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पुरखों के केवाला व खतियानी जमीन की डीड की बढ़ी खोजबीन, हर दिन पहुंच रहे 100 से अधिक लोगदीपक 16,17: :: जमीन के नये सिरे से शुरू होने वाले सर्वे के बीच पुराने रजिस्टर्ड दस्तावेज की खोजबीन हुई है तेज::: मुजफ्फरपुर रजिस्ट्री कार्यालय के रिकॉर्ड रूम से वैशाली, सीतामढ़ी व शिवहर के भी लोग पहुंच रहे हैं पुराने रजिस्टर्ड दस्तावेज की खोजबीन करनेवरीय संवाददाता, मुजफ्फरपुरजमीन का नये सिरे से शुरू हुए सर्वे (पैमाइश) के बीच मुजफ्फरपुर जिला रजिस्ट्री कार्यालय के रिकॉर्ड रूम (अभिलेखागार) में रखे गये पुरखों के केवाला व खतियानी जमीन के रजिस्टर्ड दस्तावेज की खोजबीन बढ़ गयी है. अचानक रजिस्ट्री ऑफिस के रिकॉर्ड रूम में दस्तावेजों की खोजबीन के सर्टिफाइड कॉपी लेने वालों की भीड़ बढ़ने लगी है. ऐसे में रजिस्ट्री ऑफिस रोजाना 100-125 के बीच नये व पुराने दस्तावेजों की डिलीवरी (वितरण) कर रहा है. मुजफ्फरपुर के साथ-साथ सीतामढ़ी, शिवहर व वैशाली के भी लोग अपने पुरखों की खतियानी जमीन की जानकारी लेने पहुंच रहे हैं. हालांकि, रिकॉर्ड रूम के अनुसार, सीतामढ़ी, शिवहर व वैशाली के पुराने लगभग सभी पठनीय रजिस्टर्ड दस्तावेज गृह जिले को भेज दिया गया है. ताकि, लोगों को लंबी दूरी तय कर मुजफ्फरपुर आने की बजाय अपने गृह जिले के रजिस्ट्री ऑफिस से ही दस्तावेज मिल सके. अब तक मुजफ्फरपुर कार्यालय के रिकॉर्ड रूम से सीतामढ़ी, शिवहर व वैशाली के 11 रजिस्ट्री ऑफिस के दस्तावेज को भेजा गया है. इसमें वर्ष 1946 से लेकर 1978 और 1979 तक का दस्तावेज है. बाकी, बचे दस्तावेजों की खोजबीन करते हुए भेजने की कार्रवाई चल रही है. बॉक्स ::: 73 साल पुराने जमीन रिकॉर्ड का किया जा रहा है डिजिटलाइजेशनसरकार के आदेश पर वर्ष 1950 से लेकर अब तक के पुराने जमीन रिकॉर्ड का डिजिटलाइजेशन रजिस्ट्री ऑफिस करा रहा है. इसी कड़ी में पुराने दस्तावेज को निकाल सभी जिले को भेज दिया गया है. दस्तावेज का डिजिटलाइजेशन होने के बाद लोगों को अपने पुरखों की संपत्ति सहित अन्य जानकारी प्राप्त करने में सहूलियत होगी. घर बैठे ऑनलाइन पुराने दस्तावेज की खोजबीन कर सकते हैं. बॉक्स ::: 2006 से रजिस्ट्री ऑफिस के पास उपलब्ध है कंप्यूटराइज्ड डॉक्यूमेंटवर्ष 2006 से जमीन की रजिस्ट्री प्रक्रिया कंप्यूटराइज्ड हुई है. इसके बाद के सभी दस्तावेज तो भूमि पोर्टल पर उपलब्ध है. लेकिन, पुराने दस्तावेज की खोजबीन के लिए अभी भी लोगों को चिरकुट फाइल करना पड़ता है. इसके लिए सरकार से शुल्क तय है. बता दें कि अब तक विभाग के आदेश पर 1995 से 2006 तक के दस्तावेजों का डिजिटलाइजेशन किया गया है. इससे पहले के दस्तावेज की खोजबीन करते हुए एजेंसी डिजिटलाइजेशन की प्रक्रिया में जुटी है.

पुरखों के केवाला व खतियानी जमीन की डीड की बढ़ी खोजबीन, हर दिन पहुंच रहे 100 से अधिक लोगदीपक 16,17::: जमीन के नये सिरे से शुरू होने वाले सर्वे के बीच पुराने रजिस्टर्ड दस्तावेज की खोजबीन हुई है तेज::: मुजफ्फरपुर रजिस्ट्री कार्यालय के रिकॉर्ड रूम से वैशाली, सीतामढ़ी व शिवहर के भी लोग पहुंच रहे हैं पुराने रजिस्टर्ड दस्तावेज की खोजबीन करनेवरीय संवाददाता, मुजफ्फरपुरजमीन का नये सिरे से शुरू हुए सर्वे (पैमाइश) के बीच मुजफ्फरपुर जिला रजिस्ट्री कार्यालय के रिकॉर्ड रूम (अभिलेखागार) में रखे गये पुरखों के केवाला व खतियानी जमीन के रजिस्टर्ड दस्तावेज की खोजबीन बढ़ गयी है. अचानक रजिस्ट्री ऑफिस के रिकॉर्ड रूम में दस्तावेजों की खोजबीन के सर्टिफाइड कॉपी लेने वालों की भीड़ बढ़ने लगी है. ऐसे में रजिस्ट्री ऑफिस रोजाना 100-125 के बीच नये व पुराने दस्तावेजों की डिलीवरी (वितरण) कर रहा है. मुजफ्फरपुर के साथ-साथ सीतामढ़ी, शिवहर व वैशाली के भी लोग अपने पुरखों की खतियानी जमीन की जानकारी लेने पहुंच रहे हैं. हालांकि, रिकॉर्ड रूम के अनुसार, सीतामढ़ी, शिवहर व वैशाली के पुराने लगभग सभी पठनीय रजिस्टर्ड दस्तावेज गृह जिले को भेज दिया गया है. ताकि, लोगों को लंबी दूरी तय कर मुजफ्फरपुर आने की बजाय अपने गृह जिले के रजिस्ट्री ऑफिस से ही दस्तावेज मिल सके. अब तक मुजफ्फरपुर कार्यालय के रिकॉर्ड रूम से सीतामढ़ी, शिवहर व वैशाली के 11 रजिस्ट्री ऑफिस के दस्तावेज को भेजा गया है. इसमें वर्ष 1946 से लेकर 1978 और 1979 तक का दस्तावेज है. बाकी, बचे दस्तावेजों की खोजबीन करते हुए भेजने की कार्रवाई चल रही है. बॉक्स ::: 73 साल पुराने जमीन रिकॉर्ड का किया जा रहा है डिजिटलाइजेशनसरकार के आदेश पर वर्ष 1950 से लेकर अब तक के पुराने जमीन रिकॉर्ड का डिजिटलाइजेशन रजिस्ट्री ऑफिस करा रहा है. इसी कड़ी में पुराने दस्तावेज को निकाल सभी जिले को भेज दिया गया है. दस्तावेज का डिजिटलाइजेशन होने के बाद लोगों को अपने पुरखों की संपत्ति सहित अन्य जानकारी प्राप्त करने में सहूलियत होगी. घर बैठे ऑनलाइन पुराने दस्तावेज की खोजबीन कर सकते हैं. बॉक्स ::: 2006 से रजिस्ट्री ऑफिस के पास उपलब्ध है कंप्यूटराइज्ड डॉक्यूमेंटवर्ष 2006 से जमीन की रजिस्ट्री प्रक्रिया कंप्यूटराइज्ड हुई है. इसके बाद के सभी दस्तावेज तो भूमि पोर्टल पर उपलब्ध है. लेकिन, पुराने दस्तावेज की खोजबीन के लिए अभी भी लोगों को चिरकुट फाइल करना पड़ता है. इसके लिए सरकार से शुल्क तय है. बता दें कि अब तक विभाग के आदेश पर 1995 से 2006 तक के दस्तावेजों का डिजिटलाइजेशन किया गया है. इससे पहले के दस्तावेज की खोजबीन करते हुए एजेंसी डिजिटलाइजेशन की प्रक्रिया में जुटी है.
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Muzaffarpur Today News :

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Muzaffarpur Mausam :

मुजफ्फरपुर के लिए आज का सटीक और डिटेल्ड मौसम (Mausam) की जानकारी यहां पाएं।

About Muzaffarpur

मुजफ्फरपुर (Muzaffarpur) बिहार का एक प्रमुख शहर है, जिसे लीची नगरी के नाम से पूरी दुनिया में जाना जाता है। यह शहर अपनी लीची के भरपूर रस और मिठास के लिए देशभर में प्रसिद्ध है, जो बिहार की शान मानी जाती है। मुजफ्फरपुर उत्तर बिहार का एक महत्वपूर्ण व्यापारिक, शैक्षणिक और सांस्कृतिक केंद्र है।

यहां उद्योग, स्वास्थ्य, शिक्षा और परिवहन के क्षेत्र में समय के साथ लगातार विकास हो रहा है। बागमती नदी के किनारे बसा यह शहर ऐतिहासिक और धार्मिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है।

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मुजफ्फरपुर का मौसम और खानपान (Muzaffarpur Weather & Food)

बात जब मुजफ्फरपुर मौसम की आए तो यहां का मौसम सालभर में विविध रहता है। वहीं गर्मियों में यहां का तापमान 30°C से 42°C तक पहुंच जाता है, जबकि यही तापमान सर्दियों में 8°C से 12°C तक गिर जाता है और खासकर जब तक यहां मानसून की जाए तो इस मौसम में मुजफ्फरपुर में हरियाली और ठंडक का सुंदर संगम देखने का मौका मिलता है।

रही बात यहां की खानपान की तो मुजफ्फरपुर खाने का स्वाद पारंपरिक बिहारी व्यंजनों के साथ स्थानीय स्वाद से भी जुड़ा होता है। यहां का दही-चूड़ा, लिट्टी-चोखा, मछली-भात, सत्तू पराठा और खिचड़ी बेहद लोकप्रिय हैं और वहीं मिठाइयों में खाजा, ठेकुआ, पेड़ा और खासतौर पर लीची से बनी मिठाइयां यहां की पहचान और शान हैं।

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