द.कोरिया में भी हिंदी प्रेमी, छात्र निकालते हैं समाचार पत्रिका

Published by : Prabhat Khabar News Desk Updated At : 09 Jan 2025 8:36 PM

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दक्षिण कोरिया में भी हिंदी प्रेमी हैं. यहां के छात्र हिंदी में कोरियन समाचार पत्रिका निकालते हैं. युवाओं में हिंदी पढ़ने-लिखने और बोलने का जुनून साफ दिखता है.

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विनय, मुजफ्फरपुरदक्षिण कोरिया में भी हिंदी प्रेमी हैं. यहां के छात्र हिंदी में कोरियन समाचार पत्रिका निकालते हैं. युवाओं में हिंदी पढ़ने-लिखने और बोलने का जुनून साफ दिखता है. वे इस भाषा में प्रवीणता भी हासिल कर रहे हैं.

हिंदी अब ग्लोबल हो चुकी है.मध्य अफ्रीका के देश चाड के बाद अब दक्षिण कोरिया के युवाओं में हिंदी सीखने का जुनून है. यहां के छात्र न केवल हिंदी में उच्च शिक्षा ले रहे हैं, बल्कि इसी भाषा में कोरिया समाचार भी निकाल रहे हैं. इसकी शुरुआत साउथ कोरिया के सियोल में रहने वाले डॉ ज्ञान प्रकाश ने पिछले वर्ष की थी. डॉ ज्ञान सियोल के हंगुक यूनिवर्सिटी ऑफ फॉरेन स्टडीज में हिंदी के प्राध्यापक हैं. शहर के डॉ राम मनोहर लोहिया कॉलेज में हिंदी के वे सहायक प्राध्यापक भी रहे हैं. पिछले दो वर्षों से हंगुक यूनिवर्सिटी के हिंदी विभाग में विजिटिंग प्रोफेसर हैं.

हिंदी विभाग में 102 छात्र-छात्राएं

डॉ ज्ञान ने बताया कि इस यूनिवर्सिटी के हिंदी विभाग में 102 छात्र-छात्राएं हिंदी में उच्च शिक्षा ले रहे हैं. ये सभी हिंदी बोलते हैं और दूसरों को भी हिंदी पढ़ाते हैं. भारत की सभ्यता व संस्कृति इन्हें पसंद है. यही वजह है कि इन छात्रों ने हिंदी विषय चुना है. इस यूनिवर्सिटी में 47 विदेशी भाषाओं के अध्ययन की सुविधा है, जिसमें हिंदी में छात्रों की संख्या सबसे अधिक है. वैश्विक स्तर पर हिंदी की लोकप्रियता तेजी से बढ़ रही है. इस भाषा को सीखने की प्रति कोरिया के छात्र काफी रुचि ले रहे हैं.पत्रिका के लिए समाचार संकलन भी छात्र खुद ही करते हैं. यह पत्रिका यहां के हिंदी भाषी लोग पसंद करते हैं.

ओसाका यूनिवर्सिटी में भी हिंदी सीखने वाले बढ़े

जापान में भी हिंदी सीखने के लिए छात्रों की रुचि पहले की अपेक्षा बढ़ी है.यहां ओसाका यूनिवर्सिटी के हिंदी विभाग में आठ वर्षों से डॉ वेद प्रकाश सिंह छात्रों को हिंदी पढ़ा रहे हैं. डॉ वेद प्रकाश बताते हैं कि उनके विभाग में 102 छात्र हिंदी से बीए व एमए कर रहे हैं. हिंदी साहित्य के प्रति भी छात्रों का गहरा लगाव है. भक्तिकाल के साहित्य छात्राें को काफी पसंद है. पिछले आठ वर्षों में छात्रों की संख्या लगातार बढ़ रही है.हिंदी सीखने वाले छात्र अब आपस में हिंदी में ही बात करते हैं. इससे लगता ही नहीं किसी और देश में पढ़ा रहा हूं.हिंदी के प्रचार-प्रसार में विगत वर्षों के दौरान काफी तेजी आयी है.

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