एनसीसी 38 बिहार बटालियन गढ़ रहा युवाओं का भविष्य

Updated at : 10 Jul 2017 6:24 AM (IST)
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एनसीसी 38 बिहार बटालियन गढ़ रहा युवाओं का भविष्य

बिहारशरीफ : एनसीसी 38 बिहार बटालियन कल्याणपुर बिहारशरीफ 1962 से ही जिले के युवाओं के भविष्य बनाने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है. जिले के हजारों छात्र छात्राएं एनसीसी का प्रशिक्षण लेकर अपने सुनहरे भविष्य के मार्ग पर अग्रसर है. अनुशासन, देशसेवा, समाज सेवा, कर्तव्यनिष्ठा आदि एनसीसी के प्रमुख स्तंभ है. जिनके बारे में […]

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बिहारशरीफ : एनसीसी 38 बिहार बटालियन कल्याणपुर बिहारशरीफ 1962 से ही जिले के युवाओं के भविष्य बनाने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है. जिले के हजारों छात्र छात्राएं एनसीसी का प्रशिक्षण लेकर अपने सुनहरे भविष्य के मार्ग पर अग्रसर है. अनुशासन, देशसेवा, समाज सेवा, कर्तव्यनिष्ठा आदि एनसीसी के प्रमुख स्तंभ है. जिनके बारे में एनसीसी कैडेटों को प्रशिक्षण के शुरुआत में ही अच्छी तरह से दिमाग में डाल दिया जाता है.

इन गुणों के बिना तो एनसीसी में टिकना ही संभव नहीं है. एनसीसी का प्रत्येक कैडेट अनुशासन तथा कर्तव्यनिष्ठा का जबरदस्त मिशाल पेश करता है. वैसे तो एनसीसी को सेना की लघु इकाई कही जाती है. इसलिए इसके कैडेटों को भी सेना के समान कठोर प्रशिक्षण तथा विभिन्न प्रकार के सैन्य साजों सामान और हथियारों का प्रशिक्षण भी दिया जाता है. इसमें ड्रील तो सर्वप्रमुख प्रशिक्षण है, जो शुरू से अंत तक चलता रहता है.

बिहारशरीफ एनसीसी हेडक्वार्टर द्वारा वर्तमान में छह कॉलेजों तथा 15 स्कूलों में एनसीसी प्रशिक्षण दिया जा रहा है. लगभग 2700 से अधिक युवा प्रतिवर्ष एनसीसी से जुड़कर प्रशिक्षण ले रहे हैं. इनमें बड़ी संख्या में एनसीसी कैडेट सैन्य तथा अर्द्धसैन्य बलों में भी बढ़ चढ़ कर शामिल होते हैं. एनसीसी के कैडेट देश के भीतर तथा देश की सीमाओं पर भी अपनी क्षमताओं का प्रदर्शन कर एनसीसी का नाम रौशन करते रहे हैं. स्कूल कॉलेज के छात्र छात्राओं के लिए शुरू से ही एनसीसी ज्वायन करना गर्व की बात रही है.

एनसीसी में प्रवेश:जिन स्कूल-कॉलेजों में एनसीसी संचालित हो रहे हैं. वहां एडमिशन लेने वाले विद्यार्थी स्कूल कॉलेज के सीटीओ, एएनओ से संपर्क कर एनसीसी से जुड़ने के लिए आवेदन दे सकते हैं. एनसीसी अधिकारियों द्वारा छात्र छात्राओं की शारीरिक तथा दक्षता जांच के उपरांत उन्हें प्रशिक्षण में शामिल किया जाता है. अक्सर स्कूल कॉलेजों में एडमिशन का कार्य पूरा होने के बाद भी एनसीसी कैंप आयोजित किये जाते हैं.
प्रशिक्षण के सिलेबस:एनसीसी का प्रशिक्षण दो भागों में बंटा होता है. कॉमन ट्रेनिंग में कैडेटों को सोशल वर्क, मोटिवेशन, जन जागरूकता आदि का प्रशिक्षण दिया जाता है. लगभग 70 फीसदी कोर्स इसी पर निर्भर है. स्पेशल ट्रेनिंग में कैडेटों को ड्रील, हथियारों का प्रशिक्षण, बैटल क्रॉफ्ट, मैप रीडिंग, ऑपस्टिकल, टेंट लगाना-खोलना, आपदा की स्थिति में सहयोग करना आदि का प्रशिक्षण दिया जाता है. सिलेबस का 30 फीसदी कोर्स इससे जुड़ा होता है.
एनसीसी सर्टिफिकेट:
एनसीसी कैडेटों को प्रशिक्षण के उपरांत प्रशिक्षण से जुड़े परीक्षा में भाग लेना होता है.
लिखित परीक्षा भी आयोजित की जाती है. सफल कैडेटों को प्रमाणपत्र के रूप में सर्टिफिकेट ए, सर्टिफिकेट बी तथा सर्टिफिकेट सी प्रदान किये जाते हैं. सैन्य क्षेत्र में नियुक्ति के लिए इन प्रमाणपत्रों को काफी महत्व दिया जाता है. ए सर्टिफिकेट वाले अभ्यर्थी को जेनरल ड्यूटी में पांच अंक तथा बी सर्टिफिकेट वाले अभ्यर्थी को दस अंकों की छूट मिलती है. सी सर्टिफिकेट वाले अभ्यर्थी को 15 अंकों की छूट मिलती है. अधिकारी संवर्ग में भी सी सर्टिफिकेट वालों को डायरेक्ट इंटरव्यू से नियुक्ति मिलती है.
किसे मिलता है कौन सा सर्टिफिकेट
उच्च विद्यालयों के कैडेटों को -ए सर्टिफिकेट
इंटरमीडिएट के कैडेटों को -बी सर्टिफिकेट
स्नातक प्रतिष्ठा के कैडेटों को -सी सर्टिफिकेट
इन कॉलेजों में है प्रशिक्षण की सुवि
किसान कॉलेज सोहसराय-दो कंपनी
एसपीएम कॉलेज -एक कंपनी
जीडीएम कॉलेज हरनौत-एक कंपनी
रास बिहारी इंटर स्कूल नालंदा-एक कंपनी
सैनिक स्कूल नालंदा-एक कंपनी
एएनएस कॉलेज बाढ़-एक कंपनी
इन स्कूलों में है प्रशिक्षण की व्यवस्था
नालंदा कॉलेजिएट स्कूल बिहारशरीफ-दो ट्रूप
आदर्श प्लस टू हाइस्कूल-एक ट्रूप
बड़ी पहाड़ी प्लस टू हाइस्कूल-एक ट्रूप
सोगरा हाइस्कूल बिहारशरीफ-एक ट्रूप
गांधी इंटर हाइस्कूल सिलाव-एक ट्रूप
रामबाबू हाइस्कूल हिलसा-एक ट्रूप
जवाहर नवोदय विद्यालय राजगीर-एक ट्रूप (50 फीसदी महिला)
संत बल्लभाचार्य हाइस्कूल अस्थावां-एक ट्रूप
वेनार हाइस्कूल अस्थावां-एक ट्रूप
माफी हाइस्कूल अस्थावां-एक ट्रूप
जिला स्कूल राणा बिगहा-एक ट्रूप (महिला)
श्री गणेश हाइस्कूल बख्तियारपुर-एक ट्रूप
कन्हाई हाइस्कूल नवादा-एक ट्रूप
गांधी हाइस्कूल नवादा-एक ट्रूप
हसुआ हाइस्कूल हिसुआ-एक ट्रूप
क्या कहते हैं अधिकारी
एनसीसी 38 बिहार बटालियन बिहारशरीफ अपनी पूरी क्षमता का उपयोग करते हुए नालंदा के साथ नवादा तथा पटना जिले के बाढ़ अनुमंडल तक प्रशिक्षण दे रहा है. प्रशिक्षण देने वाले अधिकारियों की संख्या बढ़ाये जाने पर अन्य स्कूल कॉलेजों में भी प्रशिबिहारशरीफ : एनसीसी 38 बिहार बटालियन कल्याणपुर बिहारशरीफ 1962 से ही जिले के युवाओं के भविष्य बनाने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है. जिले के हजारों छात्र छात्राएं एनसीसी का प्रशिक्षण लेकर अपने सुनहरे भविष्य के मार्ग पर अग्रसर है. अनुशासन, देशसेवा, समाज सेवा, कर्तव्यनिष्ठा आदि एनसीसी के प्रमुख स्तंभ है. जिनके बारे में एनसीसी कैडेटों को प्रशिक्षण के शुरुआत में ही अच्छी तरह से दिमाग में डाल दिया जाता है. इन गुणों के बिना तो एनसीसी में टिकना ही संभव नहीं है. एनसीसी का प्रत्येक कैडेट अनुशासन तथा कर्तव्यनिष्ठा का जबरदस्त मिशाल पेश करता है. वैसे तो एनसीसी को सेना की लघु इकाई कही जाती है. इसलिए इसके कैडेटों को भी सेना के समान कठोर प्रशिक्षण तथा विभिन्न प्रकार के सैन्य साजों सामान और हथियारों का प्रशिक्षण भी दिया जाता है. इसमें ड्रील तो सर्वप्रमुख प्रशिक्षण है, जो शुरू से अंत तक चलता रहता है. बिहारशरीफ एनसीसी हेडक्वार्टर द्वारा वर्तमान में छह कॉलेजों तथा 15 स्कूलों में एनसीसी प्रशिक्षण दिया जा रहा है. लगभग 2700 से अधिक युवा प्रतिवर्ष एनसीसी से जुड़कर प्रशिक्षण ले रहे हैं. इनमें बड़ी संख्या में एनसीसी कैडेट सैन्य तथा अर्द्धसैन्य बलों में भी बढ़ चढ़ कर शामिल होते हैं. एनसीसी के कैडेट देश के भीतर तथा देश की सीमाओं पर भी अपनी क्षमताओं का प्रदर्शन कर एनसीसी का नाम रौशन करते रहे हैं. स्कूल कॉलेज के छात्र छात्राओं के लिए शुरू से ही एनसीसी ज्वायन करना गर्व की बात रही है.
एनसीसी में प्रवेश:जिन स्कूल-कॉलेजों में एनसीसी संचालित हो रहे हैं. वहां एडमिशन लेने वाले विद्यार्थी स्कूल कॉलेज के सीटीओ, एएनओ से संपर्क कर एनसीसी से जुड़ने के लिए आवेदन दे सकते हैं. एनसीसी अधिकारियों द्वारा छात्र छात्राओं की शारीरिक तथा दक्षता जांच के उपरांत उन्हें प्रशिक्षण में शामिल किया जाता है. अक्सर स्कूल कॉलेजों में एडमिशन का कार्य पूरा होने के बाद भी एनसीसी कैंप आयोजित किये जाते हैं.
प्रशिक्षण के सिलेबस:एनसीसी का प्रशिक्षण दो भागों में बंटा होता है. कॉमन ट्रेनिंग में कैडेटों को सोशल वर्क, मोटिवेशन, जन जागरूकता आदि का प्रशिक्षण दिया जाता है. लगभग 70 फीसदी कोर्स इसी पर निर्भर है. स्पेशल ट्रेनिंग में कैडेटों को ड्रील, हथियारों का प्रशिक्षण, बैटल क्रॉफ्ट, मैप रीडिंग, ऑपस्टिकल, टेंट लगाना-खोलना, आपदा की स्थिति में सहयोग करना आदि का प्रशिक्षण दिया जाता है. सिलेबस का 30 फीसदी कोर्स इससे जुड़ा होता है.
एनसीसी सर्टिफिकेट:
एनसीसी कैडेटों को प्रशिक्षण के उपरांत प्रशिक्षण से जुड़े परीक्षा में भाग लेना होता है.
लिखित परीक्षा भी आयोजित की जाती है. सफल कैडेटों को प्रमाणपत्र के रूप में सर्टिफिकेट ए, सर्टिफिकेट बी तथा सर्टिफिकेट सी प्रदान किये जाते हैं. सैन्य क्षेत्र में नियुक्ति के लिए इन प्रमाणपत्रों को काफी महत्व दिया जाता है. ए सर्टिफिकेट वाले अभ्यर्थी को जेनरल ड्यूटी में पांच अंक तथा बी सर्टिफिकेट वाले अभ्यर्थी को दस अंकों की छूट मिलती है. सी सर्टिफिकेट वाले अभ्यर्थी को 15 अंकों की छूट मिलती है. अधिकारी संवर्ग में भी सी सर्टिफिकेट वालों को डायरेक्ट इंटरव्यू से नियुक्ति मिलती है.
किसे मिलता है कौन सा सर्टिफिकेट
उच्च विद्यालयों के कैडेटों को -ए सर्टिफिकेट
इंटरमीडिएट के कैडेटों को -बी सर्टिफिकेट
स्नातक प्रतिष्ठा के कैडेटों को -सी सर्टिफिकेट
इन कॉलेजों में है प्रशिक्षण की सुवि
किसान कॉलेज सोहसराय-दो कंपनी
एसपीएम कॉलेज -एक कंपनी
जीडीएम कॉलेज हरनौत-एक कंपनी
रास बिहारी इंटर स्कूल नालंदा-एक कंपनी
सैनिक स्कूल नालंदा-एक कंपनी
एएनएस कॉलेज बाढ़-एक कंपनी
इन स्कूलों में है प्रशिक्षण की व्यवस्था
नालंदा कॉलेजिएट स्कूल बिहारशरीफ-दो ट्रूप
आदर्श प्लस टू हाइस्कूल-एक ट्रूप
बड़ी पहाड़ी प्लस टू हाइस्कूल-एक ट्रूप
सोगरा हाइस्कूल बिहारशरीफ-एक ट्रूप
गांधी इंटर हाइस्कूल सिलाव-एक ट्रूप
रामबाबू हाइस्कूल हिलसा-एक ट्रूप
जवाहर नवोदय विद्यालय राजगीर-एक ट्रूप (50 फीसदी महिला)
संत बल्लभाचार्य हाइस्कूल अस्थावां-एक ट्रूप
वेनार हाइस्कूल अस्थावां-एक ट्रूप
माफी हाइस्कूल अस्थावां-एक ट्रूप
जिला स्कूल राणा बिगहा-एक ट्रूप (महिला)
श्री गणेश हाइस्कूल बख्तियारपुर-एक ट्रूप
कन्हाई हाइस्कूल नवादा-एक ट्रूप
गांधी हाइस्कूल नवादा-एक ट्रूप
हसुआ हाइस्कूल हिसुआ-एक ट्रूप
क्या कहते हैं अधिकारी
एनसीसी 38 बिहार बटालियन बिहारशरीफ अपनी पूरी क्षमता का उपयोग करते हुए नालंदा के साथ नवादा तथा पटना जिले के बाढ़ अनुमंडल तक प्रशिक्षण दे रहा है. प्रशिक्षण देने वाले अधिकारियों की संख्या बढ़ाये जाने पर अन्य स्कूल कॉलेजों में भी प्रशिक्षण की शुरुआत की जा सकती है.
कर्नल सुरेन्द्र कुमार यादव, एनसीसी 38 बिहार बटालियन बिहारशरीफ, नालंदा
क्षण की शुरुआत की जा सकती है.
कर्नल सुरेन्द्र कुमार यादव, एनसीसी 38 बिहार बटालियन बिहारशरीफ, नालंदा
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