नगर निगम में बड़ा सियासी उलटफेर, सातों सदस्यों ने एकजुट होकर रद्द की मेयर की 19 योजनाएं

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नगर निगम में पावर गेम, महापौर की शक्ति पर सशक्त स्थायी समिति का प्रहार, मेयर की 19 योजनाएं रद्द

स्थाई समिति की मीटिंग करती महापौर एवं उपस्थित सदस्य एवं निगम के पदाधिकारी | Prabhat Khabar Network

मुजफ्फरपुर नगर निगम में मेयर निर्मला साहू को बड़ा झटका लगा है. सशक्त स्थायी समिति की बैठक में नवनिर्वाचित सदस्यों ने एकजुट होकर उनकी 19 योजनाओं को रद्द कर दिया. इससे निगम में सियासी घमासान तेज हो गया है.

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Muzaffarpur Corporation Dispute: नगर निगम में विकास की आड़ में शह और मात का बड़ा खेल शुरू हो गया है. लगभग 25 दिनों के अंतराल के बाद आयोजित सशक्त स्थायी समिति की बैठक में भारी सियासी ड्रामा देखने को मिला. बैठक की अध्यक्षता भले ही महापौर निर्मला साहू कर रही थीं. लेकिन सातों नवनिर्वाचित सदस्यों की अभूतपूर्व गोलबंदी के आगे उन्हें करारी शिकस्त झेलनी पड़ी. पिछले दरवाजे से बिना चर्चा के प्रोसिडिंग में 19 योजनाओं को गुपचुप तरीके से शामिल करना महापौर को भारी पड़ गया. उपमहापौर डॉ मोनालिसा समेत सभी सातों सदस्यों ने इसका तीखा विरोध किया. और भरे सदन में हाथ उठाकर इन सभी योजनाओं को सर्वसम्मति से रद्द कर दिया. इस सियासी प्रहार के सामने महापौर की शक्ति बिल्कुल शून्य नजर आई. नगर आयुक्त की अनुपस्थिति में उप नगर आयुक्त अमित कुमार ने बैठक का संचालन किया.

प्रोसिडिंग से छेड़छाड़ पर भड़के सदस्य, दोबारा गलती न करने की दी सख्त नसीहत

मामला बीती 15 जून को हुई बैठक की प्रोसिडिंग (कार्यवाही) से जुड़ा है. आरोप है कि महापौर ने बिना किसी चर्चा के अपने स्तर से विभिन्न वार्डों की 19 सड़क व नाला निर्माण की योजनाओं को इसमें शामिल करवा दिया था. बैठक शुरू होते ही सदस्यों ने इसे तानाशाही रवैया करार दिया. उपमहापौर ने कहा कि बिना चर्चा के सीधे योजनाओं को जोड़ना नियमसंगत नहीं है. सदस्यों ने एकजुट होकर इन योजनाओं को खारिज करते हुए महापौर को भविष्य में ऐसी गलती न करने की सख्त नसीहत दे डाली. इसके अलावा शहर की बदहाल स्ट्रीट लाइट. धीमी जल निकासी और मॉनसून में आधी-अधूरी नाला उड़ाही को लेकर भी अधिकारियों को जमकर फटकार लगाई गई.

बैठक में लिए गए तीन बड़े फैसले: 218 योजनाओं को हरी झंडी, 6 करोड़ की लाइटों का भुगतान अटका

समिति की बैठक में तीन बेहद महत्वपूर्ण फैसले लिए गए. पहले फैसले के तहत विभिन्न वार्डों के विकास के लिए पूर्व से तय 218 योजनाओं को सर्वसम्मति से पास कर अविलंब टेंडर निकालने का आदेश दिया गया. दूसरे फैसले में बाबा गरीबनाथ कॉरिडोर निर्माण के लिए पर्यटन विभाग को एनओसी देने से पहले नगर आयुक्त को पूरी डीपीआर सशक्त स्थायी समिति के समक्ष रखने को कहा गया है. वहीं. तीसरे बड़े फैसले के तहत नगर निगम द्वारा करीब 6 करोड़ की लागत से खरीदी गई 6016 लाइटों के भुगतान पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है. अब आईआईटी पटना द्वारा थर्ड पार्टी जांच के बाद ही एजेंसी को भुगतान किया जाएगा.


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देवेश कुमार

लेखक के बारे में

By देवेश कुमार

पत्रकारिता के क्षेत्र में देवेश को 17 वर्षों का अनुभव है. उच्च शिक्षा, जमीन रजिस्ट्री, नगर निगम की कार्यप्रणाली और स्मार्ट सिटी विकास जैसे विषयों पर इनका विशेष लेखन है. राजनीतिक और सामाजिक समसामयिक मुद्दों के साथ-साथ खोजी पत्रकारिता और ब्रेकिंग न्यूज कवरेज में ये सक्रिय हैं. तथ्यपरक, प्रभावी और जन सरोकार से जुड़ी रिपोर्टिंग इनकी प्रमुख पहचान है.

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