु व साधु हैं राजगीर : राजगीर के वीरायतन में नौ दिवसीय राम कथा के सातवें दिन प्रसिद्ध कथा वाचक मोरारी बापू ने कहा कि अच्छे वक्ता के लिए अच्छा श्रोता होना जरूरी है,जो दूसरे की बातों को सुन नहीं सकता है. वह दूसरों को कतई […]
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त्याग और तप का जो अभियान न करे वहीं भिक्षु व साधु हैं
राजगीर : राजगीर के वीरायतन में नौ दिवसीय राम कथा के सातवें दिन प्रसिद्ध कथा वाचक मोरारी बापू ने कहा कि अच्छे वक्ता के लिए अच्छा श्रोता होना जरूरी है,जो दूसरे की बातों को सुन नहीं सकता है. वह दूसरों को कतई नहीं सुना सकता. उन्होंने कहा कि भिक्षु व संत को अपने तप और त्याग पर कभी अभिमान या गर्व नहीं करना चाहिए. उन्हें भगवान महावीर स्वामी की तरह तरल व सरल होना चाहिए.
सदा सत्य की राह पर चलना चाहिए. सत्य बोलें पर कड़वा मत बोलो. लोग कहते हैं कि सत्य कड़वा होता है, मगर ऐसा नहीं है. सत्य को सत्य की भाषा और सरलता से प्रस्तुत किया जाये. उन्होंने कहा कि फलाफल तो प्रकृति और प्रभु की देन है. बुरी आदतों का परित्याग करने पर बल देते हुए उन्होंने कहा कि शराब को सेवन करना एक बुरी लत और आदत हैं. इसका परित्याग अवश्य करना चाहिए. झूठ कभी मत बोलो. झूठ सभी बुरी आदतों व लत से भी खराब और पीड़ादायक है. प्रभु श्री राम तो अन्नरयामी हैं, वो सभी जगह और सदैव हैं. सबों की मन की बात जानते हैं.
उन्हें तो झूठी और अडंबर से पीड़ा होती है. मोरारी बापू ने कहा कि इनसान की आदतों से, संगत से तो दानव भी मानव बन जाते हैं. श्री राम की भक्ति में वाह शक्ति हैं, प्रभु श्री राम का जाप और कथा सुनने तो स्वयं देवों के देव महादेव भी जाया करते थे. कुम्बज ऋषि के आश्रम में श्री राम कथा के स्त्रोता बन गये थे. महादेव और माता पार्वती कहते हैं कि कोई रूप बदल सकता है, मगर स्वरूप नहीं. मोरारी बापू ने कहा कि जब कुम्बज ऋषि के आश्रम में श्री राम कथा सुन कर महादेव से पार्वती ने पूछा कि वो कौन है, जिनकी कथा आप सुनने जाते हैं. प्रभु ने मन में एहसास किया कि नारी का स्वभाव ही ऐसा है. संकोच और संदिग्ध सोच रहता है पर महादेव ने कहा कि वो प्रभु श्री राम है, जिनकी कथा सुनने गया था. इसके बाद वे दोनों श्री राम कथा सुनने के लिए चल पड़े. कुछ दूर जाने के बाद प्रभु श्री राम, अनुज लक्षमण माते सीता के हरण के उपरांत माता सीता की तलाश में तीर धनुष के साथ विचरण करते मिले. महादेव तो अंतरयामी हैं वो सब कुछ जानते थे. महादेव ने कहा प्रणाम प्रभु और फिर आगे बढ़ जाते हैं.
इस पर माता पार्वती ने कहा वो कौन थे जिन्हें आपने प्रणाम किया. महादेव ने जब बताया कि वे प्रभु श्री राम व उनके अनुज लक्ष्मण थे. इस पर माता सीता को विश्वास नहीं हुआ और उन्होंे परीक्षा लेने की ठानी. माता पार्वती सीता का रूप धारन कर प्रभु श्री राम के आगे आगे विचरण करने लगी. इस पर श्री राम ने कहा कि हमारे प्रभु शिव शंकर कहां हैं. आप अकेली जंगल में क्या कर रही है. इस पर पार्वती आश्चर्य हो गई. उन्हें महादेव की वाणी याद आने लगी. इसके बाद पार्वती महादेव के पास लौट आयी. महादेव ने पार्वती ने पूछा कि आपने परीक्षा ले ली. तब पार्वती ने कहा हां.
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