मुजफ्फरपुर
ऐसे तो प्लास्टिक पर्यावरण के लिए खतरा माना जाता है, लेकिन लीची की फसलों के लिए यह प्लास्टिक खासा उपयोगी साबित हो रहा है. अच्छी फसल के लिए किसान पेड़ों को प्लास्टिक के थैले से कवर कर रहे हैं. इससे लीची की फसल अच्छी होगी. राष्ट्रीय लीची अनुसंधान केंद्र के रिसर्च के बाद किसानों को यह सलाह दी गयी है. इस बार किसान अपने लीची के फलों में प्लास्टिक का उपयोग कर रहे हैं. माना जा रहा है कि पिछली बार स्टीम बग के कारण जो 30 फीसदी लीची खराब हो गयी थी, वह प्लास्टिक के थैले के उपयोग से बच जायेगी. लीची अनुसंधान केंद्र अच्छी पैदावार के लिए किसानों को ऑनलाइन प्रशिक्षण भी दे रहा है. बीते पांच साल में छह हजार किसानों का प्रशिक्षित किया जा चुका है. लीची की फसल को बचाने के लिए फल आने से पहले प्लास्टिक की थैली से ढक दिया जाता है. इससे लीची का फलन भी अच्छा होगा और स्वाद की गुणवत्ता भी बरकरार रहेगी. इससे बाजार में मांग में बढ़ेगी. इसके अलावा किसानों को मिट्टी में उर्वता बढ़ाने के लिए जैविक खाद का उपयोग करने की सलाह दी जा रही है. इससे पौधों की वद्धि और गुणवत्ता में सुधार होगा. जैविक खाद के उपयोग से मिट्टी की संरचना में सुधार होगा, जो लंबे समय तक फसल उत्पादन में सहायक होगा.
मौसम ने साथ दिया तो अच्छी होगी फसल
वर्जन
लीची की फसल बेहतर कैसे हो, इसके लिए किसानों को प्रशिक्षित किया जा रहा है. प्लास्टिक के थैले से फल आने से पहले लीची को कवर किया जा रहा है. इससे फसल अच्छी होगी. किसानों को आधुनिक तरीके से खेती की सलाह दी जा रही है. इसके लिए लीची अनुसंधान केंद्र की ओर से ऑनलाइन प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाया जा रहा है.
– डॉ विकास दास, निदेशक, राष्ट्रीय लीची अनुसंधान केंद्रडिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

