मॉडल अस्पताल में अव्यवस्था का आलम, पांच दिनों से दोनों लिफ्ट खराब, सीढ़ियों से जाने को मजबूर मरीज

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मॉडल अस्पताल में अव्यवस्था का आलम, पांच दिनों से दोनों लिफ्ट खराब, सीढ़ियों से जाने को मजबूर मरीज

मुजफ्फरपुर के 29 करोड़ की लागत से बने नए मॉडल अस्पताल की हालत बेहद खराब है। महज एक साल में ही दोनों लिफ्टें पांच दिनों से बंद पड़ी हैं, जिससे मरीजों को भारी परेशानी हो रही है। गंभीर मरीजों को कंधों पर उठाकर सीढ़ियों से ले जाने की नौबत आ गई है।

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 Muzaffarpur Hospital Crisis:  जिले में करीब 29 करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत से बने नवनिर्मित मॉडल अस्पताल को शुरू हुए महज एक साल ही हुए हैं.लेकिन इतने कम समय में ही यह अस्पताल मरीजों को आधुनिक सुविधाएं देने के बजाय उनके लिए बड़ी परेशानी का सबब बन चुका है.अस्पताल में तकनीकी देखरेख की भारी कमी के कारण हर महीने में कम से कम तीन से चार बार दोनों लिफ्ट खराब हो जा रही हैं.ताजा स्थिति यह है कि पिछले पांच दिनों से अस्पताल की दोनों लिफ्ट पूरी तरह से बंद पड़ी हैं, जिससे मरीजों की आफत आ गई है.मंगलवार को भी सुबह जब लिफ्ट ठीक नहीं हुई, तो गंभीर मरीजों के परिजनों का धैर्य जवाब दे गया और वे दूसरी मंजिल पर जाने के लिए अस्पताल में जमकर हंगामा करने लगे.काफी देर तक कोई सुनवाई नहीं होने पर लाचार मरीज सीढ़ियों के सहारे घिसटते हुए अपने वार्ड और इमरजेंसी तक जाने को विवश हुए.

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अधिकारियों को भनक तक नहीं, शिकायत के बाद खुली नींद

इस पूरे मामले में सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि अस्पताल के आला अधिकारियों को इस गंभीर समस्या की भनक तक नहीं थी.पांच दिनों से लिफ्ट बंद रहने के बावजूद प्रबंधन चैन की नींद सो रहा था.जब इमरजेंसी में इलाज कराने आए अत्यंत गंभीर मरीजों के परिजनों ने थक-हारकर सीधे अस्पताल अधीक्षक और सिविल सर्जन से इसकी लिखित व मौखिक शिकायत की, तब जाकर शीर्ष अधिकारियों को इस बड़ी खराबी का पता चला.अधिकारियों ने अपनी अज्ञानता जाहिर करते हुए कहा कि उन्हें लिफ्ट खराब होने की कोई पूर्व जानकारी नहीं थी और अब वे इसे दिखवा रहे हैं.

कंधे और गोद में मरीजों को ऊपरी मंजिल पर ले जाने की मजबूरी

लिफ्ट पूरी तरह ठप होने के कारण अस्पताल के ऊपरी वार्डों में भर्ती होने वाले मरीजों की मुसीबत बेहद बढ़ गई है.गंभीर रूप से बीमार और फ्रैक्चर वाले मरीजों को स्ट्रेचर या व्हीलचेयर से ऊपरी वार्ड तक पहुंचाना बिल्कुल मुमकिन नहीं हो पा रहा है.ऐसे में बेबस और लाचार परिजन खुद ही अपने मरीजों को गोद में या अपने कंधे पर उठाकर सीढ़ियों के पथरीले रास्ते से वार्डों तक ले जाने को मजबूर हैं, जिससे मरीजों की जान को भी खतरा बना हुआ है.

अस्पताल प्रबंधन की सफाई और सर्वर डाउन की दोहरी मार

इस पूरे मामले पर अस्पताल प्रबंधक प्रवीण कुमार ने सफाई देते हुए कहा कि लिफ्ट लगाने वाली संबंधित वेंडर कंपनी को खराबी की आधिकारिक सूचना दे दी गई है.कंपनी के तकनीकी इंजीनियरों के आते ही दोनों लिफ्ट को जल्द ठीक करा दिया जाएगा.दूसरी तरफ, अस्पताल आने वाले मरीज 'सर्वर डाउन' होने की दोहरी मार से भी जूझ रहे हैं.इलाज के लिए पहुंचे लोगों का कहना है कि पर्चा बनवाने से लेकर अन्य डिजिटल कामों के लिए घंटों लाइन में खड़ा रहना पड़ता है, जिससे मरीजों और परिजनों का गुस्सा अब सातवें आसमान पर है.

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