स्कूल में बुनियादी सुविधाओं की कमी से परेशानी

Updated at : 14 Jul 2017 4:22 AM (IST)
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स्कूल में बुनियादी सुविधाओं की कमी से परेशानी

तीन वर्ष में भी नहीं बनी प्रयोगशाला की फर्श बिहारशरीफ : अस्थावां प्रखंड का गांधी उच्च विद्यालय नेरुत ग्रामीण क्षेत्र का प्रमुख विद्यालय है. विद्यालय परिसर में प्रवेश करने पर चारों ओर शांति नजर आ रही थी. शिक्षक क्लास रूम में विद्यार्थियों को पढ़ा रहे थे. हालांकि कई कमरों में विद्यार्थियों की मौजूदगी क्षमता से […]

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तीन वर्ष में भी नहीं बनी प्रयोगशाला की फर्श

बिहारशरीफ : अस्थावां प्रखंड का गांधी उच्च विद्यालय नेरुत ग्रामीण क्षेत्र का प्रमुख विद्यालय है. विद्यालय परिसर में प्रवेश करने पर चारों ओर शांति नजर आ रही थी. शिक्षक क्लास रूम में विद्यार्थियों को पढ़ा रहे थे. हालांकि कई कमरों में विद्यार्थियों की मौजूदगी क्षमता से अधिक थी. यहां कमरों की कमी स्पष्ट रूप से नजर आ रहा था. ग्रामीण क्षेत्र होने के कारण वर्ग कक्ष में छात्र छात्राओं की अच्छी उपस्थिति नजर आयी. माध्यमिक कक्षाओं में यहां विषयवार शिक्षक मौजूद हैं. माध्यमिक विद्यार्थियों को पढ़ाने के लिए कुल 15 शिक्षक मौजूद हैं. हालांकि कमरों की कमी से शिक्षकों को बारी-बारी से क्लास लेना पड़ता है
तथा एक दो घंटी बैठक कर भी गुजारना पड़ता है. इसके विपरित विद्यालय के इंटरमीडिएट सेक्शन में शिक्षकों की भारी कमी है. विद्यालय में साइंस के एक भी शिक्षक नहीं है. जबकि आर्ट्स सब्जेक्ट में भी महज तीन शिक्षकों के भरोसे चल रहा है. ग्रामीण क्षेत्र के विद्यालय में छात्र छात्राओं को इंटरमीडिएट की पर्याप्त शिक्षा नहीं मिलने के कारण छात्र अभिभावकों में भारी असंतोष है. उल्लेखनिय है कि इस विद्यालय में आस पास के लगभग आधा दर्जन से अधिक गांवों के छात्र छात्राएं पढ़ने आते हैं. इंटरमीडिएट कक्षा में पर्याप्त शिक्षक नहीं रहने के कारण विद्यार्थियों को जिला मुख्यालय अथवा दूर दराज के विद्यालयों में एडमिशन लेना पड़ता है. इसके कारण छात्राओं की पढ़ाई अवरुद्ध होनी है.
पुराना भवन हो चुका है जर्जर:विद्यालय का पुराना भवन जर्जर हो चुका है, लेकिन कमरों की कमी के कारण इन्हीं कमरों में प्रयोगशाला तथा पुस्तकालय के साथ साथ कार्यालय भी संचालित हो रहे हैं. विशेष रूप से पुस्तकालय तथा बरामदे का फर्श तीन साल पहले आई बाढ़ में धंस कर टूट गया है. इससे विद्यालय के विद्यार्थी प्रयोगशाला में जाने से भी हिचकते हैं. प्रयोगशाला तथा स्टाफ रूम, गर्ल्स कॉमन रूम की भी स्थिति अच्छी नहीं है.
इंटर के भवन में पढ़ाई:माध्यमिक कक्षाओं के विद्यार्थियों की पढ़ाई भी इंटरमीडिएट के भवन में ही किया जा रहा है. इससे विद्यार्थियों को कठिनाई हो रही है. विद्यालय के प्रधानाध्यापक द्वारा चंदे की राशि से सहयोग भवन तथा विद्यालय के विकास मद की राशि से भी एक कमरे का निर्माण कराया गया है. सहयोग भवन में स्टाफ रूम संचालित है. किसी प्रकार छात्र छात्राओं का पठन पाठन सुचारू रूप से किया जा रहा है.विद्यालय के पास छह एकड़ भूमि है. इस पर खेल विकास विभाग द्वारा स्टेडियम बनाने का प्रस्ताव है. हालांकि विद्यालय के छात्र छात्राओं तथा ग्रामीणों को विगत 3-4 वर्षों से स्टेडियम निर्माण का इंतजार है. कई बार भूमि का मापी होने के बावजूद आज तक कोई कार्य शुरू नहीं होने से ग्रामीणों में भारी असंतोष है. विद्यालय में चहारदीवारी नहीं रहने से भी परेशानी है. विद्यालय परिसर में मवेशी तथा अवारा पशु दिन में भी घूमते रहते हैं.उच्च विद्यालय नेरुत में बुनियादी सुविधाएं सामान्य रूप से बहाल हो.
यहां पेयजल के लिए दो चापाकल मौजूद है. विद्यालय में चार शौचालय है. उपस्कर की स्थिति सामान्य है. विद्यालय के मैदानके समतल नहीं रहने से विद्यार्थियों को खेलने कूदने में कठिनाई होती है. बाढ़ आने से भी विद्यालय को कभी कभार नुकसान उठाना पड़ता है.
क्या कहते हैं एचएम
विद्यालय में कमरों की कमी तथा चहारदीवारी नहीं रहने से कठिनाई होती है. इंटरमीडिएट कक्षाओं के लिए साइंस शिक्षक की सख्त आवश्यकता है.
मो ओमैस, प्राचार्य, गांधी प्लस टू उच्च विद्यालय, नेरुत, अस्थावां
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