बिहारशरीफ : खेती के टिप्स जानने कृषि वैज्ञानिक पहुंचे नालंदा
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 21 Aug 2018 7:00 AM
बिहारशरीफ : कृषि विश्वविद्यालय सबौर, भागलपुर में समर हाईस्कूल में हिस्सा ले रहे देश भर के कृषि वैज्ञानिक सोमवार को नालंदा के सोहडीह गांव का भ्रमण किया. कृषि वैज्ञानिकों का नालंदा आगमन का उद्देश्य कृषि को आमदनी का जरिया बनाने व उसे उद्योग के रूप में विकसित करने के लिये इस क्षेत्र के चुनिंदा किसानों […]
बिहारशरीफ : कृषि विश्वविद्यालय सबौर, भागलपुर में समर हाईस्कूल में हिस्सा ले रहे देश भर के कृषि वैज्ञानिक सोमवार को नालंदा के सोहडीह गांव का भ्रमण किया.
कृषि वैज्ञानिकों का नालंदा आगमन का उद्देश्य कृषि को आमदनी का जरिया बनाने व उसे उद्योग के रूप में विकसित करने के लिये इस क्षेत्र के चुनिंदा किसानों से मिलकर उनके कार्य की जानकारी प्राप्त करना था. किसानों से प्राप्त जानकारी व अनुभव को अपने-अपने राज्यों में कृषि विकास के लिये उपयोग करना था. इसी उद्देश्य से समर स्कूल के 12 कृषि वैज्ञानिकों का दल सोमवार को सोहडीह गांव पहुंचकर किसान राकेश कुमार से भेंट की तथा खेतों में जाकर सब्जी की खेती को देखा. टीम के सदस्यों ने विभिन्न प्रकार की सब्जी की खेती, बीज का प्रबंधन, उत्पादन व मार्केटिंग की व्यवस्था के साथ ही जैविक सब्जी की खेती की भी जानकारी प्राप्त की. इस दल में सात राज्यों के कृषि वैज्ञानिक शामिल थे, इनमें तमिलनाडु, उड़ीसा, केरल, उत्तरप्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र व कर्नाटक के शामिल हैं.
टीम के सदस्यों ने सोहडीह के किसान राकेश कुमार से सब्जी उत्पादन के क्षेत्र में इतना आगे बढ़ने, जैविक सब्जी की खेती करने, बीज का प्रयोग करने आदि के बारे में विस्तृत रूप से जानकारी प्राप्त की. किसान राकेश कुमार ने टीम के सदस्यों को बताया कि हरेक तीन साल में हर फसल का बीज चेंज कर देते हैं. इससे उत्पादन में कमी नहीं हो पाती है.
राकेश ने बताया कि आलू फसल में एक ही बीमारी जटिल है, वह है झूलसा रोग. यह रोग एक ही बीज का बार-बार प्रयोग करने से होता है. उन्होंने बतया कि भिंडी, गोभी, सिहत अन्य सब्जियों का बीज हरेक तीन साल पर बदल दिया जाता है. बीज चेंज करने के पूर्व उस वेरायटी के बीज को कुछ खेतों में लगाकर टेस्ट किया जाता है. फसल का उत्पादन ठीक-ठाक होने पर उसका इस्तेमाल किया जाता है.
कृषि वैज्ञानिकों की टीम किसान राकेश कुमार एवं वहां के अन्य किसानों के काम करने के तरीके से काफी प्रभावित हुई. बड़े स्तर पर जैविक सब्जी की खेती से टीम के सदस्य काफी प्रभावित हुए. सब्जी की मार्केटिंग लीकेज से भी टीम के सदस्य काफी प्रभावित हुए. इस कार्यक्रम का संचालन डायरेक्टर प्रसार शिक्षा डॉ आर के सोहाने कर रहे हैं. टीम में डॉ आलोक भारती, डॉ धनंजय सिंह, डॉ योगेन्द्र कुमार सिंह, डॉ अनुराधा कुमारी. डॉ एनके पांडेय, डॉ एस के पाटिल, डॉ के भास्करन, डॉ शैलेंद्र सिंह, डॉ आरती मिश्रा, डॉ. त्रिविजय व ई मनोज कुमार शामिल थे.
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