नौकरी छोड़ नीली क्रांति में मनोज ने बनायी पहचान

Updated at : 01 Aug 2017 1:57 AM (IST)
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नौकरी छोड़ नीली क्रांति में मनोज ने बनायी पहचान

मछली पालन से सालाना 20 लाख की आमदनी बिहारशरीफ : मनोज को आज इस बात का मलाल नहीं है कि उन्होंने सरकारी नौकरी छोड़ दी है. उन्हें खुशी है कि नालंदा में मछली पालन से जुड़कर आज नीली क्रांति के अगुआ बने हुए हैं. उन्होंने मछली पालन में अपनी पहचान बना कर उस मिथ्या को […]

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मछली पालन से सालाना 20 लाख की आमदनी

बिहारशरीफ : मनोज को आज इस बात का मलाल नहीं है कि उन्होंने सरकारी नौकरी छोड़ दी है. उन्हें खुशी है कि नालंदा में मछली पालन से जुड़कर आज नीली क्रांति के अगुआ बने हुए हैं. उन्होंने मछली पालन में अपनी पहचान बना कर उस मिथ्या को भी तोड़ दिया कि लोग सिर्फ आंध्र की मछली पर निर्भर रहते हैं. आज मछली पालन से मनोज न सिर्फ सालाना बीस लाख की कमायी कर रहे हैं, बल्कि लोगों को ताजी मछलियां भी खिला रहे हैं.
जिले के इस्लामपुर प्रखंड अंतर्गत रतनपुरा गांव के स्नातक डिग्री प्राप्त मनोज कुमार ने बिहार सरकार की नौकरी वर्ष 2006 में छोड़ दी थी. उन्होंने जीविका उपार्जन के लिए मछली पालन को अपनाया. मछली पालन में सालाना करीब 20 लाख रुपये की आमदनी कर रहे हैं. आरंभ में एक बिगहा खेती योग्य भूमि में शुरू किया. इस स्व-रोजगार से अपने परिवार के लोगों को तकनीकी शिक्षा के अतिरिक्त अपने एक पुत्र को बैंक पीओ की तैयारी भी करवा रहे हैं.
मछली पालन से मिली आगे बढ़ने की राह:इस व्यवसाय से इन्हें इतनी तरक्की होने लगी कि वर्तमान में दस बिगहा भूमि में मछली पालन का कार्य कर रहे हैं. इससे प्रत्येक वर्ष करीब 20 लाख रुपये तक की कमायी कर रहे है. आज के परिपेक्ष में बेरोजगार युवकों के लिए मछली पालन एक बेहतर रोजगार के रूप में साबित हो रहा है.
इनके प्रोत्साहन से दर्जनों ग्रामीण युवक जुड़े इस रोजगार से: क्षेत्र के शिक्षित युवकों ने इस व्यवसाय से उत्साहित होकर मत्स्य पालन की ओर उनका झुकाव ज्यादा बढ़ रहा है. इस क्षेत्र में करीब पचास हेक्टेयर भूमि में मछली पालन बेरोजगार युवाओं द्वारा किया जा रहा है. ग्रामीणों का कहना है कि आसपास के ग्रामीण भी इस व्यवसाय से जुड़ना चाहते हैं.
11 वर्षों से कर रहे हैं मछली पालन का कार्य: मनोज 2006 से नौकरी पद का त्याग कर प्रारंभ में एक बिगहा भूमि में मछली पालन का कार्य शुरू किया,जो आज उनके पास आठ तालाब में मछली पालन का कार्य किया जा रहा है. प्रारंभ में थोड़ी मुश्किलों का सामना करना पड़ा.बाद में समय के साथ सब सही हो गया.
सालाना 24 टन का हो रहा है उत्पादन
कतला, नैनी, जासर व रेहु के अतिरिक्त मत्स्य उत्पादन कर राज्य के विभिन्न जिलों में बिक्री के लिये के लिए भेजा जा रहा है. सूबे के कई बड़े मछली के व्यवसायी मछली की खरीद कर रहे हैं. मनोज कहते हैं कि इस व्यवसाय से हमें भविष्य दिखता है. हमारे द्वारा गांव के कई दर्जनों बेरोजगार युवाओं को प्रोत्साहित करने का काम भी किया जाता है. बेरोजगार युवकों को इससे संबंधित प्रशिक्षण भी दिया जाता है.
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