सर, पैसा लेने के बाद भी नहीं दे रहे मार्क्सशीट, विवि ने शुरू की जांच
Published by :Prabhat Khabar News Desk
Published at :01 Nov 2024 10:11 PM (IST)
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सर, पैसा लेने के बाद भी नहीं दे रहे मार्क्सशीट, विवि ने शुरू की जांच
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-विवि के सोशल मीडिया पर स्थित हैंडल और कुलपति के पर्सनल आइडी पर भी की -शिकायत, कुलपति बोले- संबंधित पदाधिकारी को दिया गया जांच का जिम्मा-भ्रष्टाचार के खिलाफ विवि सख्त, छात्र करें शिकायत तो कार्रवाई निश्चित होगी
मुजफ्फरपुर.
सर, मेरा भाई तीसरे वर्ष के अंकपत्र के लिए विवि गया था. वहां महेंद्र ने उससे 200 रुपये भी लिए और अंकपत्र भी नहीं दिया. जबकि उसने कहा था पैसे देने पर यह मिल जायेगा. पैसा लेने के बाद से वह फोन नहीं उठा रहा. चार नवंबर को ही बीपीएससी के लिए फॉर्म भरने की अंतिम तिथि है. अंकपत्र नहीं मिला तो यह मौका भी हाथ से निकल जायेगा. मोतिहारी के रहने वाले आदिजय शर्मा ने अपने भाई के साथ हो रही परेशानी की शिकायत विश्वविद्यालय प्रशासन के आधिकारिक एक्स हैंडल व कुलपति प्रो दिनेश चंद्र राय के पर्सनल आइडी पर भी की. कहा कि विवि में आने पर बार-बार लौटा दिया जाता है. बिना पैसे दिये कोई काम नहीं होता. उसने इस मामले में कार्रवाई करने की मांग की है. सोशल मीडिया पर मिली इस शिकायत के बाद विवि प्रशासन ने जांच शुरू कर दी है. विवि के आधिकारिक हैंडल से शिकायतकर्ता को कहा गया है कि हम ईमानदारी बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं. हम आश्वासन देते हैं कि कर्मचारियों से जुड़ी रिश्वतखोरी के आरोप की जांच की जायेगी. कुलपति ने कहा कि ग्रीवांस रिड्रेसल सेल सोशल मीडिया पर भी सक्रिय है. यहां से मिलने वाली शिकायत पर भी संज्ञान लिया जा रहा है. उन्होंने कहा कि छात्रों को चाहिए कि वे शिकायत के साथ अपना पूरा परिचय, सत्र, रोल नंबर समेत अन्य जानकारी भी साझा करें ताकि पदाधिकारी संबंधित विभाग से जानकारी लेकर उनकी समस्या को समाधान कर सकें. छात्रों की परेशानी को देखते हुए ही छात्र संवाद की पहल की गयी है. यहां सैकड़ों ऐसे मामले सुलझाये गये हैं जिसके लिए छात्र परेशान थे. कुलपति ने कहा कि यदि रिश्वत लेने की पुष्टि होती है तो दोषी के खिलाफ सख्त कार्रवाई करेंगे. हिमांशु झा ने पैसा नहीं देने के कारण आवेदन देने के छह महीने बाद भी अंकपत्र नहीं मिलने और संदीप कुमार केशरी ने मूल प्रमाणपत्र के लिए 1200 रुपये लेने की शिकायत की. कहा कि कॉलेज में 1700 रुपये मांगे जा रहे थे. करीब डेढ़ साल तक इंतजार के बाद पैसा देकर मूल प्रमाणपत्र निकलवाना पड़ा. कुलपति ने कहा है कि इन मामलों की जांच कर कार्रवाई के लिए पदाधिकारी को निर्देश दिया गया है.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
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