बीआरएबीयू के शोध पत्रों के साइटेशन में रिकॉर्ड बढ़ोतरी, स्कोपस रिपोर्ट में बड़ी उपलब्धि

Author Ankit|Edited by Purushottam Kumar
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शोध सुधारों से बीआरए बिहार विवि के साइटेशन सूचकांक में उछाल, आंकड़ा 2000 के पार

बीआरए बिहार विश्वविद्यालय | Prabhat Khabar Network

बीआर आंबेडकर बिहार विश्वविद्यालय के शोध ढांचे में किए गए नीतिगत बदलावों का असर अब दिखने लगा है. स्कोपस डेटाबेस के अनुसार, विश्वविद्यालय के शोध पत्रों के साइटेशन में रिकॉर्ड बढ़ोतरी हुई है, जो 2000 के पार पहुंच गई है. शोध की गुणवत्ता बढ़ाने, पेटेंट और स्टार्टअप संस्कृति को बढ़ावा देने के विश्वविद्यालय के प्रयासों को नैक और एनआईआरएफ रैंकिंग में भी लाभ मिलेगा.

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Muzaffarpur News: बीआर आंबेडकर बिहार विश्वविद्यालय के शोध और शैक्षणिक ढांचे में किए गए नीतिगत बदलावों का सकारात्मक असर अब सामने आने लगा है. स्कोपस डेटाबेस के अनुसार विश्वविद्यालय के शोध पत्रों के साइटेशन में लगातार रिकॉर्ड बढ़ोतरी दर्ज की गई है. वर्ष 2023 में जहां साइटेशन की संख्या करीब 900 थी, वहीं 2024 में यह बढ़कर 1600 से अधिक हो गई. वर्ष 2025 के नवीनतम आंकड़ों में यह संख्या 2000 के पार पहुंच गई है. शोध प्रकाशनों की संख्या भी 2023 के 65 से बढ़कर 2024 में 73 और 2025 में 81 हो गई है.

शोध की गुणवत्ता बढ़ाने पर विश्वविद्यालय का फोकस

कुलपति प्रो. दिनेश चंद्र राय ने इस उपलब्धि पर खुशी जताते हुए कहा कि यह विश्वविद्यालय में शोध संस्कृति को मजबूत करने के लिए किए गए निरंतर प्रयासों का परिणाम है. उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय का उद्देश्य केवल शोध पत्रों की संख्या बढ़ाना नहीं, बल्कि उनकी गुणवत्ता, प्रामाणिकता और वैश्विक स्वीकार्यता सुनिश्चित करना है. उनका लक्ष्य विश्वविद्यालय को नए ज्ञान के सृजन का वैश्विक मंच बनाना है.

पेटेंट और स्टार्टअप संस्कृति को मिलेगा बढ़ावा

कुलपति ने बताया कि आने वाले समय में विश्वविद्यालय का विशेष फोकस पेटेंट, बौद्धिक संपदा अधिकार (आईपीआर) तथा परिसर में स्टार्टअप संस्कृति को बढ़ावा देने पर रहेगा. उन्होंने कहा कि शोध का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचना चाहिए और विश्वविद्यालय इसी दिशा में कार्य कर रहा है.

नैक और एनआईआरएफ रैंकिंग को मिलेगा लाभ

आईक्यूएसी निदेशक प्रो. नवेदुल हक ने कहा कि शोध मानकों में सुधार से आगामी नैक और एनआईआरएफ रैंकिंग में विश्वविद्यालय की स्थिति और मजबूत होगी. उन्होंने बताया कि कुलपति के स्वयं शोध गतिविधियों में सक्रिय रहने और युवा शोधकर्ताओं को मार्गदर्शन देने से विश्वविद्यालय में अनुसंधान का सकारात्मक वातावरण विकसित हुआ है. इस उपलब्धि पर शैक्षणिक समुदाय ने विश्वविद्यालय प्रशासन को बधाई दी.

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