एसकेएमसीएच पहुंची लक्ष्य की टीम, भंडार कक्ष में लटका मिला ताला

Updated at : 02 Mar 2025 1:03 AM (IST)
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एसकेएमसीएच पहुंची लक्ष्य की टीम, भंडार कक्ष में लटका मिला ताला

एसकेएमसीएच पहुंची लक्ष्य की टीम, भंडार कक्ष में लटका मिला ताला

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लेबर रूम में बाथरूम नहीं देख टीम ने जतायी नाराजगी

संवाददाता, मुजफ्फरपुर

एसकेएमसीएच के एमसीएच में निरीक्षण के लिए शनिवार को लक्ष्य की दो सदस्यीय केंद्रीय टीम पहुंची. टीम में डॉ. विक्रम और साकेत अरोड़ा थे. एसकेएमसीएच के सेमिनार हॉल में अधिकारियों ने टीम का स्वागत किया और चल रही तैयारियों के बारे में बताया. पिछले एक महीने से इसकी तैयारी में जुटे अस्पताल प्रबंधन की पोल खुल गयी. टीम को प्रशिक्षित कर्मियों की भारी कमी, संसाधनों की जानकारी न होना और अव्यवस्था दिखी. प्रबंधन खामियां को जल्द दूर करने की बात कह रही है. जांच टीम जब भंडार कक्ष का निरीक्षण करने पहुंची, तो वहां ताला लटका मिला. अस्पताल प्रशासन को यह भी नहीं पता था कि चाबी कहां है. टीम पूरे 10 मिनट तक ताला खुलने का इंतजार करती रही, लेकिन विभागाध्यक्ष से लेकर कर्मी तक चाबी ढूंढते रहे. केंद्रीय टीम दूसरे तल स्थित लेबर रूम में पहुंची, तो वहां मरीजों के लिए कोई बाथरूम नहीं मिला. यह देखकर टीम ने नाराजगी जाहिर की.

संसाधनों की जानकारी नहीं, मची रही अफरातफरी

निरीक्षण के दौरान कई कर्मियों को अस्पताल में मौजूद संसाधनों की जानकारी ही नहीं थी. टीम ने जब मशीनों और दवाओं के स्टॉक का ब्योरा मांगा, तो कर्मचारी इधर-उधर भागते नजर आये. विभागाध्यक्ष को खुद कर्मियों को समझाना पड़ा कि टीम को क्या जवाब देना है. एमसीएच से जुड़े स्टाफ ने बताया कि ट्रेनिंग स्टाफ की ड्यूटी बदल दी है जबकि तीन दिन तक उनकी ड्यूटी नहीं बदलनी थी. निरीक्षण टीम ने अस्पताल में डॉक्टरों और अन्य कर्मचारियों की ड्यूटी का रोस्टर मांगा. डॉक्टरों का रोस्टर तो मिला, लेकिन नर्सिंग स्टाफ, तकनीशियन और सफाई कर्मियों का कोई रिकॉर्ड नहीं मिला.

फरवरी में मिला था राज्य स्तरीय प्रामाणिकता

एसकेएमसीएच के एमसीएच को पिछले साल फरवरी में लक्ष्य का राज्य स्तरीय प्रामाणिकता मिला था. प्रामाणिकता मिलने के बाद अस्पताल प्रबंधन राष्ट्रीय प्रामाणिकता की तैयारी में जुटी हुई थी. एसकेएमसीएच सूबे की पहली मेडिकल कॉलेज है जिसे राज्य स्तरीय लक्ष्य का प्रामाणिकता मिला है. एसकेएमसीएच अधीक्षक प्रो. डॉ. कुमारी बिभा ने बताया कि टीम निरीक्षण करने आयी. इस बार प्रामाणिकता नहीं मिलती है तो तीन साल का इंतजार करना पड़ेगा.

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