मुहिम. प्रोजेक्ट जल संचय पर हो रहा काम नहरों की होगी उड़ाही
Updated at : 22 Mar 2016 12:24 AM (IST)
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मिशन मोड के तहत मई माह तक होगा कार्य पूरा सैकड़ों एकड़ फसलों को होगा फायदा, विश्व वाटर डे पर संचय करने की ले शपथ बिहारशरीफ : जल संचय के लिए तीन तरह के प्रोजेक्ट बनायेा गया है. इन तीनों प्रोजेक्ट पर काम होने से जिले में वाटर रिचार्ज होने के साथ ही जल संकट […]
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मिशन मोड के तहत मई माह तक होगा कार्य पूरा
सैकड़ों एकड़ फसलों को होगा फायदा, विश्व वाटर डे पर संचय करने की ले शपथ
बिहारशरीफ : जल संचय के लिए तीन तरह के प्रोजेक्ट बनायेा गया है. इन तीनों प्रोजेक्ट पर काम होने से जिले में वाटर रिचार्ज होने के साथ ही जल संकट की समस्या का समाधान करने में मील का पत्थर साबित होगा. योजना के बारे जानकारी देते हुए डीडीसी कंदन कुमार ने बताया कि सुखे से राहत दिलाये जाने व बरसात के पानी को संरक्षित करने के लिए प्रोेजेक्ट बनाया गया है. मिशन मोड में धरातल पर उतारा जा रहा हैं. विकास अभिकरण के इंजीनियरों से जिले के नदी, पैन ,नहरों व चेक डैम पर काम किया जा रहा है. अगले चरण में हाउस पंप के जरिये वर्षा के जल को संरक्षित किये जायेंगेे.
मिशन मोड में कराये जायेंगे काम:जिले में जल संरक्षण के लिए चेक डैम की योजना की सोच डीडीसी की है मिशन मोड में जिले में कार्य कराये जा रहे है. बहुउपयोगी होने के साथ ही यह तरह से फायदेमंद होगा. हल्की बारिश में जिले की नदियों में जहां उफान आने से फसलों को नुकसान उठाना पड़ता है. वहीं नदी के पानी का ठहराव नहीं होने से सुखाड़ का सामना लोगों को उठाना पड़ता है. नदी आहरों व नहरों के सुख जाने से फसल भी नष्ट हो जाती है. वही जमीनी जल स्तर भी नीचे चला जाता है.
एक अरब 48 लाख लीटर जल होगा संचय:
इस योजना के कई फायदे होगेे चेक डैम बनने से बर्षा के पानी का कई माह तक संरक्षित रहेगा. नदियों में चेक डैम बनने से उसके आस-पास के खेतों का पटवन भी हो सकेंगा. इतना ही नहीं आस-आस क्षेत्र के जलस्तर भी बरकरार रहेगा. जिले के 537 पैन आहरों की खुदाई व उड़ाही होने से जिले में करीब 438 किलोमीटर पैनों की उड़ाही हो जायेगी.
सात लाख मजदूरों को मिलगा काम, रुकेगा पलायन:
मनरेगा से जिले में चेक डैम बनाये जायेंगे. मनरेगा से काम होने से मजदूरों को काम मिल जायेगा वहीं योजना के रुपये का इस्तेमाल एक नेक काम में लगेगा. मनरेगा से वैसे भी कच्चा काम ज्यादा कराने का प्रावधान है. पानी ठहराव के लिए नदियों की मिटृटी के कटाव मिटृटी भराई से लेकर सभी कार्य मजदूरों से ही कराये जायेंगे. इस योजना से मजदूरों को भी सहजता से काम मिल जायेगा.
दोनों पोजेक्ट पर काम के दौरान सात लाख मानव दिवस सृजित होने से उतने ही मजदूरों को काम मिल सकेगा.
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