अब राज्य सरकार नहीं, नगर निकायों को खुद अपने खजाने से भरेंगे होंगे बिजली बिल

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बिहार में मुफ्त बिजली बंद: निकायों को खुद चुकाना होगा बिल

अब राज्य सरकार नहीं, नगर निकायों को खुद अपने खजाने से भरेंगे होंगे बिजली बिल

राज्य सरकार ने बिहार के नगर निकायों में मुफ्त बिजली की सुविधा पर पूरी तरह रोक लगा दी है. अब निकायों को बिजली कंपनियों को सीधे भुगतान करना होगा, अन्यथा कनेक्शन काटे जाएंगे. इस फैसले से स्ट्रीट लाइट और जलापूर्ति सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं.

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बिहार के नगर निकायों में अब तक मिल रही मुफ्त बिजली की सुविधा पर राज्य सरकार ने पूरी तरह रोक लगा दी है. शहरी विकास एवं आवास विभाग ने सख्त चेतावनी जारी करते हुए साफ कर दिया है कि अगर बिजली का बिल नहीं चुकाया गया, तो बिजली कंपनियां सीधे कनेक्शन काट देंगी. इस फैसले के बाद अगर किसी शहर की स्ट्रीट लाइट बुझती है या पानी की सप्लाई ठप होती है, तो इसकी पूरी जवाबदेही संबंधित नगर निकाय की होगी. सारा ठीकरा अब नगर आयुक्त और कार्यपालक पदाधिकारियों के सिर फूटेगा.

पटना मुख्यालय से भुगतान बंद, निकायों को खुद जुटाना होगा पैसा

अब तक पटना मुख्यालय से केंद्रीयकृत तरीके से सारा बिल चुका दिया जाता था, जिससे निकायों के अधिकारी बेफिक्र रहते थे. न तो बिजली बचाने की चिंता थी और न ही मीटर चेक करने का सिरदर्द था. कई जगह बिना जांचे-परखे बिल पास होने से ऑडिट में गड़बड़ी की आशंका रहती थी. लेकिन अब खेल बदल गया है. विभाग के निर्देशानुसार, निकायों को षष्ठम राज्य वित्त आयोग से मिलने वाले पैसे या टैक्स जैसे अपने आंतरिक स्रोतों से ही बिजली बिल का भुगतान करना होगा. सरकार अब अपनी तरफ से एक रुपये भी नहीं देगी.

निकायों पर 880 करोड़ से अधिक का बकाया, पटना सबसे आगे

बिजली विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, राज्य के नगर निकायों, बुडको के पंपों, कार्यालयों और नल-जल योजना के मोटर पंपों को मिलाकर कुल 880.37 करोड़ रुपये की देय राशि है. वर्तमान में यह आंकड़ा 1000 करोड़ के पार भी हो सकता है. 1 अप्रैल 2026 तक के आंकड़ों के अनुसार, प्रमुख जिलों में पटना पर सबसे ज्यादा 23.95 करोड़ रुपये का संचित बकाया है. इसके बाद गया पर 13.92 करोड़, सीवान पर 7.44 करोड़ और मुजफ्फरपुर पर 5.20 करोड़ रुपये बकाया है.नगर निगमों की बात करें तो पटना नगर निगम 18.69 करोड़ रुपये के साथ शीर्ष पर है, जबकि गया नगर निगम पर 12.47 करोड़ और मुजफ्फरपुर नगर निगम पर 3.49 करोड़ रुपये बकाया है. विभाग ने साफ किया है कि समय पर भुगतान न होने से आम जनता सीधे प्रभावित होगी, क्योंकि स्ट्रीट लाइट और जलापूर्ति पंपों की बिजली काटी जा सकती है.त होगी.


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देवेश कुमार

लेखक के बारे में

By देवेश कुमार

पत्रकारिता के क्षेत्र में देवेश को 17 वर्षों का अनुभव है. उच्च शिक्षा, जमीन रजिस्ट्री, नगर निगम की कार्यप्रणाली और स्मार्ट सिटी विकास जैसे विषयों पर इनका विशेष लेखन है. राजनीतिक और सामाजिक समसामयिक मुद्दों के साथ-साथ खोजी पत्रकारिता और ब्रेकिंग न्यूज कवरेज में ये सक्रिय हैं. तथ्यपरक, प्रभावी और जन सरोकार से जुड़ी रिपोर्टिंग इनकी प्रमुख पहचान है.

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