‘धम्मा’ के कारण ही भारतीय सभ्यता का हुआ प्रसार : राष्ट्रपति कोविंद

Updated at : 12 Jan 2018 4:31 AM (IST)
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‘धम्मा’ के कारण ही भारतीय सभ्यता का हुआ प्रसार : राष्ट्रपति कोविंद

राजगीर में तीन दिवसीय चौथा अंतरराष्ट्रीय धर्मा-धम्मा सम्मेलन शुरू राजगीर : राजगीर के अंतरराष्ट्रीय कन्वेंशन हॉल में गुरुवार से चौथा अंतरराष्ट्रीय धर्मा-धम्मा सम्मेलन शुरू हो गया. तीन दिवसीय सम्मेलन का उद्घाटन राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने किया. सम्मेलन में राष्ट्रपति ने कहा कि राजगीर कभी मगध साम्राज्य का हिस्सा था. महात्मा बुद्ध मगध साम्राज्य में भ्रमण […]

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राजगीर में तीन दिवसीय चौथा अंतरराष्ट्रीय धर्मा-धम्मा सम्मेलन शुरू

राजगीर : राजगीर के अंतरराष्ट्रीय कन्वेंशन हॉल में गुरुवार से चौथा अंतरराष्ट्रीय धर्मा-धम्मा सम्मेलन शुरू हो गया. तीन दिवसीय सम्मेलन का उद्घाटन राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने किया. सम्मेलन में राष्ट्रपति ने कहा कि राजगीर कभी मगध साम्राज्य का हिस्सा था. महात्मा बुद्ध मगध साम्राज्य में भ्रमण कर जहां विश्राम करते थे, वहां उनके शिष्य और अनुयायी मठों का निर्माण कराते थे, जिन्हें ‘विहार’ कहा जाता है. धर्मा और धम्मा एक ही है. संस्कृत में धर्मा और पाली में धम्मा कहा जाता है. उन्होंने कहा कि धर्मा-धम्मा विभिन्न सभ्यताओं के सामंजस्य का स्रोत रहा है. धर्मा और धम्मा के कारण ही 2500 वर्षों के इतिहास में भारत का दक्षिण और पूर्वी एशियाई देशों के साथ वाणिज्यिक संबंध स्थापित हो सका. इसके साथ ही भारतीय सभ्यताओं के प्रसार का भी स्रोत भी
‘धम्म’ के कारण ही…
बन पाया. आज इसका सबूत है कि दुनिया की आधी से अधिक आबादी महात्मा बुद्ध के शिक्षा से ओत-प्रोत रही है. उन्होंने कहा कि आज इस बात की खुशी है कि आसियान देशों के साथ भारत के डायलॉग के 25वें वर्षगांठ पर 10 राष्ट्राध्यक्ष विशिष्ट अतिथि के रूप में इस गणतंत्र दिवस पर उपस्थित रहेंगे.
श्रीलंका के विदेश मंत्री तिलकमारापाना ने कहा कि श्रीलंका धर्मा-धम्मा से प्रभावित रहा है, क्योंकि श्रीलंका का इतिहास 2500 साल पुराना है, जितना महात्मा बुद्ध का इतिहास है. उन्होंने कहा कि भगवान बुद्ध के 10 सिद्धांतों प्रेम, करुणा, मैत्री, शांति आदि हैं, जिस पर चलकर दुनिया में अमन कायम हो सकती है.
नालंदा अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालय की कुलपति सुनैना सिंह ने अपने स्वागत भाषण में विश्वविद्यालय की उपलब्धियों की विस्तार से चर्चा की. सम्मेलन का शुभारंभ पुलिस बैंड की धुन पर राष्ट्रगान से शुरू हुआ. कुलपति ने राष्ट्रपति को विश्व शांति स्तूप का मोमेंटो और पुष्प गुच्छ देकर स्वागत किया. सम्मेलन में 11 देशों के एक सौ से अधिक डेलिगेट भाग ले रहे हैं. सम्मेलन के उद्घाटन के मौके पर आसियान की सचिव प्रीति शरण, राज्यपाल सत्यपाल मलिक, उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी भी उपस्थित थे. यह सम्मेलन राज्य और सामाजिक व्यवस्था में धर्मा-धम्मा की संस्कृति विषय पर आधारित है.
राजगीर वर्ल्ड हेरिटेज में शामिल हो : सीएम
सम्मेलन में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि जिस तरह से पूरी दुनिया में विभिन्न तरह के विवाद हो रहे हैं, ऐसे में आवश्यक हो गया है कि राजगीर में एक अंतरराष्ट्रीय समाधान केंद्र स्थापित हो, जहां पूरी दुनिया के विभिन्न
राजगीर वर्ल्ड हेरिटेज…
विवादों का समाधान हो सके. इसके लिए राज्य सरकार जमीन देने को तैयार है. मुख्यमंत्री ने कहा कि राजगीर में ढेर सारे पुरातात्विक स्थलों को देखते हुए नालंदा विश्वविद्यालय के खंडहर की तरह तरह राजगीर को भी वर्ल्ड हेरिटेज में शामिल किया जाये. उन्होंने मांग की कि केंद्र सरकार राजगीर में स्टेट हाउस बिल्डप करे. इसके लिए भी राज्य सरकार जमीन रखी हुई है. सीएम ने कहा कि स्टेट हाउस के निर्माण से यहां दुनिया के काफी देशों के राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री आयेंगे. उन्होंने कहा कि धर्मा-धम्मा का संदेश स्पष्ट है कि यह सत्य पर आधारित है. जहां प्रेम, सद्भावना, शांति, समन्वय और सामंजस्य को स्थापित किया जाता है. उन्होंने कहा कि बिहार विभिन्न धर्मों को केंद्र रहा है. श्रीलंका का तो नालंदा से तो विशेष लगाव रहा है. उन्होंने कहा कि धर्मा-धम्मा सम्मेलन से भगवान बुद्ध के संदेशों को पूरी दुनिया में फैलाने का काम हो रहा है.
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