आर्ट गैलरी ने लोगों का मन मोहा, हर कृति को मिली सराहना

The art gallery fascinated people
पटना के बिहार कला मंच की चित्रकला प्रदर्शनी में कला प्रेमियों की रही भीड़बच्चों के बीच चित्रकला प्रतियोगिता आयोजित, विजय कलाकारों को किया जायेगा पुरस्कृत उपमुख्य संवाददाता, मुजफ्फरपुर पटना के बिहार कला मंच द्वारा किलकारी में आयोजित अभिव्यंजना समकालीन कलाकारों की राष्ट्रीय चित्र प्रदर्शनी के दूसरे दिन बड़ी संख्या में दर्शकों की भीड़ रही. पद्मश्री श्याम शर्मा की कलाकृति ने लोगों का ध्यान खींचा. उन्होंने छापा चित्र में प्रयोग करके इंस्टॉलेशन को बड़े ही सुसज्जित ढंग से प्रस्तुत किया है. मोहम्मद सुलेमान की रेखांकन विधि से बनायी गयी गणेश व शिव की पेंटिंग देख दर्शक मुग्ध रह गये. जितेंद्र मोहन का मंथन, जिसमें उन्होंने अपनी शैली में विष्णु के दसों अवतार को दिखाया है. राष्ट्रीय स्तर के चित्रकार वीरेंद्र कुमार सिंह की कीर्ति छठ पूजा को उन्होंने विशेष शैली में प्रस्तुत किया. दिनेश कुमार के छठी मैया भी काफी आकर्षक का केंद्र रहा है. चंदन सिकंदर की कृति अन टाइटल में रेखाओं के संयोजन के माध्यम से यथार्थ वाली शैली में इन्होंने शिव तांडव का चित्र प्रदर्शित किया है. शिव शंकर सिंह ने बनारस घाट को एक अनोखी शैली में प्रस्तुत किया है. पटना कला एवं शिवपुरी महाविद्यालय के पूर्व प्राचार्य डॉ अजय पांडेय ने गांधी जी के चश्मे को ड्राइंग के माध्यम से संयोजन किया, जो काफी आकर्षक का केंद्र रहा. सुनील कुमार चौधरी की चर्चित कृति हर शाख पर उल्लू बैठा है ने प्रशंसा बटोरी. विनीता सिंह की कृति अनाड़ी में उन्होंने तब की परिकल्पना की है, जब दुनिया नहीं थी. कुमार विकास ने अपनी कृति में अतीत की यादों एवं वर्तमान के संघर्ष को दिखाया है. मनोज कुमार बच्चन की कृति फ्लावर भी कम आकर्षण का केंद्र नहीं रहा. रजत घोष की देश विख्यात शिल्प कला व रंजन कुमार की टेराकोटा की कृति ने मन मोह लिया. मनीष उपाध्याय की कृति डेमोक्रेटिक इंडिया में शुकर को फल खाते हुए दिखाया गया है. मनोज कुमार साहनी की कृति जो पेपर मसीह और पेपर आर्ट के माध्यम से बड़े ही आकर्षक ढंग से दिखाया है. डॉ मुकेश सोना की कृति मुक्तिपथ ने किया आकर्षित सत्या शार्थ की कृति मुखौटा में मानव जीवन के बनावटी व्यवहार को दिखाया गया है. दिलीप कुमार पाठक की रचना अनटाइटल, अर्चना सिंह, निशी सिंहकी कृति भी काफी आकर्षण का केंद्र रही. नरेंद्र नेचर ने प्रकृति के अंकुरण को अपने चित्रों के माध्यम से दिखाया है तो सोमा आनंद ने अपने चित्र में जुड़ शीतल को बड़े ही आकर्षक ढंग से दिखाया है. शिल्पा कुमारी का संघर्ष जिसमें विलुप्त होती हुई रस्सी पर चलती हुई लड़की को दिखाया गया है, जिसे लोगों ने सराहा. डॉ मुकेश सोना की कृति मुक्तिपथ ने अपने संदेश से लोगों को आकर्षित किया. इन्होंने अपने चित्र में ध्यान की महिमा को दिखाया है. सुमित ठाकुर जी की कृति गोल्डन लेडी ने काफी ख्याति बटोरी, चित्रकार श्रीनिवास चौधरी, कंचन प्रकाश की कृति बज्जिका आर्ट कंटेंपरेरी शैली में लोगों के आकर्षण का केंद्र रही. युवा चित्रकार सुजीत कुमार की कीर्ति ने काफी प्रशंसा बटोरी. इस मौके पर एक चित्रकला प्रतियोगिता का आयोजन किया गया, जिसमें 100 से अधिक बच्चों ने भाग लिया, जिसके पुरस्कार की घोषणा शनिवार को की जायेगी. आयोजन में सह संयोजक किलकारी, चित्रांश खेल एवं सांस्कृतिक मंच व शाकुंतलम कला संस्कृति मंच की सक्रिय भागीदारी रही. इस मौके पर पूनम कुमारी, राजीव कुमार सिन्हा ,राजेश कुमार सिन्हा, संदीप कुमार मुख्य रूप से मौजूद थे.
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लेखक के बारे में
By Vinay Kumar
I am working as a deputy chief reporter at Prabhat Khabar muzaffarpur. My writing focuses on political, social, and current topics.
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