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एसडीओ की फटकार से चैंबर में बेहोश हुआ कर्मचारी, निजी अस्पताल में चल रहा इलाज, डीएम का आदेश मानना पड़ा महंगा

Updated at : 22 Sep 2017 12:14 AM (IST)
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एसडीओ की फटकार से चैंबर में बेहोश हुआ कर्मचारी, निजी अस्पताल में चल रहा इलाज, डीएम का आदेश मानना पड़ा महंगा

बिहारशरीफ : जिलाधिकारी का आदेश मानना मोहन प्रसाद के लिए इतना महंगा पड़ गया कि आज वह जिंदगी के लिए जंग लड़ रहा है. गुरुवार को बिहारशरीफ के अनुमंडल पदाधिकारी ने अपने चैंबर में कार्यालय में पदस्थापित कार्यालय परिचारी मोहन प्रसाद को इतनी जोर से फटकार लगायी कि वह वहीं चैंबर में गिर कर बेहोश […]

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बिहारशरीफ : जिलाधिकारी का आदेश मानना मोहन प्रसाद के लिए इतना महंगा पड़ गया कि आज वह जिंदगी के लिए जंग लड़ रहा है. गुरुवार को बिहारशरीफ के अनुमंडल पदाधिकारी ने अपने चैंबर में कार्यालय में पदस्थापित कार्यालय परिचारी मोहन प्रसाद को इतनी जोर से फटकार लगायी कि वह वहीं चैंबर में गिर कर बेहोश हो गया. फिलहाल मोहन प्रसाद स्थानीय भैंसासुर स्थित एक निजी क्लिनिक में भरती है, जहां हालत चिंताजनक बतायी जा रही है.

एसडीओ कार्यालय में पदस्थापित कार्यालय परिचारी मोहन प्रसाद का कसूर इतना ही था कि वह जिलाधिकारी के लिखित आदेश ज्ञापांक संख्या 944, दिनांक 07-09-2017 के आदेश पर वह आज उपभोक्ता फोरम कार्यालय में अपना योगदान दिया था. बस इसी बात को लेकर मोहन प्रसाद पर एसडीओ आग बबूला हो उठे और कार्यालय परिचारी मोहन प्रसाद को अपने कार्यालय कक्ष में काफी डांट-फटकार लगायी. मोहन प्रसाद आज नवरात्रा पर थे और सुबह से निराहार थे. स्थानीय एक निजी क्लिनिक में भरती मोहन प्रसाद का इलाज चल रहा है.

उनकी पत्नी और उनके पुत्र काफी चिंतित है. जब मोहन प्रसाद से पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली गयी, तो आज नवरात्रा के पहले दिन की एसडीओ द्वारा किये गये उनके साथ अमानवीय व्यवहार ने लोगों को स्तब्ध कर दिया है. मोहन प्रसाद ने कलपते हुए बताया कि उनका इतना ही कसूर था कि वे जिलाधिकारी के आदेश की अवहेलना नहीं करना चाहते थे और आज उपभोक्ता फोरम में पदभार ग्रहण करने की अंतिम तिथि के कारण उन्होंने वहां पदभार ग्रहण कर लिया था.

उन्होंने बताया कि जिस समय एसडीओ उन्हें फटकार लगाने लगे, तो उनका पूरा शरीर कांपने लगा और उनके हृदय में दर्द हो उठा और चेहरे पर काफी पसीना आने लगा और फिर वे अचानक गिर कर बेहोश हो गये. एसडीओ द्वारा इस तरह का व्यवहार आज पहला नहीं है. पूर्व में भी कई लोगों के साथ इसी तरह का व्यवहार अपना चुके हैं. इस मामले में जिलाधिकारी से पूछा गया, तो उन्होंने कहा कि वे इस घटना से अनभिज्ञ है, लेकिन इसकी जांच करायी जायेगी. उन्होंने कहा कि मोहन प्रसाद के साथ ऐसा व्यवहार हुआ है, तो वह गलत है. सरकारी कर्मचारियों में भी इस घटना को लेकर क्षोभ व्याप्त है.

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