पॉक्सो का झूठा केस कराने वाली महिला पर ही चलेगा केस, कोर्ट ने लिया कड़ा संज्ञान

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पॉक्सो का झूठा केस कराने वाली महिला पर ही चलेगा केस, कोर्ट ने लिया कड़ा संज्ञान

विशेष पॉक्सो कोर्ट ने एक महिला द्वारा प्रतिशोध में पॉक्सो एक्ट के तहत दर्ज कराए गए झूठे मुकदमे पर कड़ा रुख अपनाया है. कोर्ट ने महिला और उसके सहयोगियों के खिलाफ मुकदमा चलाने का आदेश दिया है. इस फैसले से झूठे आरोप लगाने वालों में हड़कंप मच गया है.

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Muzaffarpur False Case: विशेष पॉक्सो (POCSO) कोर्ट संख्या-एक के न्यायाधीश धीरेंद्र मिश्रा ने एक महिला द्वारा प्रतिशोध और नुकसान पहुंचाने की नीयत से पॉक्सो एक्ट के तहत झूठा मुकदमा दर्ज कराने के मामले में कड़ा रुख अपनाया है. अदालत ने इस पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए संज्ञान लिया है. और मामले की अगली सुनवाई के लिए 14 जुलाई की तिथि निर्धारित की है. मिठनपुरा थाने की दारोगा सह मामले की अनुसंधानकर्ता (आईओ) वीणा कुमारी के जांच प्रतिवेदन के आधार पर कोर्ट ने केस दर्ज कराने वाली सूचक महिला और उसके सहयोगियों के खिलाफ जानबूझकर झूठी आपराधिक प्राथमिकी दर्ज कराने के आरोप में उल्टे मुकदमा चलाने का आदेश जारी किया है.

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गैंगरेप का लगाया था गंभीर आरोप, जांच में निकला पूरी तरह फर्जी

जानकारी के अनुसार. सूचक महिला ने मिठनपुरा थाने में एक प्राथमिकी दर्ज कराई थी. जिसमें उसने आरोपितों पर खुद के और एक नाबालिग किशोरी के साथ सामूहिक दुष्कर्म (गैंगरेप) करने जैसा बेहद गंभीर और संवेदनशील आरोप लगाया था. महिला ने अपनी शिकायत में यह भी दावा किया था कि जब उसने इस घिनौनी हरकत का विरोध किया. तो आरोपितों ने उसे और किशोरी को जान से मारने की गंभीर धमकी भी दी थी. इस सनसनीखेज मामले की जांच जब मिठनपुरा थाने की दारोगा वीणा कुमारी ने शुरू की. तो परत-दर-परत सच्चाई सामने आने लगी. आईओ ने अपनी गहन और वैज्ञानिक तफ्तीश में पाया कि महिला द्वारा लगाए गए सभी आरोप पूरी तरह बेबुनियाद. असत्य और मनगढ़ंत हैं. घटना की कोई पुष्टि नहीं होने पर पुलिस ने केस को 'फर्जी' पाते हुए अंतिम प्रतिवेदन (फाइनल रिपोर्ट) कोर्ट में सौंप दिया था.

कोर्ट के सख्त आदेश से हड़कंप

पुलिस की फाइनल रिपोर्ट पर विचार करने के बाद विशेष पॉक्सो कोर्ट ने माना कि महिला ने कानून का दुरुपयोग करते हुए आरोपितों की सामाजिक प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाने और उन्हें जानबूझकर नुकसान पहुंचाने के इरादे से यह साजिश रची थी. अदालत के इस सख्त आदेश के बाद अब झूठा केस दर्ज कराकर दूसरों को फंसाने वाले तत्वों में हड़कंप मच गया है. कानूनी जानकारों का कहना है कि कोर्ट के इस कदम से गंभीर कानूनों का गलत इस्तेमाल करने वाले लोगों पर नकेल कसेगी. और निर्दोषों को समय पर न्याय मिल सकेगा. अब 14 जुलाई को होने वाली सुनवाई पर सबकी नजरें टिकी हैं.


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