नालंदा में बफर जोन का निर्माण कार्य शुरू नहीं

Updated at : 19 Aug 2017 3:39 AM (IST)
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नालंदा में बफर जोन का निर्माण कार्य शुरू नहीं

विश्व धरोहर का दर्जा मिलने के बाद खंडहर के ईदगिर्द बसे ग्रामीणों को विस्थापित होने का डर नालंदा : युनेस्को द्वारा प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय के भग्नवाशेष को विश्व धरोहर का दर्जा प्रदान किया गया है. इससे केवल नालंदावासियों में ही, बल्कि संपूर्ण भारत और दुनिया के बौद्ध देशों में भारी खुशी है. विश्व धरोहर की […]

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विश्व धरोहर का दर्जा मिलने के बाद खंडहर के ईदगिर्द बसे ग्रामीणों को विस्थापित होने का डर

नालंदा : युनेस्को द्वारा प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय के भग्नवाशेष को विश्व धरोहर का दर्जा प्रदान किया गया है. इससे केवल
नालंदावासियों में ही, बल्कि संपूर्ण भारत और दुनिया के बौद्ध देशों में भारी खुशी है. विश्व धरोहर की सूची में शामिल होने के बाद इस स्मारक के ईद-गिर्द बफर जोन का निर्माण होना है. लेकिन यहां अबतक बफर जोन का निर्माण कार्य शुरू नहीं कराया गया है. स्मारक के निकट घर और दुकान बनाकर दशकों से रह रहे लोगों को विस्थापित होने का डर सताने लगा है. प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय के सटे उत्तर बड़गांव और सुरजपुर गांव है. इसके दक्षिण में मुजफ्फरपुर और कपटिया गांव है.
पुरातत्व संग्रहालय के पूरब में सारिलचक गांव है. इतिहासकारों के अनुसार महात्मा बुद्ध के प्रिय शिष्य सारीपुत की यह जन्म स्थली है. आर्केलॉजी के अनुसार स्मारक से 100 मीटर की परिधि में किसी भी प्रकार का निर्माण निषेध है. आर्केलॉजी के इस नियम का कठोरता से सरकार पालन करेगी तो मुजफ्फरपुर, बड़गांव ,कपटिया और सुरजपुर के दर्जनों गृहस्वामी विस्थापित जा सकते हैं. 15 जुलाई 2016 को यूनाइटेड नेशन एजुकेशन साईंटिफिक एंड कल्चर आर्गेनाइजेसन यूनेस्को के डायरेक्टर जेनरल के द्वारा इस विश्व विरासत की सूची में शामिल करने की अधिसूचना जारी की गयी थी. अधिसूचना जारी होने के बाद केंद्र और राज्य सरकार को विश्व धरोहर के निर्धारित मापदंड व शर्तों को पूरा करना चाहिए था. लेकिन एक साल गुजर जाने के बाद भी विश्व धरोहर के निर्धारित मापदंड पूरा करने का कार्य शुरू नहीं हो पाया है.
बताया जा रहा है कि विश्व धरोहर के निर्धारित मापदंड को शीघ्र पूरा नहीं किया गया तो यूनेस्को द्वारा पुर्नमूल्यांकन की स्थिति आ सकती है इससे इनकार भी नहीं किया जा सकता है.
क्या कहते हैं अधिकारी
प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय के भग्नाशेष के ईद-गिर्द चहुंमुखी और बहुमुखी विकास के लिए मास्टर प्लान तैयार किया जा रहा है. शीघ्र ही मास्टर प्लान बनकर तैयार हो जायेगा. प्लान के अनुमोदन के बाद उस पर अमल किया जायेगा़
डॉ एस एम त्यागराजन, जिलाधिकारी, नालंदा.
यह है प्लान
– बफर जोन की सीमा का निर्धारण
-धरोहर विकास के लिए मास्टर प्लान
-बफर जोन के लिए मास्टर प्लान
– उच्च स्तरीय पार्किंग
-स्तरीय शॉपिंग सेंटर
-सैलानियों के लिए आवश्यक संसाधन उपलब्ध करना
-फुटपाथ दुकानदार के लिए वेंडर जोन बनाना
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