चारपहिया गाड़ी के लाइसेंस पर नहीं चला सकते हैं ऑटो

Updated at : 02 Mar 2025 1:06 AM (IST)
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चारपहिया गाड़ी के लाइसेंस पर नहीं चला सकते हैं ऑटो

चारपहिया गाड़ी के लाइसेंस पर नहीं चला सकते हैं ऑटो

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:: गाड़ी के आकार व प्रकार के हिसाब से उसका ड्राइविंग लाइसेंस का तय होता है मानक

:: दोपहिया वाहन में भी मोटरसाइकिल विथ गियर व विदाउट गियर का अलग होता है लाइसेंस

कुमार गौरव, मुजफ्फरपुर

किसी प्रकार की गाड़ी चाहे वह डीजल, पेट्रोल, इलेक्ट्रिक इंजन का हो, उसमें पैसेंजर और मालवाहक वाहन सभी का अलग-अलग लाइसेंस होता है. इसके अलावा एक प्राइवेट ड्राइविंग लाइसेंस (डीएल) होता है जिसमें आप दो पहिया व चार पहिया गाड़ी चला सकते हैं. दो पहिया के डीएल में भी विद गियर और विदाउट गियर का अलग डीएल होता है. वैसे वाहन जिसकी अधिकतम स्पीड 25 होती है केवल उसी वाहन को चलाने के लिए डीएल की आवश्यकता नहीं होती है. कुछ माह पूर्व सरकार ने निजी चारपहिया वाहन के लाइसेंस पर टैक्सी चारपहिया चलाने की अनुमति प्रदान की है. लेकिन प्राइवेट चारपहिया के लाइसेंस पर टैक्सी चारपहिया व पिकअप चारपहिया (क्षमता तय) चला सकते हैं, लेकिन तीन पहिया वाहन नहीं. कुछ चौपहिया छोटे ट्रक व बस भी होते हैं जिसे आप प्राइवेट एलएमवी डीएल पर नहीं चला सकते हैं. चार पहिया छोटे ट्रक व बस के लिए मध्यम वाहन चलाने का अलग डीएल बनता है.

वाहन चलाने के लिए जो लाइसेंस जारी होता है वह गाड़ी के व्हील बेस और उसकी क्षमता के अनुसार अलग अलग तय होता है. सबसे अधिक डीएल प्राइवेट बनते हैं, जिसमें एमसीडब्लुजी (मोटरसाइकिल विथ गियर) और एलएमवी (लाइट मोटर व्हीकल) जैसे कि चार से सात सीट वाली कार. वहीं प्राइवेट डीएल में एमसीडब्लूजी (मोटरसाइकिल विदाउट गियर) जैसी स्कूटी जो बिना क्लच वाले दोपहिया वाहन हैं. महिलाएं ज्यादातर स्कूटी का लाइसेंस बनवाती है.

डीटीओ कुमार सत्येंद्र यादव ने बताया कि गाड़ी के आकार के हिसाब से अलग अलग डीएल बनाने का नियम है. वाहन मालिक अपनी आवश्यकता अनुसार डीएल बनवा सकते हैं. विभागीय वेबसाइट पर सारी जानकारी उपलब्ध है.

ई-रिक्शा व डीजल ऑटो का अलग होता है लाइसेंस

तीन पहिया ऑटो का अलग लाइसेंस ही जारी होता है. इसमें ई-रिक्शा पैसेंजर और मालवाहक दोनों का अलग डीएल होता है. ठीक इसी प्रकार डीजल ऑटो व सीएनजी ऑटो में भी पैसेंजर और मालवाहक दोनों का अलग अलग डीएल बनता है. एमवीआइ राकेश रंजन ने बताया कि गाड़ी के व्हील बेस के अनुसार उसका डीएल अलग अलग होता है. मध्यम व भारी वाहन चलाने के लिए मोटर ट्रेनिंग स्कूल का सर्टिफिकेट अनिवार्य होता है. इसमें वाहनों का क्लास (वर्ग) अलग-अलग तय है. भारी वाहन में छोटे बड़े बस, ट्रक, रोड रोलर, किरान, हेवी इक्यूपमेंट व्हीकल आदि का अलग अलग डीएल बनता है. वहीं हेजार्ड व्हीकल (केमिकल, पेट्रोल टैंकर आदि) के लिए अलग अलग लाइसेंस बनता है. इन वाहनों को चलाने के लिए पहले से चालक के पास हेवी व्हीकल चलाने का लाइसेंस होना चाहिए, इसके बाद हेजार्ड व्हीकल का प्रशिक्षण लेने के बाद चालक के हेवी लाइसेंस में इसे जोड़ा जाता (इंडोर्स) है, जो प्रत्येक साल रिनुवल होता है.

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