किसानों को व्यापारियों से नहीं मिल रहा सब्जी का लागत मूल्य

Updated at : 11 Jun 2018 6:11 AM (IST)
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किसानों को व्यापारियों से नहीं मिल रहा सब्जी का लागत मूल्य

सड़क पर सब्जी फेंके जाने से तीन घंटे तक यातायात ठप किसानों से एक से दो रुपये प्रति किलो भी कद‍्दू लेने को तैयार नहीं हो रहे व्यापारी नूरसराय (नालंदा) : रविवार की सुबह नूरसराय की सब्जी मंडी में हर रोज की तरह प्रखंड झेत्र के किसान कद्दू सब्जी बेचने आये, लेकिन व्यापारी कद्दू का […]

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सड़क पर सब्जी फेंके जाने से तीन घंटे तक यातायात ठप

किसानों से एक से दो रुपये प्रति किलो भी कद‍्दू लेने को तैयार नहीं हो रहे व्यापारी
नूरसराय (नालंदा) : रविवार की सुबह नूरसराय की सब्जी मंडी में हर रोज की तरह प्रखंड झेत्र के किसान कद्दू सब्जी बेचने आये, लेकिन व्यापारी कद्दू का लागत मूल्य भी नहीं दे रहे थे, जिससे किसान काफी निराश और हताश होकर क्रोधित हो गये. परिणामस्वरूप गुस्से में आकर सब्जी को नहीं बिकता देख सभी ने कद्दुओं को बिहार पटना मुख्य मार्ग पर फेंकना शुरू कर दिया. देखते-देखते करीब दो-तीन सौ मन कद्दू रोड पर जमा हो गया और मार्ग अवरुद्ध हो गया. गाड़ियों का परिचालन ठप हो गया और सभी किसानों ने सड़क पर आकर गुस्से में हल्ला करना शुरू कर दिया.
सड़क जाम की खबर सुनकर मौके पर प्रखंड विकास पदाधिकारी रंजीत कुमार, थानाध्यक्ष सुनील कुमार निर्झर, मुखिया रामकृष्ण कुमार पहुंचे और किसानों को समझा-बुझाकर रोड पर से हटाया और काफी मशक्कत के बाद जेसीबी से रोड पर फेंके गये कद्दू को हटाया गया. लगभग तीन घंटे के बाद पूरी तरह से जाम को हटाया गया. इसी बीच किसान मंटू यादव, राहुल कुमार, योगेंद्र प्रसाद, उमाशंकर प्रसाद, राजेश कुमार, शिशुपाल कुमार ने बताया कि हमलोगों को गांव से बाजार सब्जी लाने में ठेले वालाें को 25 रुपये प्रति गाजा के हिसाब से भाड़ा देना पड़ता है और यहां 20 रुपये गांजा कद्दू लेने को कोई तैयार नहीं है.
बाजार में रोज खाद तेल, बीज का मूल्य लगातार बड़ता जा रहा है. हम किसान काफी मेहनत और जमापूंजी लगाकर सब्जी का उत्पादन करते है, लेकिन हमलोग को इसका लागत मूल्य भी नहीं मिल पा रहा है. अंधना पंचायत के सैदी गांव के प्रगतिशील किसान नागमणि प्रसाद ने कहा कि बीते 10 दिन से किसानों को सब्जी में लागत मूल्य नहीं निकल रहा है. एक रुपया, दो रुपया किलो कद्दू बिक रहा है था, जबकि एक बीघा कद्दू की खेती करने में 15 से 20 हजार रुपये खर्च आता है.
खाद कीटनाशी दवा महंगी हो गयीं हैं. लागत मूल्य भी नहीं निकल रहा है. वहीं जय प्रकाशपुर भेड़िया के प्रगतिशील किसान सच्चिदानंद प्रसाद का कहना है सब्जी उत्पादक किसान भुखमरी के कगार पर हैं. कद्दू ही नहीं और भी सब्जियों का लागत मूल्य नहीं निकल रहा है. किसानों का सरकार को चाहिए की किसान की समस्या सुन सब्जी के मार्केटिंग की व्यवस्था की जाये.
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